{"_id":"ef7d679d39bb27a1f028fbedd0d7321b","slug":"students-learned-yoga-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"छात्राओं ने सीखा योग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
छात्राओं ने सीखा योग
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 23 Feb 2016 11:14 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अफीम कोठी के निकट रानीपुरवा स्थित बालबाड़ी केंद्र परिसर में चल रहे सरस्वती देवी नारी ज्ञान स्थली महाविद्यालय के राष्ट्रीय सेवा योजना शिविर में मंगलवार को छात्राओं ने योगाभ्यास सीखा। सरस्वती देवी नारी ज्ञान स्थली महाविद्यालय की छात्राओं ने शिविर में तीसरे दिन योगाभ्यास सीखा।
शिक्षिका डॉ. नीलम छावड़ा, अमिता श्रीवास्तव, शिवानी चतुर्वेदी की मौजूदगी में सौम्या, सुजाता, रीना, अनुष्का, अंकिता, नुपुर, ऊषा, लक्ष्मी, स्नेहलता, मीनाक्षी, रीता, वैशाली, नेहा आदि छात्राओं ने प्राणायाम सहित विभिन्न अभ्यासों को संगीत व नृत्य के साथ प्रस्तुत किया।
महाविद्यालय की संस्थापिका डॉ. कृष्णा सिन्हा ने बताया कि दूसरे सत्र में छात्राओं की वाद-विवाद प्रतियोगिता हुई, जिसमें कर्मयोग के महत्व पर चर्चा की गई।
विज्ञापन
बालबाड़ी केंद्र पर प्रशिक्षिका समता धनकानी की ओर से योग को नई विधा देने का प्रयास किया गया। छात्राओं ने शिक्षिका शिवानी चतुर्वेदी की अगुवाई में योग के विभिन्न अभ्यासों को संगीत व नृत्य के संग प्रस्तुत कर नीरस योग को मृदुल धारा में परिवर्तित करने का अनोखा प्रयास किया।
विज्ञापन
शिक्षिका डॉ. नीलम छावड़ा, अमिता श्रीवास्तव, शिवानी चतुर्वेदी की मौजूदगी में सौम्या, सुजाता, रीना, अनुष्का, अंकिता, नुपुर, ऊषा, लक्ष्मी, स्नेहलता, मीनाक्षी, रीता, वैशाली, नेहा आदि छात्राओं ने प्राणायाम सहित विभिन्न अभ्यासों को संगीत व नृत्य के साथ प्रस्तुत किया।
विज्ञापन
महाविद्यालय की संस्थापिका डॉ. कृष्णा सिन्हा ने बताया कि दूसरे सत्र में छात्राओं की वाद-विवाद प्रतियोगिता हुई, जिसमें कर्मयोग के महत्व पर चर्चा की गई।
विज्ञापन
बालबाड़ी केंद्र पर प्रशिक्षिका समता धनकानी की ओर से योग को नई विधा देने का प्रयास किया गया। छात्राओं ने शिक्षिका शिवानी चतुर्वेदी की अगुवाई में योग के विभिन्न अभ्यासों को संगीत व नृत्य के संग प्रस्तुत कर नीरस योग को मृदुल धारा में परिवर्तित करने का अनोखा प्रयास किया।