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जंग के बीच तिरंगे ने दिलाया नया जीवन

Wed, 02 Mar 2022 11:11 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 02 Mar 2022 11:11 PM IST
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फोटो-9-गोंडा में छपिया थाना के उजागरपुर रेहरवा में अपने माता-पिता के साथ जैनुद्दीन। (संवाद) - फोटो : GONDA
गोंडा। यूक्रेन के विनीसिया सिटी में फंसे गोंडा के मेडिकल छात्र जैनुद्दीन अंसारी यूक्रेन-रूस में छिड़ी जंग की हकीकत बयां करते सिहर उठते हैं। कुछ देर गुमशुम होने के बाद बताते हैं कि रूस की सेना बमों और मिसाइलों से धमाका करती थी, तो यूनिवर्सिटी के छात्र दहशत में आकर बंकर की ओर भागते थे। शहर में सायरन बजने लगता था। जिसका संकेत होता था कि खतरा कभी भी सिर पर आ सकता है। सभी छात्र बंकर में शरण ले लेते थे। चार-छह घंटे धमाकों की गूंज सुनाई पड़ती थी। उन्हें एहसास होता था कि अब धमाका नहीं होगा तब वह सभी पांच-पांच की टुकड़ियों में निकलकर यूनिवर्सिटी हॉस्टल में पहुंचते थे।
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जैनुद्दीन बताते हैं कि जंग के बीच जान फंसी थी। मगर मदद के नाम पर यूक्रेन तो छोड़िए भारतीय एंबेसी से संपर्क करने पर भी मदद की उम्मीद टूटती नजर आ रही थी। हुआ भी यही। विनीसिया से निकलने के लिए एंबेसी की तरफ से कोई मदद नहीं पहुंची। तब यूनिवर्सिटी की एक टीचर ने छात्रों की फरियाद पर एक बस का इंतजाम कराया। जिसमें यूनिवर्सिटी के 60 भारतीय छात्रों के साथ वह भी रोमानिया के लिए निकल पड़े। मगर टीचर ने बताया था कि यूक्रेन की सेना अगर बस पर और आपके हाथों में भारतीय झंडा होगा तो उन्हें नहीं रोकेगी। रूसी सेना भी भारतीय झंडे को देखकर न तो अटैक करेगी और न ही मंजिल तक पहुंचने में रुकावट बनेगी। भारतीय झंडे के सहारे वह साथी छात्रों के साथ रोमोनिया के शरणार्थी कैंप में जब पहुंचा तो लगा कि खतरा दूर हो गया है।
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बॉर्डर पर फंसे हैं ढाई हजार छात्र
यूक्रेन के अलग-अलग शहरों में पढ़ाई कर रहे छात्र रूस से छिड़ी जंग के बाद किसी तरह से यूक्रेन से निकलकर रोमानिया, पोलैंड, हंगरी व सोफिया बॉर्डर पर तो पहुंच गए मगर फ्लाइट न मिलने से अभी भी वहां से शरणार्थी कैंप में दिन गुजार रहे हैं। भारतीय एंबेसी से उन्हें सुरक्षित भारत लाने का आश्वासन तो मिल रहा है, मगर अभी तक उन्हें भारत पहुंचाने के इंतजाम नहीं हो पाए हैं।
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पांच मेडिकल यूनिवर्सिटी में हैं ढाई हजार भारतीय छात्र
यूक्रेन के चार शहरों खारकीव, वैसेल्कीव, सुमी, विनीसिया व ओडिशा शहरों के पांच मेडिकल यूनिवर्सिटी में भारतीय छात्र मेडिकल की पढ़ाई करते हैं। छपिया के उजागरपुर रेहरवा के मेडिकल छात्र जैनुद्दीन की मानें तो खारकीव में दो मेडिकल यूनिवर्सिटी व वैसेल्कीव, सोमी, विनीसिया व उड़ीसा शहरों में एक-एक मेडिकल यूनिवर्सिटी है। जिसमें भारतीय छात्रों सहित विभिन्न देशों के करीब ढाई हजार छात्र पढ़ाई कर रहे हैं।

सायरन बजते ही बंकर में शरण लेते थे छात्र
यूक्रेन के शहरों में मेडिकल की पढ़ाई करने गए भारतीय छात्र बमबारी के बीच फंसे थे। यूक्रेन के शहरों में रूस के हमले के दौरान शहर में सायरन बजते ही अपनी जान बचाने को मेडिकल यूनिवर्सिटी के सभी छात्र बंकरों में शरण ले लेते थे। बमबारी का जलजला समाप्त होने के बाद छात्र दोबारा कॉलेज कैंपस में जाते थे। जैनुद्दीन की माने तो यह स्थित उनके साथ ही विभिन्न देशों के छात्रों मेें साथ तकरीबन पांच दिनों तक रही।
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