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Gonda News: मदरसा छात्रों के वजीफे में भी खेल
Tue, 14 Jan 2025 11:57 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Tue, 14 Jan 2025 11:57 PM IST
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गोंडा। फाइलों में चल रहे 299 मदरसों के बाद अब वहां छात्रों के वजीफे के नाम पर खेल की भी जांच होगी। इसके लिए टीम ने साक्ष्य जुटाने शुरू कर दिए हैं। यह भी पता लगाया जा रहा है कि कौन-कौन सी सरकारी योजनाओं का लाभ दिया गया, कुल कितने छात्रों को पंजीकृत दिखाया गया, उनको कितनी रकम वजीफे के तौर पर दी गई। इसके साथ ही मदरसों में नियुक्त किए गए शिक्षक अब कहां हैं?
नेपाल सीमा से सटे संवेदनशील जिले में मदरसा आधुनिकीकरण योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। 357 मदरसों में से 299 का मूल डिस्पैच रजिस्टर से मिलान ही नहीं हो सका है। इनमें से 126 मदरसे मौके पर मिले ही नहीं। संबंधित मदरसों में तैनात करीब 800 शिक्षकों पर वर्ष 2013 से 2015 के मध्य मानदेय के रूप में करोड़ों रुपये खर्च कर दिए गए। मामले में भ्रष्टाचार निवारण संगठन ने समाज कल्याण विभाग में उपनिदेशक के पद पर तैनात तत्कालीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी अमरजीत सिंह व लिपिक शमीम अहमद के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है।
एक विभागीय अधिकारी के अनुसार मामले में एक बड़ा गिरोह काम कर रहा है। भ्रष्टाचार निवारण संगठन के प्रभारी निरीक्षक धनंजय कुमार सिंह का कहना है कि रिकॉर्ड मिलने पर ही कुछ कहा जा सकता है। मुकदमा दर्ज कराया गया है। अधिकारियों को पूरे प्रकरण से अवगत कराया गया है। उनके निर्देश पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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वर्ष 2022 में 82 मदरसों का रोका था अनुदान
मदरसों में शासन से स्नातक पास शिक्षकों को छह-छह हजार और परास्नातक शिक्षकों को 12-12 हजार रुपये मासिक मानदेय मिलता था। इन शिक्षकों का काम था कि वे छात्रों को दीनी तालीम के अतिरिक्त विज्ञान, गणित व अंग्रेजी विषय की भी शिक्षा दें। इनमें कई मदरसों की सूचना शिक्षा विभाग के यूडायस पर भी अपडेट नहीं थी। सत्यापन में उनका संचालन मानक के विपरीत मिला था। इसपर वर्ष 2022 में तत्कालीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी पवन सिंह ने 82 मदरसों को आधुनिकीकरण योजना से बाहर किया था।
हाफिज की तैनाती में भी मिली थी खामी
वर्ष 2022 में ही कुछ मदरसों में बिना प्रमाणपत्र के हाफिज पद पर शिक्षकों को तैनात कर सरकारी खजाने से वेतन व भत्ते दिए जा रहे थे। मदरसों के तहतानिया (प्राइमरी) कक्षा में नियुक्त अध्यापकों के हाफिज के प्रमाणपत्र जारी करने वाली संस्था ने किस अधिकार से प्रमाणपत्र जारी किए थे, इसका रिकॉर्ड विभाग के पास नहीं मिला था। तत्कालीन अफसरों ने इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी थी, लेकिन प्रकरण फाइलों में दबकर रह गया।
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नेपाल सीमा से सटे संवेदनशील जिले में मदरसा आधुनिकीकरण योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। 357 मदरसों में से 299 का मूल डिस्पैच रजिस्टर से मिलान ही नहीं हो सका है। इनमें से 126 मदरसे मौके पर मिले ही नहीं। संबंधित मदरसों में तैनात करीब 800 शिक्षकों पर वर्ष 2013 से 2015 के मध्य मानदेय के रूप में करोड़ों रुपये खर्च कर दिए गए। मामले में भ्रष्टाचार निवारण संगठन ने समाज कल्याण विभाग में उपनिदेशक के पद पर तैनात तत्कालीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी अमरजीत सिंह व लिपिक शमीम अहमद के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है।
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एक विभागीय अधिकारी के अनुसार मामले में एक बड़ा गिरोह काम कर रहा है। भ्रष्टाचार निवारण संगठन के प्रभारी निरीक्षक धनंजय कुमार सिंह का कहना है कि रिकॉर्ड मिलने पर ही कुछ कहा जा सकता है। मुकदमा दर्ज कराया गया है। अधिकारियों को पूरे प्रकरण से अवगत कराया गया है। उनके निर्देश पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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वर्ष 2022 में 82 मदरसों का रोका था अनुदान
मदरसों में शासन से स्नातक पास शिक्षकों को छह-छह हजार और परास्नातक शिक्षकों को 12-12 हजार रुपये मासिक मानदेय मिलता था। इन शिक्षकों का काम था कि वे छात्रों को दीनी तालीम के अतिरिक्त विज्ञान, गणित व अंग्रेजी विषय की भी शिक्षा दें। इनमें कई मदरसों की सूचना शिक्षा विभाग के यूडायस पर भी अपडेट नहीं थी। सत्यापन में उनका संचालन मानक के विपरीत मिला था। इसपर वर्ष 2022 में तत्कालीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी पवन सिंह ने 82 मदरसों को आधुनिकीकरण योजना से बाहर किया था।
हाफिज की तैनाती में भी मिली थी खामी
वर्ष 2022 में ही कुछ मदरसों में बिना प्रमाणपत्र के हाफिज पद पर शिक्षकों को तैनात कर सरकारी खजाने से वेतन व भत्ते दिए जा रहे थे। मदरसों के तहतानिया (प्राइमरी) कक्षा में नियुक्त अध्यापकों के हाफिज के प्रमाणपत्र जारी करने वाली संस्था ने किस अधिकार से प्रमाणपत्र जारी किए थे, इसका रिकॉर्ड विभाग के पास नहीं मिला था। तत्कालीन अफसरों ने इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी थी, लेकिन प्रकरण फाइलों में दबकर रह गया।