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50 लाख से श्रवण पाकड़ धाम का होगा जीर्णोद्धार
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बभनान (गोंडा)। अयोध्या की 84 कोसी सीमा में स्थित श्रवण पाकड़ धाम का जल्द कायाकल्प कराया जाएगा। यहां मंदिर व सरोवर को पर्यटकों के लिए संवारा जाएगा। पर्यटन क्षेत्र में शुमार श्रवण पाकड़ धाम पर हर साल हजारों लोग दर्शन पूजन के लिए आते हैं।
स्वामी नरायन छपिया व अयोध्या आने वाले लोग भी यहां पहुंचते हैं। वहीं धाम पर स्थित मंदिर व पोखरे पर स्नान घाट के क्षतिग्रस्त होने व गंदगी के कारण लोगों का यहां से मोहभंग हो रहा था। इस पर क्षेत्रीय विधायक प्रभात कुमार वर्मा ने मुख्यमंत्री से मिलकर मंदिर व पोखरे के कायाकल्प की मांग की थी। इस पर शासन ने मुख्यमंत्री पर्यटन संवर्धन योजना के तहत मंदिर व पोखरे के जीर्णोद्धार के लिए 50 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान करते हुए करीब 23 लाख रुपये का बजट जारी कर दिया है।
यहां पर श्रवण कुमार को लगा था बाण
पौराणिक मान्यता के अनुसार त्रेता युग में भ्रमण के दौरान श्रवण कुमार इसी स्थान पर माता पिता के साथ विश्राम के लिए रुके थे। श्रवण कुमार ने यहां पाकड़ की दातुन करके फेंक दिया था। बाद में यहां पाकड़ का एक विशाल पेड़ तैयार हो गया। कथाओं के अनुसार इस जगह पर वह माता-पिता को बैठा कर उनकी प्यास बुझाने के लिए पानी लेने निकले थे।
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जहां सरोवर पर उन्हें अयोध्या के राजा दशरथ का शब्दभेदी बाण लगा था। तभी से इस क्षेत्र का नाम श्रवण पाकड़ हो गया। यहां पर प्रति वर्ष माघ महीने में विशाल मेला लगता है। गुजरात, महाराष्ट्र सहित अन्य प्रांतों से आने वाले स्वामीनारायण संप्रदाय के हरिभक्त छपिया मंदिर में दर्शन करने के बाद यहां आकर दर्शन करते हैं।
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स्वामी नरायन छपिया व अयोध्या आने वाले लोग भी यहां पहुंचते हैं। वहीं धाम पर स्थित मंदिर व पोखरे पर स्नान घाट के क्षतिग्रस्त होने व गंदगी के कारण लोगों का यहां से मोहभंग हो रहा था। इस पर क्षेत्रीय विधायक प्रभात कुमार वर्मा ने मुख्यमंत्री से मिलकर मंदिर व पोखरे के कायाकल्प की मांग की थी। इस पर शासन ने मुख्यमंत्री पर्यटन संवर्धन योजना के तहत मंदिर व पोखरे के जीर्णोद्धार के लिए 50 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान करते हुए करीब 23 लाख रुपये का बजट जारी कर दिया है।
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यहां पर श्रवण कुमार को लगा था बाण
पौराणिक मान्यता के अनुसार त्रेता युग में भ्रमण के दौरान श्रवण कुमार इसी स्थान पर माता पिता के साथ विश्राम के लिए रुके थे। श्रवण कुमार ने यहां पाकड़ की दातुन करके फेंक दिया था। बाद में यहां पाकड़ का एक विशाल पेड़ तैयार हो गया। कथाओं के अनुसार इस जगह पर वह माता-पिता को बैठा कर उनकी प्यास बुझाने के लिए पानी लेने निकले थे।
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जहां सरोवर पर उन्हें अयोध्या के राजा दशरथ का शब्दभेदी बाण लगा था। तभी से इस क्षेत्र का नाम श्रवण पाकड़ हो गया। यहां पर प्रति वर्ष माघ महीने में विशाल मेला लगता है। गुजरात, महाराष्ट्र सहित अन्य प्रांतों से आने वाले स्वामीनारायण संप्रदाय के हरिभक्त छपिया मंदिर में दर्शन करने के बाद यहां आकर दर्शन करते हैं।