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Gonda News: नरायनपुर मर्दन में 15 दिन ठहरा था सद्दाम
Tue, 04 Jul 2023 11:18 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Tue, 04 Jul 2023 11:18 PM IST
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गोंडा। सद्दाम शेख गुजरात से आने के बाद देहात कोतवाली क्षेत्र के नरायनपुर मर्दन लालापुरवा में भी 15 दिन ठहरा था। यहां अपने साथी के घर पर रहकर वह इलाके में जमीन तलाश रहा था। इसी बीच उसकी मुलाकात करनपुर के पठान पुरवा के रहने वाले किस्मत अली से हो गई। किस्मत अली ने न सिर्फ सद्दाम की शादी करा दी बल्कि उसे जमीन व मकान भी दिला दिया।
नरायपुर मर्दन के रहने वाले राकेश गुप्त ने मंगलवार को बताया कि वह हाल ही में महाराष्ट्र से अपने घर आया था। उसे मीडिया में आई खबरों से पता चला कि यूपी एटीएस ने स्लीपिंग मॉड्यूल बन चुके सद्दाम शेख को गिरफ्तार कर लिया है। राकेश के मुताबिक वह वर्ष 2004 में गुजरात के सूरत में कंटेनर ड्राइवर था। वहीं सद्दाम से मुलाकात हुई थी। सद्दाम ने बताया था कि वही गोंडा के तरबगंज के परसदा का रहने वाला है। इसके बाद दोनों साथ में गोंडा आ गए। यहां 15 दिन तक सद्दाम उसके घर पर ठहरा था। राकेश के मुताबिक एक दिन बातचीत के दौरान सद्दाम से अपने घर ले चलने के लिए कहा कि तो वह साइकिल से उसे ले गया। मगर बेलसर पहुंचने पर तबीयत बिगड़ने का बहाना करके लौट आया था। अब उसकी असलियत सामने आई है।
एटीएस के हत्थे चढ़े सद्दाम शेख के मददगारों और हमराहों पर पुलिस की निगाहें टिक गईं हैं। करनपुर, पठानपुरवा, लालापुरवा और नारायनपुर मर्दन में उसके करीबियों की फेहरिस्त तैयार की जा रही है। करीबियों की गतिविधियों की जानकारी जुटाई जा रही है।
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पुलिस की जांच में यह बात सामने आई है कि नरायपुर मर्दन गांव का राकेश गुप्ता भी सद्दाम का सहयोगी था। वह साल 2005 से ही सद्दाम के संपर्क में था। इसके अलावा किस्मत अली, सिकंदर और रहमान भी निशाने पर हैं। सद्दाम के अन्य करीबियों की भी गतिविधियों के बारे में पड़ताल की जा रही है। एटीएस व पुलिस की छानबीन का दायरा बढ़ने से करनपुर के लोगों की बेचैनी भी बढ़ रही है।
साल 2004 में जिले के करनपुर में पांव जमाने के बाद सद्दाम अपनी टीम बनाने लगा। उसने राकेश को अपना सारथी बनाने का जाल बुना। राकेश गुजरात भी गया था और वह सद्दाम से सबसे करीबियों में शामिल था। राकेश के साल 2005 से सद्दाम के संपर्क में होने के साक्ष्य भी मिले हैं। गांव में सद्दाम का निकाह कराने से लेकर और हर तरह से उसकी मदद में शामिल किस्मत अली की गतिविधियों पर भी छानबीन शुरू हो गई है।
देहात कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक महेंद्र कुमार सिंह भी कहते हैं कि राकेश के बारे में छानबीन की जा रही है। अभी वह कहां है और क्या कर रहा, इसकी जानकारी नहीं हो सकी है। वहीं, एटीएस भी सद्दाम के सोशल मीडिया के प्लेटफार्म के जरिए पड़ताल कर उसके सहयोगियों की सूची तैयार कर रही है।
आतंक की जमीन मजबूत करने के लिए सद्दाम शेख ने कई रणनीति तैयार कर रखी थी। वह बेरोजगार युवकों को जोड़कर एक टीम बनाने के साथ ही आतंकी संगठनों से संपर्क कर फंड जुटाने में लगा था। एटीएस की जांच में भी यह बात सामने आई कि वह कई आतंकी संगठनों से प्रभावित था। वहीं, सद्दाम कुछ ऐसा करने की तैयारी में था, जिससे देश में बड़ा धमाका हो। एटीएस ने भी माना है कि वह बड़ी घटना से देश व प्रदेश का माहौल खराब करना चाहता था। वह इसी तरफ कदम बढ़ा रहा था मगर एटीएस की कार्रवाई ने उसके मंसूबों पर पानी फेर दिया।
सद्दाम ने कितने लोगों को जोड़ा था, इसका पता लगाना एटीएस के लिए चुनौती बना है। इसके लिए एटीएस उसे रिमांड पर लेने का प्रयास कर रहा है। जिससे सद्दाम की ओर से तैयार किए गए जेहादियों की पहचान कर शिकंजा कसा जा सके। फिलहाल अभी एक व्यक्ति का नाम तो सामने आया है और एक संदिग्ध है। जिनके बारे में पता लगाया जा रहा है।
एसपी आकाश तोमर ने बताया कि एटीएस की कई पहलुओं पर चल रही जांच में गोंडा पुलिस पूरा सहयोग कर रही है। इनपुट के आधार पर निगरानी की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। जो भी संदिग्ध लोग हैं, उनकी मॉनिटरिंग की जा रही है।
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नरायपुर मर्दन के रहने वाले राकेश गुप्त ने मंगलवार को बताया कि वह हाल ही में महाराष्ट्र से अपने घर आया था। उसे मीडिया में आई खबरों से पता चला कि यूपी एटीएस ने स्लीपिंग मॉड्यूल बन चुके सद्दाम शेख को गिरफ्तार कर लिया है। राकेश के मुताबिक वह वर्ष 2004 में गुजरात के सूरत में कंटेनर ड्राइवर था। वहीं सद्दाम से मुलाकात हुई थी। सद्दाम ने बताया था कि वही गोंडा के तरबगंज के परसदा का रहने वाला है। इसके बाद दोनों साथ में गोंडा आ गए। यहां 15 दिन तक सद्दाम उसके घर पर ठहरा था। राकेश के मुताबिक एक दिन बातचीत के दौरान सद्दाम से अपने घर ले चलने के लिए कहा कि तो वह साइकिल से उसे ले गया। मगर बेलसर पहुंचने पर तबीयत बिगड़ने का बहाना करके लौट आया था। अब उसकी असलियत सामने आई है।
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एटीएस के हत्थे चढ़े सद्दाम शेख के मददगारों और हमराहों पर पुलिस की निगाहें टिक गईं हैं। करनपुर, पठानपुरवा, लालापुरवा और नारायनपुर मर्दन में उसके करीबियों की फेहरिस्त तैयार की जा रही है। करीबियों की गतिविधियों की जानकारी जुटाई जा रही है।
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पुलिस की जांच में यह बात सामने आई है कि नरायपुर मर्दन गांव का राकेश गुप्ता भी सद्दाम का सहयोगी था। वह साल 2005 से ही सद्दाम के संपर्क में था। इसके अलावा किस्मत अली, सिकंदर और रहमान भी निशाने पर हैं। सद्दाम के अन्य करीबियों की भी गतिविधियों के बारे में पड़ताल की जा रही है। एटीएस व पुलिस की छानबीन का दायरा बढ़ने से करनपुर के लोगों की बेचैनी भी बढ़ रही है।
साल 2004 में जिले के करनपुर में पांव जमाने के बाद सद्दाम अपनी टीम बनाने लगा। उसने राकेश को अपना सारथी बनाने का जाल बुना। राकेश गुजरात भी गया था और वह सद्दाम से सबसे करीबियों में शामिल था। राकेश के साल 2005 से सद्दाम के संपर्क में होने के साक्ष्य भी मिले हैं। गांव में सद्दाम का निकाह कराने से लेकर और हर तरह से उसकी मदद में शामिल किस्मत अली की गतिविधियों पर भी छानबीन शुरू हो गई है।
देहात कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक महेंद्र कुमार सिंह भी कहते हैं कि राकेश के बारे में छानबीन की जा रही है। अभी वह कहां है और क्या कर रहा, इसकी जानकारी नहीं हो सकी है। वहीं, एटीएस भी सद्दाम के सोशल मीडिया के प्लेटफार्म के जरिए पड़ताल कर उसके सहयोगियों की सूची तैयार कर रही है।
आतंक की जमीन मजबूत करने के लिए सद्दाम शेख ने कई रणनीति तैयार कर रखी थी। वह बेरोजगार युवकों को जोड़कर एक टीम बनाने के साथ ही आतंकी संगठनों से संपर्क कर फंड जुटाने में लगा था। एटीएस की जांच में भी यह बात सामने आई कि वह कई आतंकी संगठनों से प्रभावित था। वहीं, सद्दाम कुछ ऐसा करने की तैयारी में था, जिससे देश में बड़ा धमाका हो। एटीएस ने भी माना है कि वह बड़ी घटना से देश व प्रदेश का माहौल खराब करना चाहता था। वह इसी तरफ कदम बढ़ा रहा था मगर एटीएस की कार्रवाई ने उसके मंसूबों पर पानी फेर दिया।
सद्दाम ने कितने लोगों को जोड़ा था, इसका पता लगाना एटीएस के लिए चुनौती बना है। इसके लिए एटीएस उसे रिमांड पर लेने का प्रयास कर रहा है। जिससे सद्दाम की ओर से तैयार किए गए जेहादियों की पहचान कर शिकंजा कसा जा सके। फिलहाल अभी एक व्यक्ति का नाम तो सामने आया है और एक संदिग्ध है। जिनके बारे में पता लगाया जा रहा है।
एसपी आकाश तोमर ने बताया कि एटीएस की कई पहलुओं पर चल रही जांच में गोंडा पुलिस पूरा सहयोग कर रही है। इनपुट के आधार पर निगरानी की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। जो भी संदिग्ध लोग हैं, उनकी मॉनिटरिंग की जा रही है।