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Gonda News: उतरौला और सादुल्लानगर में सद्दाम ने बनाई गहरी पैठ
Fri, 07 Jul 2023 11:29 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Fri, 07 Jul 2023 11:29 PM IST
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गोंडा। देशविरोधी गतिविधियों में संलिप्त होने के आरोप में गिरफ्तार सद्दाम शेख ने बलरामपुर के उतरौला और सादुल्लानगर क्षेत्र में गहरी पैठ बना ली थी। बहराइच में भी उसके कई करीबियों का पता चला है। सद्दाम के इन सभी करीबियों व हिमायतियों पर पुलिस व खुफिया महकमे की नजर है। वहीं, सद्दाम कहां का मूल निवासी है? ये अब तक रहस्य बना हुआ है। सद्दाम को गोंडा लाने वाला राकेश गुप्ता भी एटीएस को कोई अहम जानकारी नहीं दे सका है। राकेश को लेकर बहराइच गई एटीएस वहां से गोंडा लौट आई है। एटीएस अब राकेश को लेकर लखनऊ चली गई है। जहां सद्दाम को लेकर आगे की पड़ताल में राकेश की मदद ली जाएगी।
राकेश ने एटीएस को यही जानकारी दी है कि सद्दाम ने खुद को गोंडा का मूल निवासी बताया था। उसने एक बार बेलसर के परसदा का होने की बात कही थी मगर वहां कभी वह गया नहीं था। सद्दाम का अब तक मूल निवासी पता न चलना भी गंभीर माना जा रहा है। उसे लेकर बड़े खुलासे की आशंका जताई जा रही है।
देशविरोधी गतिविधियों में लिप्त होने के आरोप में गिरफ्तार सद्दाम शेख का परिवार न सिर्फ सदमे में हैं बल्कि बुरी तरह से सहमा भी है। प्राथमिक विद्यालय तुलसीपुर में पढ़ाई कर रहे उसके तीनों बच्चों ने पिता का नाम सामने आने के बाद स्कूल जाना ही छोड़ दिया है। परिजन भी बच्चों को स्कूल भेजने से परहेज कर रहे हैं। सद्दाम की बीवी रूबीना के मन में खौफ घर कर गया है। कहती है- कारण कहीं सद्दाम की वजह से बच्चों के साथ कुछ गलत न कर दे। वहीं, बच्चे भी सहमे दिखे।
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सद्दाम ने करनपुर में घर बनाने के बाद पास के कोंडरी गांव निवासी मोहर्रम अली की बेटी रूबीना से शादी रचा ली थी। उसके दो बेटे और एक बेटी है। बड़ा बेटा 11 साल का है और स्थानीय प्राइमरी स्कूल में कक्षा पांच में पढ़ता है। नौ साल की बेटी भी उसी स्कूल में कक्षा तीन में पढ़ती है। सबसे छोटा बेटा सात साल का है और वह कक्षा दो का छात्र है। तीनों बच्चे अब घर में ही रहते हैं। उनकी स्थिति यह है कि वह घर से बाहर तक नहीं निकल रहे हैं। घर पर कोई भी पहुंचता है तो सामने तक नहीं आते। एक बेटे से सामना हुआ तो वह पहले कुछ न बोला। काफी दुलराने पर सिर्फ इतना कहा कि मेरे अब्बू ऐसे हैं तो मेरे नाम से उनका नाम कटवा दीजिए और आंखों को हाथों से ढककर वह भीतर चला गया। काफी बुलाने पर भी नहीं आया। सद्दाम की पत्नी रूबीना भी कहती हैं कि बच्चे बहुत परेशान हैं, रात में किसी तरह सो पाते हैं।
सद्दाम की एक और करतूत सामने आई है। वह एक तो किसी से ज्यादा वाद-विवाद नहीं करता था। वहीं कहीं से अगर आ रहा है और रास्ते में सिपाही दिख जाए तो सलाम करता था। यही नहीं थोड़ी दूर तक के लिए लिफ्ट भी मांग लेता था। उसकी पत्नी के मामा किस्मत अली मानते हैं कि सद्दाम के भीतर कभी भी पुलिस का डर नहीं दिखा। इससे कभी कोई शंका कैसे हो सकती थी। वह किसी सिपाही को देखता था तो सलाम करके कह देता था कि साहब आगे चल रहे हों तो छोड़ दीजिए।
सद्दाम जहां खुद को सीधा दिखाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ता था, वहीं धार्मिक स्थलों पर जाने की बात से ही चिढ़ता था। वह कहता था कि कहीं जाने से क्या बदल जाएगा। वह खुद पर ही भरोसा करने की बात कहता था। किस्मत अली ने बातों ही बातों में बताया कि सद्दाम किसी धार्मिक स्थल पर चलने की बात कहने पर नाराज हो जाता था। ऐसे स्थलों और आयोजनों से वह दूरी बनाए रखता था।
सद्दाम शेख परिवार को भी ज्यादा समय नहीं देता था। वह काम के बहाने साल में छह से आठ महीने बाहर ही रहता था। साल में दो बार ही घर आता था। यह अलग बात थी कि आने पर महीने या डेढ़ महीने रहता था। वह परिवार को पूरा खर्चा भी नहीं देता था। कभी छह हजार तो कभी पांच हजार रुपये ही देता था। जबकि तीन बच्चों का खर्च कभी-कभी बढ़ जाता था। रूबीना कहती है कि खर्चा मांगने या घर आने की बात कहने पर वह नाराज हो जाता था।
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राकेश ने एटीएस को यही जानकारी दी है कि सद्दाम ने खुद को गोंडा का मूल निवासी बताया था। उसने एक बार बेलसर के परसदा का होने की बात कही थी मगर वहां कभी वह गया नहीं था। सद्दाम का अब तक मूल निवासी पता न चलना भी गंभीर माना जा रहा है। उसे लेकर बड़े खुलासे की आशंका जताई जा रही है।
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देशविरोधी गतिविधियों में लिप्त होने के आरोप में गिरफ्तार सद्दाम शेख का परिवार न सिर्फ सदमे में हैं बल्कि बुरी तरह से सहमा भी है। प्राथमिक विद्यालय तुलसीपुर में पढ़ाई कर रहे उसके तीनों बच्चों ने पिता का नाम सामने आने के बाद स्कूल जाना ही छोड़ दिया है। परिजन भी बच्चों को स्कूल भेजने से परहेज कर रहे हैं। सद्दाम की बीवी रूबीना के मन में खौफ घर कर गया है। कहती है- कारण कहीं सद्दाम की वजह से बच्चों के साथ कुछ गलत न कर दे। वहीं, बच्चे भी सहमे दिखे।
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सद्दाम ने करनपुर में घर बनाने के बाद पास के कोंडरी गांव निवासी मोहर्रम अली की बेटी रूबीना से शादी रचा ली थी। उसके दो बेटे और एक बेटी है। बड़ा बेटा 11 साल का है और स्थानीय प्राइमरी स्कूल में कक्षा पांच में पढ़ता है। नौ साल की बेटी भी उसी स्कूल में कक्षा तीन में पढ़ती है। सबसे छोटा बेटा सात साल का है और वह कक्षा दो का छात्र है। तीनों बच्चे अब घर में ही रहते हैं। उनकी स्थिति यह है कि वह घर से बाहर तक नहीं निकल रहे हैं। घर पर कोई भी पहुंचता है तो सामने तक नहीं आते। एक बेटे से सामना हुआ तो वह पहले कुछ न बोला। काफी दुलराने पर सिर्फ इतना कहा कि मेरे अब्बू ऐसे हैं तो मेरे नाम से उनका नाम कटवा दीजिए और आंखों को हाथों से ढककर वह भीतर चला गया। काफी बुलाने पर भी नहीं आया। सद्दाम की पत्नी रूबीना भी कहती हैं कि बच्चे बहुत परेशान हैं, रात में किसी तरह सो पाते हैं।
सद्दाम की एक और करतूत सामने आई है। वह एक तो किसी से ज्यादा वाद-विवाद नहीं करता था। वहीं कहीं से अगर आ रहा है और रास्ते में सिपाही दिख जाए तो सलाम करता था। यही नहीं थोड़ी दूर तक के लिए लिफ्ट भी मांग लेता था। उसकी पत्नी के मामा किस्मत अली मानते हैं कि सद्दाम के भीतर कभी भी पुलिस का डर नहीं दिखा। इससे कभी कोई शंका कैसे हो सकती थी। वह किसी सिपाही को देखता था तो सलाम करके कह देता था कि साहब आगे चल रहे हों तो छोड़ दीजिए।
सद्दाम जहां खुद को सीधा दिखाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ता था, वहीं धार्मिक स्थलों पर जाने की बात से ही चिढ़ता था। वह कहता था कि कहीं जाने से क्या बदल जाएगा। वह खुद पर ही भरोसा करने की बात कहता था। किस्मत अली ने बातों ही बातों में बताया कि सद्दाम किसी धार्मिक स्थल पर चलने की बात कहने पर नाराज हो जाता था। ऐसे स्थलों और आयोजनों से वह दूरी बनाए रखता था।
सद्दाम शेख परिवार को भी ज्यादा समय नहीं देता था। वह काम के बहाने साल में छह से आठ महीने बाहर ही रहता था। साल में दो बार ही घर आता था। यह अलग बात थी कि आने पर महीने या डेढ़ महीने रहता था। वह परिवार को पूरा खर्चा भी नहीं देता था। कभी छह हजार तो कभी पांच हजार रुपये ही देता था। जबकि तीन बच्चों का खर्च कभी-कभी बढ़ जाता था। रूबीना कहती है कि खर्चा मांगने या घर आने की बात कहने पर वह नाराज हो जाता था।