{"_id":"6463bd82002bdbae740dc066","slug":"rte-school-admission-gonda-news-c-13-1-239273-2023-05-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"Gonda News: गोंडा में 751 स्कूल आरटीई पोर्टल से ही ‘लापता’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Gonda News: गोंडा में 751 स्कूल आरटीई पोर्टल से ही ‘लापता’
Tue, 16 May 2023 10:59 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Tue, 16 May 2023 10:59 PM IST
विज्ञापन
गोंडा। शिक्षा के अधिकार अधिनियम (आरटीई एक्ट) से गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा देने की योजना से बचने के लिए जिले के कॉन्वेंट स्कूलों ने नया दांव चला है। यहां तो यूपी-आरटीई पोर्टल पर 751 स्कूलों ने पंजीकरण ही नहीं कराया है। इसमें शहर के नामी स्कूल भी शामिल हैं, जो शासन की इस महत्वपूर्ण योजना से गत दस वर्षों से दूरी बनाए हैं। इससे गरीब अभिभावक आवेदन ही नहीं कर सके। विभाग ने अब ऐसे स्कूलों की खोजबीन शुरू की है।
राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने पोर्टल पर बंद दिखाने वाले स्कूलों का ब्यौरा देते हुए विभाग को जांच कराने के लिए कहा है। आरटीई पोर्टल पर सिर्फ 220 स्कूल ही दिख रहे हैं, जहां गरीब परिवार आवेदन कर सकते हैं। जबकि 751 स्कूल ऐसे हैं जो आवेदन करते समय दिखते ही नहीं हैं। ऐसे में अभिभावक आवेदन ही नहीं कर पा रहे हैं। इससे करीब आठ हजार बच्चे योजना से वंचित हैं। दस सालों से चल रही इस योजना में स्कूलों की मनमानी की ओर अधिकारियों ने कभी ध्यान ही नहीं दिया जिससे उनकी हिम्मत बढ़ती चली गई।
-- -- -- -- -- -- -- -- --
पंजीकरण न होने से नहीं हो सकी मैपिंग
आरटीई एक्ट के तहत ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया पूरी की जाती है। इसके लिए जरूरी है कि ऑनलाइन आवेदन के समय जैसे ही अभिभावक अपना पता दर्ज करेगा, वहां के आसपास के स्कूल दिखेंगे। ऐसे में अभिभावक वरिष्ठता क्रम में पसंद कर लॉक कर देते हैं। पंजीकरण न होने से विभाग की ओर से 751 स्कूलों की मैपिंग ही नहीं हो पाई। ऐसे में जिन स्कूलों की मैपिंग नहीं है, उस क्षेत्र से आवेदन होने पर स्कूल दिखेगा ही नहीं और अभिभावक आवेदन भी नहीं कर सकेेंगे। इस तरह हर साल अभिभावक निराश होकर बैठ जाते हैं।
विज्ञापन
दो चरणों में 674 बच्चों का हो चुका प्रवेश
इस साल नए शैक्षिक सत्र के लिए दो चरणों में ऑनलाइन लॉटरी के माध्यम से 674 बच्चों को प्रवेश दिया गया है। लेकिन इसमें सिर्फ 220 स्कूल ही शामिल हैं। पहले चरण में 540 और दूसरे चरण में 134 बच्चों को प्रवेश दिया गया है, कुछ स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया चल रही है। वहीं तीसरे चरण के लिए भी प्रक्रिया चल रही है। उनका प्रवेश जून में छुट्टियों के बाद ही होगा।
दो श्रेणियों के परिवारों को मिलता है योजना का लाभ
शिक्षा अधिकार अधिनियम के तहत प्रवेश योजना में दो श्रेणी के लोगों को लाभ दिया जाता है। पहला अलाभित समूह है जिसमें दलित, पिछड़े वर्ग के बच्चे, निशक्त, एचआईवी व कैंसर पीड़ित अभिभावकों के बच्चे, निराश्रित व बेघर बच्चे पात्रता श्रेणी में आते हैं। दूसरी श्रेणी में दुर्बल वर्ग के ऐसे माता-पिता या संरक्षक जो गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल कार्डधारक) जीवन-यापन करने वाले हैं। दिव्यांग, वृद्धावस्था, विधवा पेंशन प्राप्त करने वाले या एक लाख से कम वार्षिक आय वाले अभिभावकों के बच्चे भी शामिल हैं। इसके तहत इस श्रेणी के गरीब बच्चों का गैर सहायता प्राप्त विद्यालयों में प्री-प्राइमरी व कक्षा एक में दाखिला कराया जाता है।
वर्जन-
उच्चाधिकारियों को भेजेंगे रिपोर्ट
कॉन्वेंट स्कूलों में गरीब बच्चों के प्रवेश की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। जिन स्कूलों ने पोर्टल पर पंजीकरण नहीं कराया है, उनकी सूची तैयारी की गई गई। उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेजी जाएगी।
- अखिलेश प्रताप सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी
विज्ञापन
राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने पोर्टल पर बंद दिखाने वाले स्कूलों का ब्यौरा देते हुए विभाग को जांच कराने के लिए कहा है। आरटीई पोर्टल पर सिर्फ 220 स्कूल ही दिख रहे हैं, जहां गरीब परिवार आवेदन कर सकते हैं। जबकि 751 स्कूल ऐसे हैं जो आवेदन करते समय दिखते ही नहीं हैं। ऐसे में अभिभावक आवेदन ही नहीं कर पा रहे हैं। इससे करीब आठ हजार बच्चे योजना से वंचित हैं। दस सालों से चल रही इस योजना में स्कूलों की मनमानी की ओर अधिकारियों ने कभी ध्यान ही नहीं दिया जिससे उनकी हिम्मत बढ़ती चली गई।
विज्ञापन
पंजीकरण न होने से नहीं हो सकी मैपिंग
आरटीई एक्ट के तहत ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया पूरी की जाती है। इसके लिए जरूरी है कि ऑनलाइन आवेदन के समय जैसे ही अभिभावक अपना पता दर्ज करेगा, वहां के आसपास के स्कूल दिखेंगे। ऐसे में अभिभावक वरिष्ठता क्रम में पसंद कर लॉक कर देते हैं। पंजीकरण न होने से विभाग की ओर से 751 स्कूलों की मैपिंग ही नहीं हो पाई। ऐसे में जिन स्कूलों की मैपिंग नहीं है, उस क्षेत्र से आवेदन होने पर स्कूल दिखेगा ही नहीं और अभिभावक आवेदन भी नहीं कर सकेेंगे। इस तरह हर साल अभिभावक निराश होकर बैठ जाते हैं।
विज्ञापन
दो चरणों में 674 बच्चों का हो चुका प्रवेश
इस साल नए शैक्षिक सत्र के लिए दो चरणों में ऑनलाइन लॉटरी के माध्यम से 674 बच्चों को प्रवेश दिया गया है। लेकिन इसमें सिर्फ 220 स्कूल ही शामिल हैं। पहले चरण में 540 और दूसरे चरण में 134 बच्चों को प्रवेश दिया गया है, कुछ स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया चल रही है। वहीं तीसरे चरण के लिए भी प्रक्रिया चल रही है। उनका प्रवेश जून में छुट्टियों के बाद ही होगा।
दो श्रेणियों के परिवारों को मिलता है योजना का लाभ
शिक्षा अधिकार अधिनियम के तहत प्रवेश योजना में दो श्रेणी के लोगों को लाभ दिया जाता है। पहला अलाभित समूह है जिसमें दलित, पिछड़े वर्ग के बच्चे, निशक्त, एचआईवी व कैंसर पीड़ित अभिभावकों के बच्चे, निराश्रित व बेघर बच्चे पात्रता श्रेणी में आते हैं। दूसरी श्रेणी में दुर्बल वर्ग के ऐसे माता-पिता या संरक्षक जो गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल कार्डधारक) जीवन-यापन करने वाले हैं। दिव्यांग, वृद्धावस्था, विधवा पेंशन प्राप्त करने वाले या एक लाख से कम वार्षिक आय वाले अभिभावकों के बच्चे भी शामिल हैं। इसके तहत इस श्रेणी के गरीब बच्चों का गैर सहायता प्राप्त विद्यालयों में प्री-प्राइमरी व कक्षा एक में दाखिला कराया जाता है।
वर्जन-
उच्चाधिकारियों को भेजेंगे रिपोर्ट
कॉन्वेंट स्कूलों में गरीब बच्चों के प्रवेश की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। जिन स्कूलों ने पोर्टल पर पंजीकरण नहीं कराया है, उनकी सूची तैयारी की गई गई। उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेजी जाएगी।
- अखिलेश प्रताप सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी