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साधु संतों ने सड़क जाम की, प्रदर्शन

Wed, 04 May 2022 11:57 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 04 May 2022 11:57 PM IST
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Road jam,pradarshan
फोटो-4-गोंडा में परसपुर के पसका पुल पर नायब तहसीलदार को ज्ञापन सौंपते परिक्रमार्थी। -संवाद - फोटो : GONDA
परसपुर (गोंडा)। ऐतिहासिक पसका सूकरखेत पर बांध बनाने से संगम के अस्तित्व पर संकट बना है। यह बांध त्रिमुहानी घाट पर सरयू-घाघरा के संगम में बाधा है। संगम बहाली की मांग को लेकर बीते दिन साधु-संतों ने पुल पर जाम लगाकर धरना प्रदर्शन किया। इसके बाद मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन नायब तहसीलदार को सौंपा गया। अयोध्या धाम की चौरासी कोसी परिक्रमा यात्रा गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज की जन्मभूमि राजापुर से चलकर पसका सूकरखेत पहुंची तो वहां पर स्थली की दुर्दशा व स्नान घाट पर शव जलता देखकर परिक्रमार्थी आक्रोशित हो गए।
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धर्मार्थ सेवा संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं परिक्रमा संचालक महंथ गयादास जी महाराज ने इस मुद्दे को लेकर आरपार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। मंगलवार को उनके नेतृत्व में बड़ी संख्या में परिक्रमार्थी जयश्री राम, संगम का उद्धार करो का गगनभेदी जयकारा लगाते हुए संगम स्थल पर पहुंचे। संगम को पुन: बहाल करने सहित कई मांगों को लेकर सरयू नदी पर बने पुल को जाम कर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि बांध बना दिए जाने से आस्था पर चोट पहुंची है। संतों का कहना है कि घाघरा की धारा पर यदि साइफन लगा दिया गया होता तो बाढ़ से बचाव होता, साथ ही संगम का अस्तित्व भी बरकरार रहता। संतों ने संगम बहाल किए जाने की मांग। साथ ही स्नान घाट पर शवों का अंतिम संस्कार रोकने की मांग की है। इसके बाद परिक्रमार्थियों ने धरना-प्रदर्शन समाप्त किया।
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मांगपत्र में महंत बाबा तुलसीदास, नागा जयराम दास, पटमेश्वरी प्रसाद पाठक, सूर्यमणि तिवारी, सुभाष चंद्र पांडेय, सुरेश कुमार यादव, राजेश कुमार मिश्रा, नागा भोजपत्र गिरि, रोहित तिवारी, बाल्मीक दास, रामायणी, दिनेश पाठक, दिनेश दास, महंत कमलेश दास, बाबा उपेंद्र दास, बाबा अवधेश दास, माता बदल, मुरालीलाल कसौंधन, पूरन सिंह व महंत रामप्रकाश दास के हस्ताक्षर हैं। दूसरी ओर पसका सूकरखेत के सरयू-घाघरा मिलन स्थल को बांध से मुक्त कराकर संगम तीर्थ बनाने के समर्थन में साधु-संत उतर आए हैं। वाराह धाम दक्षिणी तट पर काफी दिनों से अन्न त्याग कर बैठे मुर्तिहा बाबा (मौनी बाबा) ने अभिलेख के माध्यम से बताया कि वे तब तक अन्न ग्रहण नहीं करेंगे जब तक सरयू घाघरा संगम बहाल नहीं हो जाता। वहीं नागा भोजपत्र गिरि ने बताया कि आस्था पर चोट करना भगवान से छल करने के बराबर है। कहा कि शीघ्र ही संगम को पुराने स्वरूप में बहाल किया जाए। डॉ. स्वामी भगवदाचार्य ने कहा कि बांध पर साइफन लगवाया जाए।
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