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मिश्रौलिया के रेलवे ओवरग्रिज निर्माण में नौ करोड़ की हेराफेरी
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फोटो-15-गोंडा के मिश्रौलिया क्रासिंग के पास निर्माणधीन ओवरब्रिज। -संवाद
- फोटो : GONDA
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गोंडा। शहर के मिश्रौलिया रेलवे क्रॉसिंग पर बन रहे रेलवे ओवरब्रिज के निर्माण में रुपये का गोलमाल सामने आया है। इसके निर्माण के लिए 112 करोड़ रुपये मंजूरी हुए। सेतुनिगम इसका निर्माण करवा रहा है। पहले सेतुनिगम की निर्माण इकाई-तीन कर रही थी। बाद में गोंडा में एक नई इकाई का गठन किया गया। इकाई-तीन से निर्माण के कार्य को जिले में बनी नई इकाई को सौंपना था। इकाई को काम मिला तो गोलमाल से पर्दा उठा। दरअसल नई इकाई को जो काम करने थे, उसके लिए 42 करोड़ चाहिए था। इकाई- तीन ने इतनी तेजी से बजट निकाला कि 32 करोड़ का बजट ही शेष है। 52 करोड़ के काम पर 61 करोड़ का बजट निकाल लिया गया है। निर्माण के भुगतान में नौ करोड़ का गोलमाल है। अब मामले की जांच होगी, इसके लिए सेतु निगम ने विशेष टीम गठित की है।
गोंडा से लखनऊ रेलवे लाइन पर सबसे अधिक व्यस्त क्रॉसिंग मिश्रौलिया क्रॉसिंग थी। इसके लिए सबसे पहले बजट जारी हुआ, विस चुनाव के पहले ही काम भी शुरू हो गया। इसके लिए 112 करोड़ करोड़ के बजट की स्वीकृति हुई और पहली किश्त भी मिल गई। शुरूआत में गोंडा में सेतु निगम की इकाई न होने पर कार्य को अयोध्या की इकाई को सौंप दिया गया। इसके बाद सेतु निगम का निर्माण शुरू हुआ, निर्माण कार्य की शुरुआत से ही विवादित रहा। बिना डायवर्जन बनाए ही निर्माण शुरू कर दिया गया, जिससे बहराइच जाने वालों को कटरा बाजार से घूमकर जाना पड़ता है। इसके बजट में भी हेराफेरी का मामला उठभा, लेकिन सबसे अधिक गोलमाल तो निर्माण में ही सामने आया, लेेेकिन तब आया जब जिले में ओवर ब्रिज के निर्माण के लिए नई इकाई का गठन हुआ।
इकाई ने बजट का मिलान किया तो पता चला कि काम से अधिक का भुगतान हो गया है। करीब दस करोड़ रुपये का अंतर आ रहा है। जिससे आगे के कार्य में भी दिक्कत हो रही है। इसकी रिपोर्ट सेतु निगम मुख्यालय जाने पर वित्त प्रकोष्ठ ने भी पड़ताल किया। इसके बाद पता चला कि जिन कार्यों के लिए 52 करोड़ रुपये की खर्च किए जाने चाहिए थे, उस पर 61 करोड़ रुपये खर्च कर दिए गए हैं। मामले की जांच की कमेटी बनी है।
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खर्च में तेजी और काम में रही ढिलाई
सेतु निगम की इकाई-तीन के कई बड़े अफसर निर्माण के मामले में फंसते नजर आ रहे हैं। ओवरब्रिज के निर्माण का कार्य नई इकाई को सौंपा गया था, उस समय ओवरब्रिज को 80 फीसदी पूरा हो जाना चाहिए था। लेकिन निर्माण का कार्य 50 फीसदी से भी कम था। ऐसा तब है जब भुगतान भी अधिक निकाल लिया गया था। इसकी जानकारी होने पर सेतु निगम के अधिकारियों में खलबली मच गई है। इससे निर्माण कार्य पूरा होने में भी दिक्कत आ सकती है। फिलहाल निर्माण कार्य हो तो रहा है, लेकिन अधिक लिए गए भुगतान वापस न मिले तो निर्माण फंस सकता है।
सेतु निगम ने बनाई कमेटी, होगी विशेष जांच
जिले के ओवरब्रिज निर्माण में हुए खेल की जांच के लिए टीम गठित की गई है। जो विशेष जांच करेगी, दोनों इकाईयों के अभिलेखों की जांच होने के साथ ही निर्माण के स्थिति भी टीम देखेगी। टीम में सेतु निगम ने सहायक लेखाधिकारी अनिल कुमार तिवारी, लेखाकार बृजेश कुमार वर्मा, लल्लू सिंह रावत को शामिल किया गया है। जो एक सप्ताह में पूरे मामले की जांच करके रिपोर्ट वित्त नियंत्रक को देंगे। वित्त नियंत्रक ने मामले को गंभीर माना है और गहराई से जांच के आदेश दिए हैं।
ओवरब्रिज का निर्माण पहले दूसरी इकाई कर रही थी। जो भी स्थिति है उसकी जानकारी मुख्यालय को है। जांच के बारे में मुख्यालय से ही कोई निर्णय हुआ होगा, मुझे जानकारी नहीं है। जांच होगी तो पूरा सहयोग करेंगे। एपी सिंह, उप परियोजना प्रबंधक सेतु निगम गोंडा
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गोंडा से लखनऊ रेलवे लाइन पर सबसे अधिक व्यस्त क्रॉसिंग मिश्रौलिया क्रॉसिंग थी। इसके लिए सबसे पहले बजट जारी हुआ, विस चुनाव के पहले ही काम भी शुरू हो गया। इसके लिए 112 करोड़ करोड़ के बजट की स्वीकृति हुई और पहली किश्त भी मिल गई। शुरूआत में गोंडा में सेतु निगम की इकाई न होने पर कार्य को अयोध्या की इकाई को सौंप दिया गया। इसके बाद सेतु निगम का निर्माण शुरू हुआ, निर्माण कार्य की शुरुआत से ही विवादित रहा। बिना डायवर्जन बनाए ही निर्माण शुरू कर दिया गया, जिससे बहराइच जाने वालों को कटरा बाजार से घूमकर जाना पड़ता है। इसके बजट में भी हेराफेरी का मामला उठभा, लेकिन सबसे अधिक गोलमाल तो निर्माण में ही सामने आया, लेेेकिन तब आया जब जिले में ओवर ब्रिज के निर्माण के लिए नई इकाई का गठन हुआ।
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इकाई ने बजट का मिलान किया तो पता चला कि काम से अधिक का भुगतान हो गया है। करीब दस करोड़ रुपये का अंतर आ रहा है। जिससे आगे के कार्य में भी दिक्कत हो रही है। इसकी रिपोर्ट सेतु निगम मुख्यालय जाने पर वित्त प्रकोष्ठ ने भी पड़ताल किया। इसके बाद पता चला कि जिन कार्यों के लिए 52 करोड़ रुपये की खर्च किए जाने चाहिए थे, उस पर 61 करोड़ रुपये खर्च कर दिए गए हैं। मामले की जांच की कमेटी बनी है।
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सेतु निगम की इकाई-तीन के कई बड़े अफसर निर्माण के मामले में फंसते नजर आ रहे हैं। ओवरब्रिज के निर्माण का कार्य नई इकाई को सौंपा गया था, उस समय ओवरब्रिज को 80 फीसदी पूरा हो जाना चाहिए था। लेकिन निर्माण का कार्य 50 फीसदी से भी कम था। ऐसा तब है जब भुगतान भी अधिक निकाल लिया गया था। इसकी जानकारी होने पर सेतु निगम के अधिकारियों में खलबली मच गई है। इससे निर्माण कार्य पूरा होने में भी दिक्कत आ सकती है। फिलहाल निर्माण कार्य हो तो रहा है, लेकिन अधिक लिए गए भुगतान वापस न मिले तो निर्माण फंस सकता है।
सेतु निगम ने बनाई कमेटी, होगी विशेष जांच
जिले के ओवरब्रिज निर्माण में हुए खेल की जांच के लिए टीम गठित की गई है। जो विशेष जांच करेगी, दोनों इकाईयों के अभिलेखों की जांच होने के साथ ही निर्माण के स्थिति भी टीम देखेगी। टीम में सेतु निगम ने सहायक लेखाधिकारी अनिल कुमार तिवारी, लेखाकार बृजेश कुमार वर्मा, लल्लू सिंह रावत को शामिल किया गया है। जो एक सप्ताह में पूरे मामले की जांच करके रिपोर्ट वित्त नियंत्रक को देंगे। वित्त नियंत्रक ने मामले को गंभीर माना है और गहराई से जांच के आदेश दिए हैं।
ओवरब्रिज का निर्माण पहले दूसरी इकाई कर रही थी। जो भी स्थिति है उसकी जानकारी मुख्यालय को है। जांच के बारे में मुख्यालय से ही कोई निर्णय हुआ होगा, मुझे जानकारी नहीं है। जांच होगी तो पूरा सहयोग करेंगे। एपी सिंह, उप परियोजना प्रबंधक सेतु निगम गोंडा