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Gonda News: कटिया कनेक्शन से चल रहा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रांगी
Sun, 07 Sep 2025 11:29 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Sun, 07 Sep 2025 11:29 PM IST
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तरबगंज के स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रांगी। - संवाद
दुर्जनपुर घाट। क्षेत्र का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रांगी मूलभूत सुविधाओं से कोसों दूर है। परमहंस देवस्थान बरियाडीह के निकट और तरबगंज तहसील मुख्यालय से करीब 12 किलोमीटर दूर स्थित यह अस्पताल बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के दर्जनों गांवों के मरीजों का एकमात्र सहारा है। इसके बावजूद यहां की हालत बेहद दयनीय है।
करीब तीन दशक पूर्व निर्मित इस अस्पताल में दवा की उपलब्धता तो है, लेकिन पीने के लिए स्वच्छ पानी उपलब्ध नहीं है। दो दशक पूर्व बनी पानी की टंकी जर्जर होकर गिरने की कगार पर है, किंतु आज तक यह चालू ही नहीं हो सकी। स्वास्थ्यकर्मियों ने व्यवस्था करके अस्पताल परिसर में एक छोटा सा हैंडपंप लगवाया है, लेकिन उसका पानी पीने योग्य नहीं है। बिजली की स्थिति भी खराब है। अस्पताल में बिजली कनेक्शन ही नहीं है। कटिया कनेक्शन से दो पंखे किसी तरह चलाए जा रहे हैं। बरसात और उमस के मौसम में मरीज और डॉक्टर दोनों ही गर्मी से बेहाल रहते हैं। शौचालय की स्थिति भी दयनीय है। निर्माण के समय बनाया गया अस्थायी शौचालय टूटकर बेकार पड़ा है।
अस्पताल की बाउंड्रीवाल और मुख्य द्वार वर्षों पूर्व गिर चुके हैं। कर्मचारियों के आवास खंडहर बन चुके हैं। यहां झाड़-झंखाड़ और जंगली जानवरों का बसेरा है। महिला चिकित्सक और एएनएम की तैनाती नहीं होने से महिलाओं को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। एंबुलेंस, संस्थागत प्रसव और वैक्सीनेशन जैसी बुनियादी सेवाएं भी भगवान भरोसे हैं। ओपीडी की समाप्ति के बाद यहां किसी डॉक्टर के न रहने के कारण मरीजों को तरबगंज, नवाबगंज या फिर अयोध्या के सोहावल तक जाना पड़ता है। मरीजों का कहना है कि यहां दवाएं तो किसी तरह मिल जाती हैं, लेकिन बिजली, पानी, शौचालय और बैठने की समुचित व्यवस्था न होने से भारी परेशानी उठानी पड़ती है।
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वर्तमान में यहां डॉ. उदय प्रताप मिश्रा, फार्मासिस्ट सुनील, वार्डबॉय राजेश मिश्रा, सफाई कर्मी रोहित सिंह और आदित्य मिश्रा तैनात हैं। डॉ. मिश्रा ने बताया कि अस्पताल में औसतन 20 से अधिक मरीज प्रतिदिन इलाज के लिए आते हैं। बरसात में सर्दी-जुकाम, बुखार, खुजली और फोड़े-फुंसी की समस्याएं ज्यादा हैं। मरीजों को दवा के साथ-साथ बचाव के उपाय भी बताए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि पेयजल, शौचालय और बाउंड्रीवाल की मरम्मत को लेकर विभाग को पत्र भेजा गया है।
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करीब तीन दशक पूर्व निर्मित इस अस्पताल में दवा की उपलब्धता तो है, लेकिन पीने के लिए स्वच्छ पानी उपलब्ध नहीं है। दो दशक पूर्व बनी पानी की टंकी जर्जर होकर गिरने की कगार पर है, किंतु आज तक यह चालू ही नहीं हो सकी। स्वास्थ्यकर्मियों ने व्यवस्था करके अस्पताल परिसर में एक छोटा सा हैंडपंप लगवाया है, लेकिन उसका पानी पीने योग्य नहीं है। बिजली की स्थिति भी खराब है। अस्पताल में बिजली कनेक्शन ही नहीं है। कटिया कनेक्शन से दो पंखे किसी तरह चलाए जा रहे हैं। बरसात और उमस के मौसम में मरीज और डॉक्टर दोनों ही गर्मी से बेहाल रहते हैं। शौचालय की स्थिति भी दयनीय है। निर्माण के समय बनाया गया अस्थायी शौचालय टूटकर बेकार पड़ा है।
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अस्पताल की बाउंड्रीवाल और मुख्य द्वार वर्षों पूर्व गिर चुके हैं। कर्मचारियों के आवास खंडहर बन चुके हैं। यहां झाड़-झंखाड़ और जंगली जानवरों का बसेरा है। महिला चिकित्सक और एएनएम की तैनाती नहीं होने से महिलाओं को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। एंबुलेंस, संस्थागत प्रसव और वैक्सीनेशन जैसी बुनियादी सेवाएं भी भगवान भरोसे हैं। ओपीडी की समाप्ति के बाद यहां किसी डॉक्टर के न रहने के कारण मरीजों को तरबगंज, नवाबगंज या फिर अयोध्या के सोहावल तक जाना पड़ता है। मरीजों का कहना है कि यहां दवाएं तो किसी तरह मिल जाती हैं, लेकिन बिजली, पानी, शौचालय और बैठने की समुचित व्यवस्था न होने से भारी परेशानी उठानी पड़ती है।
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वर्तमान में यहां डॉ. उदय प्रताप मिश्रा, फार्मासिस्ट सुनील, वार्डबॉय राजेश मिश्रा, सफाई कर्मी रोहित सिंह और आदित्य मिश्रा तैनात हैं। डॉ. मिश्रा ने बताया कि अस्पताल में औसतन 20 से अधिक मरीज प्रतिदिन इलाज के लिए आते हैं। बरसात में सर्दी-जुकाम, बुखार, खुजली और फोड़े-फुंसी की समस्याएं ज्यादा हैं। मरीजों को दवा के साथ-साथ बचाव के उपाय भी बताए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि पेयजल, शौचालय और बाउंड्रीवाल की मरम्मत को लेकर विभाग को पत्र भेजा गया है।