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Gonda News: नदी में डूब क्षेत्र चिह्नित कर 50 मीटर पर लगेंगे पिलर
Tue, 12 Sep 2023 11:37 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Tue, 12 Sep 2023 11:37 PM IST
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गोंडा। जिले में प्रवाहित प्रमुख नदियों के डूब क्षेत्रों का चिन्हांकन कराने के बाद जिला प्रशासन ने सतर्कता के तौर पर घेराबंदी कराने का फैसला लिया है। सरयू, घाघरा, टेढ़ी, बिसुही और मनवर नदी के दोनों तटों पर गहरे इलाकों काे आच्छादित करते हुए 50 मीटर की दूरी पर खंभे स्थापित किए जाएंगे। जिलाधिकारी ने नदी के प्रवाह क्षेत्र को संरक्षित कराने तथा इसे अतिक्रमण मुक्त रखने के लिए यह निर्देश जारी किए हैं। इसके लिए टीम का गठन भी कर दिया गया है। मुख्य राजस्व अधिकारी महेश प्रकाश टीम की अध्यक्षता करेंगे।
डीएम नेहा शर्मा ने बताया कि नदियों एवं प्राकृतिक जलस्रोतों के संरक्षण के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालयों और राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण से समय-समय पर विस्तृत दिशा-निर्देश निर्गत किए गए हैं। नदियों के प्रवाह क्षेत्र में कृषि, औद्योगिक अथवा विनिर्माण आदि संबंधी किसी भी प्रकार की गतिविधियों की अनुमति नहीं दी जा सकती। इसके मद्देनजर, जनपद में नदियों के दोनों तरफ के डूब क्षेत्र चिह्नित करते हुए उससे 50 मीटर की दूरी पर खंभे (पिलर) स्थापित कराने का फैसला लिया गया है। ताकि स्थानीय लोगों को यह जानकारी रहे कि चिह्नित क्षेत्र की सीमा में किसी प्रकार के निर्माण अथवा औद्योगिक, व्यापारिक गतिविधियों की अनुमति नहीं होगी।
डीएम ने बताया कि नदियों के डूब क्षेत्र का निर्धारण राजस्व एवं सिंचाई विभाग की टीम द्वारा संयुक्त रूप से सर्वे व अभिलेखों के आधार पर किया जाएगा। सर्वे के साथ ही साथ सिंचाई विभाग के संबंधित प्रखंडों द्वारा पिलर्स स्थापना का काम किया जाएगा। मुख्य राजस्व अधिकारी की अध्यक्षता में बनी इस समिति में सभी उप जिलाधिकारी, बंदोबस्त अधिकारी (चकबंदी) और अधिशासी अभियन्ता, सरयू नहर खंड-4 नोडल प्रखंड को शामिल किया गया है।
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डीएम नेहा शर्मा ने बताया कि नदियों एवं प्राकृतिक जलस्रोतों के संरक्षण के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालयों और राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण से समय-समय पर विस्तृत दिशा-निर्देश निर्गत किए गए हैं। नदियों के प्रवाह क्षेत्र में कृषि, औद्योगिक अथवा विनिर्माण आदि संबंधी किसी भी प्रकार की गतिविधियों की अनुमति नहीं दी जा सकती। इसके मद्देनजर, जनपद में नदियों के दोनों तरफ के डूब क्षेत्र चिह्नित करते हुए उससे 50 मीटर की दूरी पर खंभे (पिलर) स्थापित कराने का फैसला लिया गया है। ताकि स्थानीय लोगों को यह जानकारी रहे कि चिह्नित क्षेत्र की सीमा में किसी प्रकार के निर्माण अथवा औद्योगिक, व्यापारिक गतिविधियों की अनुमति नहीं होगी।
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डीएम ने बताया कि नदियों के डूब क्षेत्र का निर्धारण राजस्व एवं सिंचाई विभाग की टीम द्वारा संयुक्त रूप से सर्वे व अभिलेखों के आधार पर किया जाएगा। सर्वे के साथ ही साथ सिंचाई विभाग के संबंधित प्रखंडों द्वारा पिलर्स स्थापना का काम किया जाएगा। मुख्य राजस्व अधिकारी की अध्यक्षता में बनी इस समिति में सभी उप जिलाधिकारी, बंदोबस्त अधिकारी (चकबंदी) और अधिशासी अभियन्ता, सरयू नहर खंड-4 नोडल प्रखंड को शामिल किया गया है।
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