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बैंकों से जमा-निकासी को जूझते रहे लोग

Sat, 12 Nov 2016 11:08 PM IST
अमर उजाला/गोंडा
अमर उजाला/गोंडा Updated Sat, 12 Nov 2016 11:08 PM IST
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People struggled to deposit-withdrawals from banks
बैंंक के बाहर जुटी भीड़ - फोटो : अमर उजाला
शनिवार को लगातार तीसरे दिन भी बैंकों से पैसा निकालने और पुरानी करेंसी जमा करने के लिए बैंकों के बाहर लोगों का हुजूम उमड़ा। सुबह के 8 बजते ही लोगों की लंबी-लंबी लाइनें लगनी शुरू हो गईं। जो देरशाम तक लगी रही। वहीं कई बैंकों से उपभोक्ताओं के साथ भेदभाव किए जाने की भी शिकायतें आती रहीं।
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500 व 1000 रुपए की पुरानी करेंसी बंद होने के बाद लोगों में अफरातफरी का माहौल है। जरूरतमंदों को न तो बैंकों से पैसा ही मिल पा रहा है न ही पुरानी करेंसी से उनके कोई काम ही पूरे हो पा रहे हैं। जिससे आम जनजीवन अभी भी पटरी से उतरा हुआ है।
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हालांकि लोगों का कहना है कि यह दिक्कत अभी एक हफ्ते तक बनी रहेगी। क्योंकि जैसे ही नए नोटों की सप्लाई का ढर्रा पटरी पर लौटता है, वैसे ही तमाम तरह की दिक्कतों से लोगों को निजात मिलनी शुरू हो जाएगी। शनिवार को लगातार तीसरे दिन भी बैंकों के बाहर लोगों की भारी भीड़ लगी रही। लोग निर्धारित प्रोफार्मा पर कहीं अपना पैसा जमा कर रहे थे तो कहीं कोई पुरानी करेंसी को नए से एक्सचेंज करने में लगा था।
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हीं कुछ बैंकों से ग्राहकों को पैसा न मिलने की भी शिकायतें संज्ञान में आई। जिसकी शिकायत कई उपभोक्ताओं ने डीएम से भी की है। लोगों का कहना है कि बैंक से किसी को दो हजार रुपए भी नहीं दिए जा रहे तो किसी-किसी को 10-10 हजार रुपए तक दे दिए जा रहे हैं। फिलहाल बैंकों से पैसों के लेन-देन को लेकर उपभोक्ताओं की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रहीं। जिससे उनके परिवार को आर्थिक तंगी जैसे हालातों से जूझना पड़ रहा है।


वहीं पुरानी करेंसी के बंद होने से मार्केट में 100, 50 व 20 रुपए भी लोगों ने जमा करने शुरू कर दिए हैं। जिससे घरेलू सामान खरीदने जाने वाले लोगों के सामने छुट्टे की समस्या पैदा हो गई है। उधर नई-पुरानी करेंसी के चक्कर में बाजारों की रौनक भी पूरी तरह फीकी हो गई है। हालांकि चौक बाजार में कई सराफा की दुकानों पर महिलाएं ज्वैलरी खरीदती दिखाई पड़ीं। मगर सराफा व्यवसायी श्यामलाल सोनी का कहना है कि बाजार में अपेक्षित कारोबार नहीं हो सका। 
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