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बाहर से आए लोगों से बढ़ी चिंता, सड़कों पर अब भी निकल रहे लोग
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गोंडा। दिल्ली, हरियाणा और एनसीआर क्षेत्र से आने वाले लोगों से चिंता बढ़ गई है। रविवार को शहर में आने वाले लोगों को लेकर अफरातफरी का माहौल रहा। रविवार को 50 से अधिक रोडवेज बसें लखनऊ से गोंडा लोगों को लेकर पहुंची थीं। यही नहीं जिले से बाहर जाने वाले लोग भी बस स्टाप पहुंच रहे थे, बस स्टाप से लोग घरों के लिए पैदल ही निकल रहे थे। कई लोगों की तो बस स्टाप पर स्क्रीनिंग भी नहीं हो पा रही थी। बहुत लोग बिना स्क्रीनिंग के भी घर जा चुके हैं।
माना जा रहा है कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य टीमें पहुंच कर स्क्रीनिंग तो कर रही है लेकिन लोगों को ऐसे मौके पर जागरूक रहने की जरूरत हैं। जिले के आला अफसरों के साथ ही समाजिक संगठन तक अपील कर रहे हैं कि घरों से लोग बाहर निकलें, इसी से कोरोना से बचाव संभव है।
फिर अनावश्यक बाहर आ रहे लोगों से चिंता बढ़ गई है। रविवार को भी शनिवार की तरह ही सैकड़ों की संख्या में लोगों का जिले में आने का सिलसिला जारी रहा। अपने छोटे -छोटे बच्चों के साथ लोग इधर-उधर भागते दिखाई दिए। बच्चों के मुंह पर न तो मास्क था और न ही सोशल डिस्टेंसिंग ही दिखी।
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तीन दर्जन बसें लखनऊ भेजी गई जो लोग गोंडा में बाहर के जिलों से आकर रहते थे और लॉकडाउन होने के बाद फंस गये हैं। उन्हें भी यहां से अपने घरों को भेजा जा रहा है। एआरएम वीके वर्मा ने बताया कि अब 36 बसों में 2 हजार से अधिक लोगों को लखनऊ भेजा गया है।
छतों पर भी बैठे नजर आये लोग यात्रियों को लेकर आ रही बसों भी सारे नियम कानून ताक पर रख दिये गये। भीड़ इस कदर बेकाबू थी कि जो जहां मौका पाया बैठ गया। लखनऊ से आ रही बसों में बड़ी संख्या में लोग बस की छत पर बैठे नजर आये।
शहर के पटेलनगर मोहल्ले में विदेश से आये एक व्यक्ति की जानकारी होने पर आसपास के लोगों ने स्वास्थ्य विभाग और पुलिस को दी गई। पूरे परिवार की स्क्रीनिंग करने के घर में क्वारंटीन रहने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही उनके घर के सामने एक पंपलेट भी चस्पा किया गया है।
जिला मजिस्ट्रेट डॉ. नितिन बंसल ने बताया कि कोरोना की महामारी के चलते पूरे देश में लॉकडाउन के बाद अचानक जिले से जो लोग बाहर रह रहे थे, उनका आना शुरू हो गया है। करनैलगंज और गोंडा में उनकी स्क्रीनिंग कराई जा रही है। कुछ कोरोना के पॉजीटिव केस मिलने की अफवाहें उड़ा रहे हैं, जो कि पूरी तरह से गलत है।
परदेश में रहना हो रहा था मुश्किल दिल्ली, नोयडा, फरीदाबाद सहित कई जगहों से गोंडा पहुंचे लोगों ने अपनी तकलीफ बताई। उनका कामकाज तो प्रभावित ही है, खाने पीने की भी समस्या है। रविवार को पहुंच दिलीप ने बताया कि 22 मार्च के बाद से परदेश में रहना मुश्किल हो रहा है। पारसनाथ ने बताया कि कमाई बंद हो जाने से परिवार के साथ समय वहां जीवन यापन कठिन था। मणिशंकर ने बताया कि सारा काम ठप हो गया है। टिंकू ने बताया कि जहां वो काम कर रहा था फैक्टरी बंद हो गई है। जग्गू ने बताया कि लाकडाउन के परिवार के लोग यहां परेशान थे। लखनऊ पहुंचने पर सरकार की ओर से खाना मिला था।
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माना जा रहा है कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य टीमें पहुंच कर स्क्रीनिंग तो कर रही है लेकिन लोगों को ऐसे मौके पर जागरूक रहने की जरूरत हैं। जिले के आला अफसरों के साथ ही समाजिक संगठन तक अपील कर रहे हैं कि घरों से लोग बाहर निकलें, इसी से कोरोना से बचाव संभव है।
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फिर अनावश्यक बाहर आ रहे लोगों से चिंता बढ़ गई है। रविवार को भी शनिवार की तरह ही सैकड़ों की संख्या में लोगों का जिले में आने का सिलसिला जारी रहा। अपने छोटे -छोटे बच्चों के साथ लोग इधर-उधर भागते दिखाई दिए। बच्चों के मुंह पर न तो मास्क था और न ही सोशल डिस्टेंसिंग ही दिखी।
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तीन दर्जन बसें लखनऊ भेजी गई जो लोग गोंडा में बाहर के जिलों से आकर रहते थे और लॉकडाउन होने के बाद फंस गये हैं। उन्हें भी यहां से अपने घरों को भेजा जा रहा है। एआरएम वीके वर्मा ने बताया कि अब 36 बसों में 2 हजार से अधिक लोगों को लखनऊ भेजा गया है।
छतों पर भी बैठे नजर आये लोग यात्रियों को लेकर आ रही बसों भी सारे नियम कानून ताक पर रख दिये गये। भीड़ इस कदर बेकाबू थी कि जो जहां मौका पाया बैठ गया। लखनऊ से आ रही बसों में बड़ी संख्या में लोग बस की छत पर बैठे नजर आये।
शहर के पटेलनगर मोहल्ले में विदेश से आये एक व्यक्ति की जानकारी होने पर आसपास के लोगों ने स्वास्थ्य विभाग और पुलिस को दी गई। पूरे परिवार की स्क्रीनिंग करने के घर में क्वारंटीन रहने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही उनके घर के सामने एक पंपलेट भी चस्पा किया गया है।
जिला मजिस्ट्रेट डॉ. नितिन बंसल ने बताया कि कोरोना की महामारी के चलते पूरे देश में लॉकडाउन के बाद अचानक जिले से जो लोग बाहर रह रहे थे, उनका आना शुरू हो गया है। करनैलगंज और गोंडा में उनकी स्क्रीनिंग कराई जा रही है। कुछ कोरोना के पॉजीटिव केस मिलने की अफवाहें उड़ा रहे हैं, जो कि पूरी तरह से गलत है।
परदेश में रहना हो रहा था मुश्किल दिल्ली, नोयडा, फरीदाबाद सहित कई जगहों से गोंडा पहुंचे लोगों ने अपनी तकलीफ बताई। उनका कामकाज तो प्रभावित ही है, खाने पीने की भी समस्या है। रविवार को पहुंच दिलीप ने बताया कि 22 मार्च के बाद से परदेश में रहना मुश्किल हो रहा है। पारसनाथ ने बताया कि कमाई बंद हो जाने से परिवार के साथ समय वहां जीवन यापन कठिन था। मणिशंकर ने बताया कि सारा काम ठप हो गया है। टिंकू ने बताया कि जहां वो काम कर रहा था फैक्टरी बंद हो गई है। जग्गू ने बताया कि लाकडाउन के परिवार के लोग यहां परेशान थे। लखनऊ पहुंचने पर सरकार की ओर से खाना मिला था।