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अब सरकारी दफ्तर खुद करायेंगे अपने आफिस का सेनीटाइज
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गोंडा। किसी भी सरकारी दफ्तर में अगर कोई भी कर्मचारी कोरोना संक्रमित पाया जाता है तो इसके लिए अब कहीं फोन घनघनाने की जरूरत नहीं होगी। अब सभी विभागों के अफसरों को खुद सैनिटाइजेशन और सीलिंग की कार्रवाई करानी पड़ेगी। अभी ये कार्य नगरपालिका की ओर से कराया जाता रहा है। लेकिन लगातार कोरोना के बढ़ रहे मरीजों की संख्या को देखते हुए शासन की ओर से ये निर्णय लिया गया है। बताया जा रहा है कि सभी विभागों को कोविड-19 संक्रमण से बचाव के लिए फंड निर्धारित किया गया है।
जिले में औसतन रोजाना 40 से 50 की संख्या में लोग कोरोना पॉजिटिव आ रहे हैं, जिससे मरीजों की संख्या लगातार तेजी से बढ़ रही है। इससे प्रशासनिक संसाधनों की कमी साफ देखने को मिलने लगी। प्रोटोकाल के मुताबिक कहीं भी अगर कोई कोरोना संक्रमित पाया जाता है तो वहां का सैनिटाइजेशन किया जाना बहुत जरूरी है। ऐसे में शहर क्षेत्रों में नगर पालिका और ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम पंचायत की होती थी, लेकिन अब हालात बदल गये हैं। सरकार ने भी कोरोना के आगे घुटने टेक दिये हैं। अब केवल आम जनता यदि कोरोना संक्रमित पाई जायेगी। तो उस इलाके पर ही नगर पालिका की टीम जायेगी और सैनिटाइजेशन आदि का काम करायेगी।
नये प्रोटोकाल में सरकार की ओर से कई बदलाव किये गये हैं। जिसमें सरकारी दफ्तरों में जो भी करोना मरीज सामने आते हैं उन्हें उनकी सुविधा के मुताबिक इलाज की सुविधा दी जाती है। यदि कोई परेशानी नहीं है तो उन्हें भी सभी की तरह ही होम आइसोलेशन में रखा जाता है। बाकी रोजाना हमारी टीम सभी की मानीटरिंग करती है। -डॉ. मधु गैरोला, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
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शासन की ओर से नये निर्देश जारी किये गये हैं, जिसके मुताबिक अब सैनिटाइजेशन आदि की जिम्मेदारी सभी विभाग अपने स्तर से संभालेंगे। इसके लिए अब नगर पालिका की जिम्मेदारी खत्म करने के निर्देश हैं। किसी भी अपरिहार्य परिस्थितियों में नगर पालिका के कर्मचारी लगाये जायेंगे। हर विभाग को अलग से कोविड फंड दिया गया है। -डॉ. नितिन बंसल, जिलाधिकारी
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जिले में औसतन रोजाना 40 से 50 की संख्या में लोग कोरोना पॉजिटिव आ रहे हैं, जिससे मरीजों की संख्या लगातार तेजी से बढ़ रही है। इससे प्रशासनिक संसाधनों की कमी साफ देखने को मिलने लगी। प्रोटोकाल के मुताबिक कहीं भी अगर कोई कोरोना संक्रमित पाया जाता है तो वहां का सैनिटाइजेशन किया जाना बहुत जरूरी है। ऐसे में शहर क्षेत्रों में नगर पालिका और ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम पंचायत की होती थी, लेकिन अब हालात बदल गये हैं। सरकार ने भी कोरोना के आगे घुटने टेक दिये हैं। अब केवल आम जनता यदि कोरोना संक्रमित पाई जायेगी। तो उस इलाके पर ही नगर पालिका की टीम जायेगी और सैनिटाइजेशन आदि का काम करायेगी।
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नये प्रोटोकाल में सरकार की ओर से कई बदलाव किये गये हैं। जिसमें सरकारी दफ्तरों में जो भी करोना मरीज सामने आते हैं उन्हें उनकी सुविधा के मुताबिक इलाज की सुविधा दी जाती है। यदि कोई परेशानी नहीं है तो उन्हें भी सभी की तरह ही होम आइसोलेशन में रखा जाता है। बाकी रोजाना हमारी टीम सभी की मानीटरिंग करती है। -डॉ. मधु गैरोला, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
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शासन की ओर से नये निर्देश जारी किये गये हैं, जिसके मुताबिक अब सैनिटाइजेशन आदि की जिम्मेदारी सभी विभाग अपने स्तर से संभालेंगे। इसके लिए अब नगर पालिका की जिम्मेदारी खत्म करने के निर्देश हैं। किसी भी अपरिहार्य परिस्थितियों में नगर पालिका के कर्मचारी लगाये जायेंगे। हर विभाग को अलग से कोविड फंड दिया गया है। -डॉ. नितिन बंसल, जिलाधिकारी