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इलाज नहीं मिला, सर्पदंश पीड़िता की मौत
अमर उजाला ब्यूरो/गोंडा
Updated Wed, 21 Sep 2016 11:10 PM IST
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तीमारदारों को समझाती पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
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सुबह 8 से दोपहर दो बजे तक जिला अस्पताल सहित जिले भर की सीएचसी-पीएचसी में मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाएं बुधवार को दूसरे दिन भी पूरी तरह से बाधित रहीं। अस्पताल की इमरजेंसी छोड़ ब्लड बैंक से न तो मरीजों को खून मिल पाया, न ही एक्सरे, अल्ट्रासाउंड व पैथालॉजी जांच हुई।
स्वास्थ्यकर्मियों की हड़ताल के चलते बुधवार की तड़के सर्पदंश पीड़िता को इलाज न मिलने से उसने दम तोड़ दिया। परिवारीजनों ने इसके लिए अस्पताल प्रशासन पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया है।
वहीं दूसरी ओर सीएमएस डॉ. रतन कुमार का कहना है कि जो भी मरीज अस्पताल में आया उसे इलाज मुहैया कराने का उन्होंने भरपूर प्रयास किया है। अगर इसके बाद भी कोई इसे लेकर अस्पताल प्रशासन को जिम्मेदार ठहरा रहा है वह उनसे आकर अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है। वह मामले की जांच कराएंगे।
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36 घंटों की हड़ताल ने तीन जानें
मंगलवार सुबह 8 बजे से शुरू हुई फार्मासिस्टों, स्टाफनर्सों, लैब टेक्नीशियनों व आप्टोमेट्रिस्टों की 36 घंटे तक चली हड़ताल ने तीन जानें ले लीं। इसमें जहां एक नवजात की मां के पेट में ही मंगलवार की देरशाम मौत हो जाने के बाद पेट में जहर फैलने से मां ने भी दम तोड़ दिया। वहीं बुधवार की तड़के सुबह सांप काटने पर जिला अस्पताल में भर्ती कराई गई बेलवा कौड़िया गांव निवासी उदयराज की पत्नी रामदुलारी (52) ने इलाज के अभाव में दम तोड़ दिया। रामदुलारी के बेटे रामसेवक का आरोप है कि जिस समय वह अपनी मां को लेकर यहां आया था, उस समय उनकी सांसें चल रही थीं। लेकिन अस्पताल में उनकी मां का इलाज ठीक तरह से नहीं हुआ। जिससे उनकी मौत हो गई।
पुलिस-फार्मासिस्टों के बीच हुई कई राउंड झड़प
बुधवार की सुबह 8 बजे से दोपहर दो बजे तक चली फार्मासिस्टों, स्टाफनर्सों, लैब टेक्नीशियनों व आप्टोमेट्रिस्टों की हड़ताल के दौरान फार्मासिस्टों की कई राउंड पुलिसकर्मियों से तीखी नोक-झोंक हुई। यह नोंकझोंक उनकी नारेबाजी और अस्पताली सेवाओं को लेकर पैदा की जाने रुकावटों को लेकर को हुई। जिससे प्रशासन को पूरे जिला अस्पताल को दूसरे दिन भी छावनी में तब्दील रखना पड़ा। यहां तक कि सुबह डाक्टर के एक मरीज के बेटे को थप्पड़ जड़े जाने के बाद इमरजेंसी तक में फोर्स लगा देनी पड़ी।
दवा और इलाज को भटके मरीज
बुधवार को लगातार दूसरे दिन भी जिला, महिला अस्पताल सहित जिले भर की सीएचसी-पीएचसी में आने वाले करीब 10 हजार से ऊपर मरीजों को स्वास्थ्य परामर्श, दवा व जांच की दुश्वारियों से जूझना पड़ा। अस्पताल के सारे दवा काउंटरों के बंद रहने से जहां मरीजों को दवा नहीं मिली तो वहीं जिला व महिला अस्पताल की ओपीडी भी हड़ताल से काफी देर तक प्रभावित रही। जिसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ा।
मुख्य सचिव से वार्ता के बाद वापस ली हड़ताल
बुधवार की दोपहर मुख्य सचिव से हुई वार्ता और उसमें मिले आश्वासन के बाद डीपीए ने अपनी हड़ताल वापस ले ली है। डीपीए के सालिक राम त्रिपाठी ने बताया कि बुधवार को उनकी हड़ताल दोपहर दो बजे तक चली। इस दौरान संगठन के नेताओं की मुख्य सचिव से वार्ता हो रही थी। संगठन से उन्हें आदेश मिला है कि वह अपनी हड़ताल वापस ले लें। जिसपर उन्होंने दो बजे अपनी हड़ताल वापस ले ली है। गुरुवार से वह काम करेंगे।
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स्वास्थ्यकर्मियों की हड़ताल के चलते बुधवार की तड़के सर्पदंश पीड़िता को इलाज न मिलने से उसने दम तोड़ दिया। परिवारीजनों ने इसके लिए अस्पताल प्रशासन पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया है।
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वहीं दूसरी ओर सीएमएस डॉ. रतन कुमार का कहना है कि जो भी मरीज अस्पताल में आया उसे इलाज मुहैया कराने का उन्होंने भरपूर प्रयास किया है। अगर इसके बाद भी कोई इसे लेकर अस्पताल प्रशासन को जिम्मेदार ठहरा रहा है वह उनसे आकर अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है। वह मामले की जांच कराएंगे।
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36 घंटों की हड़ताल ने तीन जानें
मंगलवार सुबह 8 बजे से शुरू हुई फार्मासिस्टों, स्टाफनर्सों, लैब टेक्नीशियनों व आप्टोमेट्रिस्टों की 36 घंटे तक चली हड़ताल ने तीन जानें ले लीं। इसमें जहां एक नवजात की मां के पेट में ही मंगलवार की देरशाम मौत हो जाने के बाद पेट में जहर फैलने से मां ने भी दम तोड़ दिया। वहीं बुधवार की तड़के सुबह सांप काटने पर जिला अस्पताल में भर्ती कराई गई बेलवा कौड़िया गांव निवासी उदयराज की पत्नी रामदुलारी (52) ने इलाज के अभाव में दम तोड़ दिया। रामदुलारी के बेटे रामसेवक का आरोप है कि जिस समय वह अपनी मां को लेकर यहां आया था, उस समय उनकी सांसें चल रही थीं। लेकिन अस्पताल में उनकी मां का इलाज ठीक तरह से नहीं हुआ। जिससे उनकी मौत हो गई।
पुलिस-फार्मासिस्टों के बीच हुई कई राउंड झड़प
बुधवार की सुबह 8 बजे से दोपहर दो बजे तक चली फार्मासिस्टों, स्टाफनर्सों, लैब टेक्नीशियनों व आप्टोमेट्रिस्टों की हड़ताल के दौरान फार्मासिस्टों की कई राउंड पुलिसकर्मियों से तीखी नोक-झोंक हुई। यह नोंकझोंक उनकी नारेबाजी और अस्पताली सेवाओं को लेकर पैदा की जाने रुकावटों को लेकर को हुई। जिससे प्रशासन को पूरे जिला अस्पताल को दूसरे दिन भी छावनी में तब्दील रखना पड़ा। यहां तक कि सुबह डाक्टर के एक मरीज के बेटे को थप्पड़ जड़े जाने के बाद इमरजेंसी तक में फोर्स लगा देनी पड़ी।
दवा और इलाज को भटके मरीज
बुधवार को लगातार दूसरे दिन भी जिला, महिला अस्पताल सहित जिले भर की सीएचसी-पीएचसी में आने वाले करीब 10 हजार से ऊपर मरीजों को स्वास्थ्य परामर्श, दवा व जांच की दुश्वारियों से जूझना पड़ा। अस्पताल के सारे दवा काउंटरों के बंद रहने से जहां मरीजों को दवा नहीं मिली तो वहीं जिला व महिला अस्पताल की ओपीडी भी हड़ताल से काफी देर तक प्रभावित रही। जिसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ा।
मुख्य सचिव से वार्ता के बाद वापस ली हड़ताल
बुधवार की दोपहर मुख्य सचिव से हुई वार्ता और उसमें मिले आश्वासन के बाद डीपीए ने अपनी हड़ताल वापस ले ली है। डीपीए के सालिक राम त्रिपाठी ने बताया कि बुधवार को उनकी हड़ताल दोपहर दो बजे तक चली। इस दौरान संगठन के नेताओं की मुख्य सचिव से वार्ता हो रही थी। संगठन से उन्हें आदेश मिला है कि वह अपनी हड़ताल वापस ले लें। जिसपर उन्होंने दो बजे अपनी हड़ताल वापस ले ली है। गुरुवार से वह काम करेंगे।