फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gonda News ›   Not a single informer was found in four years, plan collapsed

स्वास्थ्य विभाग को चार साल में नहीं मिला एक भी मुखबिर, योजना धरासाई

Wed, 08 Dec 2021 11:15 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 08 Dec 2021 11:15 PM IST
विज्ञापन
Not a single informer was found in four years, plan collapsed
गोंडा। कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग के स्तर पर संचालित मुखबिर योजना जिले मे धराशाई हो गई है। योजना के चार साल बीत जाने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग को जांच से जुड़ा दागी सेंटर पकड़वाने को एक भी मुखबिर नहीं मिल सका।
विज्ञापन

मुखबिर योजना के तहत भ्रूण लिंग की पहचान बताने वाले नर्सिंग होम व अल्ट्रासाउंड सेंटरों की धरपकड़ करवाने वाले को विभाग की तरफ से दो लाख रुपया तक पुरस्कार देने का प्रावधान था। कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए राज्य सरकार की तरफ से 24 जुलाई 2017 को ‘मुखबिर योजना’ की शुरुआत की गई थी।
विज्ञापन

चार साल बीत जाने के बाद भी जिले में एक भी ऐसा वालंटियर नहीं मिल सका जो भ्रूण लिंग जांच करने वाले नर्सिंग होम व अल्ट्रासाउंड सेंटरों का पता बताकर का उनकी धरपकड़ करवा सके।
विज्ञापन
विज्ञापन

इस योजना का उद्देश्य था कि गोपनीय सूचना की मदद से शहर के जिन निजी चिकित्सालयों और नर्सिंग होम में भ्रूण परीक्षण होता मिले, उनकी पहचान कर कार्रवाई के घेरे में लाया जा सके। योजना लागू होने के चार बाद भी विभाग का मुखबिर बनने के लिए अभी तक मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय में किसी ने पंजीकरण नहीं कराया है।
स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ कर्मचारी ने बताया कि इस योजना के तहत राज्य या केंद्र सरकार की सेवाओं में कार्यरत व्यक्ति या गर्भवती महिला को मिथ्या ग्राहक या सहायक के तौर पर चुना जाता है। ग्राहक बनने वाली गर्भवती महिला को विभाग में एक शपथ पत्र देना होता है।
मुखबिर मिथ्या ग्राहक या सहायक बनने के लिए मुख्य चिकित्साधिकारी से संपर्क किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि मिथ्या ग्राहक शहर में चल रहे उन अल्ट्रासाउंड सेंटरों और नर्सिंग होम की जानकारी स्वास्थ्य विभाग को देते हैं, जहां भ्रूण परीक्षण कराया जाता है। इसकी सूचना पर ही स्वास्थ्य विभाग की टीम पुलिस के साथ मिलकर छापेमारी कर नियमों के तहत कार्रवाई तय करती।
भ्रूण हत्या रोकने के लिए सही सूचना देने वाले मुखबिर को 60 हजार, मिथ्या ग्राहक बनने वाली महिला को एक लाख रुपये और इस स्टिंग ऑपरेशन में शामिल सहायक को 40 हजार रुपये की राशि इनाम के बतौर मिलनी होती है।

योजना के तहत सभी को यह राशि तीन किश्तों में मिलना थी। पहली किश्त का भुगतान सूचना सही निकलने पर दूसरी किश्त न्यायालय में हाजिरी के दौरान और तीसरी किश्त की राशि न्यायालय से दोषियों को सजा मिलने के बाद होना था।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed