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बजट न कोच, दावा बेहतर खिलाड़ी देने का
गोंडा
Updated Mon, 28 Aug 2017 11:13 PM IST
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गोंडा में बेकार पड़ा अदम गोंडवी खेल मैदान। अमर उजाला
- फोटो : अमर उजाला
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गोंडा जिले में खेल प्रतिभाओं को निखारने के दावे तो बहुत होते हैं, लेकिन न तो यहां खेलों का प्रशिक्षण देने वाले कोच हैं और न ही बजट। बिना बजट के सुविधा और संसाधन की बात करना ही बेमानी है। जिले के एकमात्र खेल मैदान नेहरू स्टेडियम बदहाली का शिकार है और यहां आने वाले खिलाड़ी अपने संसाधनों के बलबूते ही खेलों में आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। संसाधनों के अभाव में जिले की खेल प्रतिभाओं की चमक फीकी पड़ रही है।
जिले के एकमात्र नेहरू स्टेडियम में सैकड़ों बच्चे इस आस के साथ पहुंचते हैं कि उन्हें अपनी खेल प्रतिभा निखारने के लिए समुचित संसाधन मिलेंगे, लेकिन यहां पहुंचते ही उनका भ्रम टूट जाता है। कहने को तो यहां हॉकी, कुश्ती, कबड्डी, फुटबॉल व एथलेटिक्स जैसे खेलों को बढ़ावा देने के लिए प्रशिक्षकों के पांच पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में महज दो प्रशिक्षक नागेंद्र व मनोज यादव की तैनाती है।
संसाधन के नाम पर यहां खिलाड़ियों को कोई सुविधा नहीं मिलती। खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए शासन स्तर से कोई बजट भी नहीं मिलता। खेल मैदान भी बदहाली का शिकार है। मैदान के कुछ हिस्सों को छोड़कर शेष में घास उगी हुई है। इसे नियमित रूप से काटने का कोई प्रबंध नही है।
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खिलाड़ियों की सुविधा और खेलों के लिए किसी तरह के बजट का आवंटन नहीं किया जाता। मांग पर जो थोड़ा बहुत बजट मिलता है उसी से स्टेडियम आने वाले खिलाड़ियों को सुविधा प्रदान की जाती है। प्रशिक्षकों की कमी के संबंध में निदेशालय को सूचित किया गया है। -नसरीन बानो, क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी, गोंडा
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जिले के एकमात्र नेहरू स्टेडियम में सैकड़ों बच्चे इस आस के साथ पहुंचते हैं कि उन्हें अपनी खेल प्रतिभा निखारने के लिए समुचित संसाधन मिलेंगे, लेकिन यहां पहुंचते ही उनका भ्रम टूट जाता है। कहने को तो यहां हॉकी, कुश्ती, कबड्डी, फुटबॉल व एथलेटिक्स जैसे खेलों को बढ़ावा देने के लिए प्रशिक्षकों के पांच पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में महज दो प्रशिक्षक नागेंद्र व मनोज यादव की तैनाती है।
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संसाधन के नाम पर यहां खिलाड़ियों को कोई सुविधा नहीं मिलती। खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए शासन स्तर से कोई बजट भी नहीं मिलता। खेल मैदान भी बदहाली का शिकार है। मैदान के कुछ हिस्सों को छोड़कर शेष में घास उगी हुई है। इसे नियमित रूप से काटने का कोई प्रबंध नही है।
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खिलाड़ियों की सुविधा और खेलों के लिए किसी तरह के बजट का आवंटन नहीं किया जाता। मांग पर जो थोड़ा बहुत बजट मिलता है उसी से स्टेडियम आने वाले खिलाड़ियों को सुविधा प्रदान की जाती है। प्रशिक्षकों की कमी के संबंध में निदेशालय को सूचित किया गया है। -नसरीन बानो, क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी, गोंडा