{"_id":"5d752be08ebc3e017553a099","slug":"neither-drug-delivery-nor-fogging-how-to-get-rid-of-communicable-disease-gonda-news-lko480559595","type":"story","status":"publish","title_hn":"दवा वितरण न फॉगिंग, कैसे मिले संचारी रोग से निजात","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दवा वितरण न फॉगिंग, कैसे मिले संचारी रोग से निजात
विज्ञापन
गोंडा। गर्मी के मौसम में संचारी रोग से निपटने के लिए स्वास्थ्य महकमा कागजों में तैयार है। गर्मी में डेगूं, चिकनगुनिया, जेई/एईएस जैसी गंभीर बीमारी से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग का काम धरातल पर कम दिख रहा है। मच्छरों को काबू में करने के लिए न तो किसी फॉगिंग करायी जा रही है न ही एंटी लार्वा का छिड़काव कराया जा रहा है। यही वजह है रोजाना जिला अस्पताल में बुखार से पीड़ित मरीजों की की तादात बढ़ गई है। इस समय ही गांव में बुखार से पीड़ित मरीज मिल रहे हैं। लोगों में गंभीर बुखार का भी खौफ सता रहा है। जिला अस्पताल में ड़ेगू वार्ड में आधा दर्जन से अधिक मरीज भर्ती हैं। इसके अलावा मेडिकल व इमरजेंसी वार्ड में भी गंभीर रूप से पीड़ित मरीजों की तादात बढ़ी है। ओपीडी में रोजाना 100 से 150 मरीज चेकअप कराने को आ रहे हैं। विभाग की ओर से दो से 30 सितंबर तक संचारी रोग माह मनाया जा रहा है। इसके लिए विभाग की ओर से ब्लॉकवार टीम गठित कर प्रचार प्रसार का दावा किया जा रहा है।
जिले में इस साल संचारी रोग से हुए प्रभावित मरीजों की स्थिति
बीमारी प्रभावित रोगी बीमारी से मौत
चिकेन पॉक्स 67 00
जेई/एईएस 09 00
स्वाइन फ्लू 08 02
चिकनगुनिया 00 00
डेंगू 05 01
मलेरिया 08 00
डायरिया 12 00
मिजिल्स 01 00
फूड पॉइजनिंग 208 00
नहीं बनाया कंट्रोल रूम
स्वास्थ्य विभाग हवा में प्लान बना रहा है। संचारी रोग की समस्या से निपटने को लेकर स्वास्थ्य विभाग गंभीर नही है। शासन की ओर से लगातार इसके लिए प्रचार प्रसार कर लोगों को जागरूक करने प्रभावित क्षेत्रों में टीम भेजकर समय से बीमारी पर काबू पाने के लिए कारगर कदम उठाए जाने के निर्देश दिये गये हैं लेकिन जिले के स्वास्थ्य विभाग जनता की ओर से क्षेत्र में बीमारी महामारी की सूचना देने के लिए आज तक कोई कंट्रोल रूम तक नहीं खोला गया है। इसके लिए एक इमरजेंसी फोन नंबर भी जारी किया जाना चाहिए ताकि प्रभावित लोगों की ओर से उस पर सूचना दी जा सके।
गांव व नगर में नहीं हो रही फॉगिंग
स्वास्थ्य विभाग में नगरों के अलावा गांव में भी फॉगिंग व एंटी लार्वा की दवा के छिड़काव किये जाने का प्रावधान है। पिछले साल शासन की ओर से ग्राम पंचायतों को मच्छरों को काबू में करने के लिए एंटी लार्वा दवा का छिड़काव करने के लिए नैफसेक मशीन खरीदने का आदेश दिया था। आज तक नाममात्र गांवों में ही नैफसेक की मशीन खरीदी गई है। बताया जाता है कि नैफसेक मशीन के मद की रकम का गोलमाल कर लिया गया है। विभागीय अधिकारी भी इस मामले को दबाने में लगे हैं। दूसरी ओर ब्लाकों में फॉगिंग के लिए लगाये गये लोगों से दूसरे काम लिये जा रहे हैं। कुछ रसूखदार या अधिकारियों के घर तक ही फॉगिंग की जाती है। गांव व नगर के लोगों की माने तो लोग मच्छर के प्रकोप से न सिर्फ त्रस्त हैं बल्कि बीमार भी हैं लेकिन कभी फॉगिंग नही करायी जा रही है। जबकि रोस्टरवार फॉगिंग व दवा का छिड़काव किया जाना चाहिए।
विज्ञापन
बुखार से बचाव के लिए करें ये उपाय
बुखार जानलेवा है। बुखार से बचाव के लिए जागरूकता जरूरी है। इस बारे में अपर जिला मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. देवराज ने बताया कि लोगों को अपने घरों के आसपास साफ सफाई रखनी चाहिए। घरों में कबाड़ इकट्ठा न होने दें। आसपास जल जमाव न होने दें जल भराव हो तो वहां पर मिट्टी तेल व जला डीजल डाल दें इसे मच्छर नही पनपेंगे। उन्होंने बताया कि बच्चों को मच्छर से बचाएं । बुखार होने पर देर किये बिना नजदीकी अस्पताल में जांच करानी चाहिए ताकि पता चल सके किस तरह का बुखार है। बुखार के कई दिन होने से वह अपना सर्किल बना लेता है इसे मरीज का तंत्रिका तंत्र कमजोर हो जाता है।
मच्छर जनित सभी तरह के संचारी रोग से बचाव के लिए जिले भर में ब्लॉकवार टीमों के जरिये जागरूकता कार्यक्रम चलाया जा रहा है। टीम घर-घर जाकर दस्तक दे रही है। जिन घरों में एक से 15 साल के बच्चे हैं उनके दरवाजे पर स्टीकर लगाया जा रहा है। प्रभावित क्षेत्रों में दवा वितरण व फॉगिंग और एंटी लार्वा का छिड़काव कराया जा रहा है। -मोबीन अहमद, नोडल अधिकारी संचारी रोग/जिला मलेरिया अधिकारी।
विज्ञापन
जिले में इस साल संचारी रोग से हुए प्रभावित मरीजों की स्थिति
बीमारी प्रभावित रोगी बीमारी से मौत
चिकेन पॉक्स 67 00
जेई/एईएस 09 00
स्वाइन फ्लू 08 02
चिकनगुनिया 00 00
डेंगू 05 01
मलेरिया 08 00
डायरिया 12 00
मिजिल्स 01 00
फूड पॉइजनिंग 208 00
नहीं बनाया कंट्रोल रूम
स्वास्थ्य विभाग हवा में प्लान बना रहा है। संचारी रोग की समस्या से निपटने को लेकर स्वास्थ्य विभाग गंभीर नही है। शासन की ओर से लगातार इसके लिए प्रचार प्रसार कर लोगों को जागरूक करने प्रभावित क्षेत्रों में टीम भेजकर समय से बीमारी पर काबू पाने के लिए कारगर कदम उठाए जाने के निर्देश दिये गये हैं लेकिन जिले के स्वास्थ्य विभाग जनता की ओर से क्षेत्र में बीमारी महामारी की सूचना देने के लिए आज तक कोई कंट्रोल रूम तक नहीं खोला गया है। इसके लिए एक इमरजेंसी फोन नंबर भी जारी किया जाना चाहिए ताकि प्रभावित लोगों की ओर से उस पर सूचना दी जा सके।
विज्ञापन
गांव व नगर में नहीं हो रही फॉगिंग
स्वास्थ्य विभाग में नगरों के अलावा गांव में भी फॉगिंग व एंटी लार्वा की दवा के छिड़काव किये जाने का प्रावधान है। पिछले साल शासन की ओर से ग्राम पंचायतों को मच्छरों को काबू में करने के लिए एंटी लार्वा दवा का छिड़काव करने के लिए नैफसेक मशीन खरीदने का आदेश दिया था। आज तक नाममात्र गांवों में ही नैफसेक की मशीन खरीदी गई है। बताया जाता है कि नैफसेक मशीन के मद की रकम का गोलमाल कर लिया गया है। विभागीय अधिकारी भी इस मामले को दबाने में लगे हैं। दूसरी ओर ब्लाकों में फॉगिंग के लिए लगाये गये लोगों से दूसरे काम लिये जा रहे हैं। कुछ रसूखदार या अधिकारियों के घर तक ही फॉगिंग की जाती है। गांव व नगर के लोगों की माने तो लोग मच्छर के प्रकोप से न सिर्फ त्रस्त हैं बल्कि बीमार भी हैं लेकिन कभी फॉगिंग नही करायी जा रही है। जबकि रोस्टरवार फॉगिंग व दवा का छिड़काव किया जाना चाहिए।
विज्ञापन
बुखार से बचाव के लिए करें ये उपाय
बुखार जानलेवा है। बुखार से बचाव के लिए जागरूकता जरूरी है। इस बारे में अपर जिला मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. देवराज ने बताया कि लोगों को अपने घरों के आसपास साफ सफाई रखनी चाहिए। घरों में कबाड़ इकट्ठा न होने दें। आसपास जल जमाव न होने दें जल भराव हो तो वहां पर मिट्टी तेल व जला डीजल डाल दें इसे मच्छर नही पनपेंगे। उन्होंने बताया कि बच्चों को मच्छर से बचाएं । बुखार होने पर देर किये बिना नजदीकी अस्पताल में जांच करानी चाहिए ताकि पता चल सके किस तरह का बुखार है। बुखार के कई दिन होने से वह अपना सर्किल बना लेता है इसे मरीज का तंत्रिका तंत्र कमजोर हो जाता है।
मच्छर जनित सभी तरह के संचारी रोग से बचाव के लिए जिले भर में ब्लॉकवार टीमों के जरिये जागरूकता कार्यक्रम चलाया जा रहा है। टीम घर-घर जाकर दस्तक दे रही है। जिन घरों में एक से 15 साल के बच्चे हैं उनके दरवाजे पर स्टीकर लगाया जा रहा है। प्रभावित क्षेत्रों में दवा वितरण व फॉगिंग और एंटी लार्वा का छिड़काव कराया जा रहा है। -मोबीन अहमद, नोडल अधिकारी संचारी रोग/जिला मलेरिया अधिकारी।