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Gonda News: 67 हजार गर्भवती प्रसव कराने नहीं पहुंची अस्पताल
Fri, 20 Jan 2023 11:52 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Fri, 20 Jan 2023 11:52 PM IST
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गोंडा। जच्चा-बच्चा की सुरक्षा के लिए सरकार एड़ी चोटी का दम लगा रही है। आधा दर्जन स्वास्थ्य योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए पांच हजार स्वास्थ्यकर्मियों की टीम तैनात है। बावजूद इसके जिले की 67 हजार गर्भवतियों को सुरक्षित प्रसव के लिए सरकारी अस्पताल नहीं लाया जा सका। इससे जिम्मेदार अधिकारी व स्वास्थ्यकर्मियों की लापरवाही सरकारी मंशा पर पानी फेर रही है।
संस्थागत प्रसव बढ़ाने के लिए केंद्र व राज्य सरकार की ओर से आधा दर्जन स्वास्थ्य योजनाएं संचालित हैं। प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के तहत प्रसूता को तीन किश्तों में पांच हजार रुपये दिए जा रहे हैं। जननी सुरक्षा योजना के तहत 1400 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। इसके अलावा सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत प्रत्येक माह के नौ व 24 तारीख को सभी जांचें निशुल्क कराई जाती हैं। प्रसूताओं के पोषण आहार की व्यवस्था की जाती है। जिले में साल भर में करीब 107586 गर्भवतियों का प्रसव हुआ। जिनमें से 40,352 ने जिला महिला अस्पताल व सरकारी स्वास्थ्य इकाइयों पर प्रसव कराया गया।
पांच हजार कर्मियों की कार्यशैली पर उठ रहे सवालसंस्थागत प्रसव बढ़ाने के लिए गांवों में 3556 आशा कार्यकर्ता, 588 एएनएम व 336 सीएचओ लगाए गए हैं। इसके अलावा ब्लाॅकों पर बीसीपीएम व डॉक्टरों की जिम्मेदारी संस्थागत प्रसव बढ़ाने की थी, लेकिन कोई प्रगति नहीं हो सकी। सीएमओ ने कम संस्थागत प्रसव वाले क्षेत्रों की सूची तलब कर संबंधित कर्मियों से स्पष्टीकरण मांगा है।
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8219 ने निजी अस्पतालों में करवाया प्रसवविभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं के बावजूद साल भर में 8219 गर्भवतियों का प्रसव निजी अस्पतालों में हुआ। इसके पीछे सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी व पैरामेडिकल स्टाफ की उदासीनता बताई जा रही है। महिला अस्पताल में तीन माह से बेहोशी का डॉक्टर न होने से गर्भवतियों का ऑपरेशन प्रभावित हो रहा है। सीएमओ के अधीन बेहोशी डॉक्टर के सहारे महिला अस्पताल में ऑपरेशन हो रहे हैं।
संस्थागत प्रसव की फैक्ट फाइल
कुल प्रसव हुआ- 107586
सरकारी अस्पताल में- 40,352
निजी अस्पतालों में-8219
घरों पर प्रसव हुआ- 59015
नियमित एएनएम की कमी
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर स्त्री रोग विशेषज्ञ न होने के कारण संस्थागत प्रसव प्रभावित हो रहे हैं। नियमित एएनएम की भी कमी है। संस्थागत प्रसव बढ़ाने के लिए अधिक घरेलू प्रसव वाले क्षेत्रों का सर्वे करवाकर जागरुकता अभियान चलाया जाएगा।
डॉ. रश्मि वर्मा, सीएमओ
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संस्थागत प्रसव बढ़ाने के लिए केंद्र व राज्य सरकार की ओर से आधा दर्जन स्वास्थ्य योजनाएं संचालित हैं। प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के तहत प्रसूता को तीन किश्तों में पांच हजार रुपये दिए जा रहे हैं। जननी सुरक्षा योजना के तहत 1400 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। इसके अलावा सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत प्रत्येक माह के नौ व 24 तारीख को सभी जांचें निशुल्क कराई जाती हैं। प्रसूताओं के पोषण आहार की व्यवस्था की जाती है। जिले में साल भर में करीब 107586 गर्भवतियों का प्रसव हुआ। जिनमें से 40,352 ने जिला महिला अस्पताल व सरकारी स्वास्थ्य इकाइयों पर प्रसव कराया गया।
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पांच हजार कर्मियों की कार्यशैली पर उठ रहे सवालसंस्थागत प्रसव बढ़ाने के लिए गांवों में 3556 आशा कार्यकर्ता, 588 एएनएम व 336 सीएचओ लगाए गए हैं। इसके अलावा ब्लाॅकों पर बीसीपीएम व डॉक्टरों की जिम्मेदारी संस्थागत प्रसव बढ़ाने की थी, लेकिन कोई प्रगति नहीं हो सकी। सीएमओ ने कम संस्थागत प्रसव वाले क्षेत्रों की सूची तलब कर संबंधित कर्मियों से स्पष्टीकरण मांगा है।
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8219 ने निजी अस्पतालों में करवाया प्रसवविभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं के बावजूद साल भर में 8219 गर्भवतियों का प्रसव निजी अस्पतालों में हुआ। इसके पीछे सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी व पैरामेडिकल स्टाफ की उदासीनता बताई जा रही है। महिला अस्पताल में तीन माह से बेहोशी का डॉक्टर न होने से गर्भवतियों का ऑपरेशन प्रभावित हो रहा है। सीएमओ के अधीन बेहोशी डॉक्टर के सहारे महिला अस्पताल में ऑपरेशन हो रहे हैं।
संस्थागत प्रसव की फैक्ट फाइल
कुल प्रसव हुआ- 107586
सरकारी अस्पताल में- 40,352
निजी अस्पतालों में-8219
घरों पर प्रसव हुआ- 59015
नियमित एएनएम की कमी
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर स्त्री रोग विशेषज्ञ न होने के कारण संस्थागत प्रसव प्रभावित हो रहे हैं। नियमित एएनएम की भी कमी है। संस्थागत प्रसव बढ़ाने के लिए अधिक घरेलू प्रसव वाले क्षेत्रों का सर्वे करवाकर जागरुकता अभियान चलाया जाएगा।
डॉ. रश्मि वर्मा, सीएमओ