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अधिक आमदनी वाले रेलवे स्टेशन पर सुविधाएं नदारद
अमर उजाला/बलरामपुर
Updated Sun, 24 Apr 2016 11:55 PM IST
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टिकट लेते यात्री
- फोटो : अमर उजाला
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आमान परिवर्तन पूरा होने पर गोंडा-गोरखपुर रेल मार्ग पर ट्रेनों का संचालन शुरू होने के छह माह बाद भी स्टेशनों की दशा में कोई सुधार नहीं हुआ है। गोंडा-गोरखपुर वाया बढ़नी रेल मार्ग पर सबसे अधिक आय देने वाले स्टेशनों में से एक झारखंडी स्टेशन पर यात्री सुविधाओं का पूरी तरह अभाव है। न तो बैठने के लिए पर्याप्त सीटें हैं और न पीने के लिए शुद्ध पेयजल ही उपलब्ध है।
जनरेटर का कनेक्शन न होने के कारण बिजली जाते ही स्टेशन पर अंधेरा छा जाता है जिससे यात्रियों को असुविधा होती है। स्टेशन पर तीन काउंटर होने के बावजूद एक ही टिकट काउंटर का संचालन होने से यात्रियों को लंबी लाइन लगाकर टिकट लेना पड़ता है।
गोंडा-गोरखपुर वाया बढ़नी रेल मार्ग पर आमान परिवर्तन का कार्य पूरा होने के बाद 22 नवंबर 2015 को रेल मंत्री सुरेश प्रभु द्वारा उद्घाटन कर ट्रेनों का संचालन शुरू किया गया था। इस रेल मार्ग पर अभी दो एक्सप्रेस ट्रेनों के साथ चार जोड़ी पैसेंजर ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है।
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इस रेल मार्ग पर स्थित झारखंडी रेलवे स्टेशन सबसे अधिक आय देने वाले स्टेशनों में से एक है। इस स्टेशन से सैकड़ों यात्री प्रतिदिन ट्रेन पकड़ते हैं। 20 हजार रुपये से अधिक प्रतिदिन आय देने वाले इस स्टेशन पर यात्री सुविधाओं के नाम पर मात्र एक प्रतीक्षालय भवन व टीनशेड ही उपलब्ध है। प्रतीक्षालय में बैठने के लिए कुर्सी तक की सुविधा नहीं है। टीनशेड के नीचे नाम मात्र की ही बेंच उपलब्ध हैं। ऐसे में यात्रियों को खड़े होकर ही ट्रेनों का इंतजार करना पड़ता है।
स्टेशन पर पेयजल के नाम पर दो इंडिया मार्का-2 हैंडपंप लगे हैं। इनमें से एक हैंडपंप प्राय: खराब रहता है। गर्मी के इस मौसम में शुद्ध व शीतल जल की सुविधा उपलब्ध न होने के कारण यात्रियों को 20 रुपये की मिनरल वाटर की बोतल खरीदनी पड़ती है।
स्टेशन पर रोशनी के लिए जनरेटर की सुविधा तो है लेकिन उसका कनेक्शन अभी तक स्टेशन परिसर में नहीं किया गया है। स्टेशन में जनरेटर का कनेक्शन न होने से बिजली जाते ही अंधेरा छा जाता है। स्टेशन पर अंधेरा होने के कारण यात्रियों को ट्रेनों का इंतजार करने में काफी असुविधा होती है।
झारखंडी रेलवे स्टेशन से प्रतिदिन सैकड़ों यात्री ट्रेन पकड़ते हैं। स्टेशन पर तीन खिड़की होने के बावजूद मात्र एक ही खिड़की से अप व डाउन दोनों तरफ के यात्रियों को टिकट दिए जाते हैं। इसके चलते टिकट खिड़की पर लंबी लाइनें लगती हैं। जिसके चलते यात्रियों को दिक्कत होती है।
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जनरेटर का कनेक्शन न होने के कारण बिजली जाते ही स्टेशन पर अंधेरा छा जाता है जिससे यात्रियों को असुविधा होती है। स्टेशन पर तीन काउंटर होने के बावजूद एक ही टिकट काउंटर का संचालन होने से यात्रियों को लंबी लाइन लगाकर टिकट लेना पड़ता है।
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गोंडा-गोरखपुर वाया बढ़नी रेल मार्ग पर आमान परिवर्तन का कार्य पूरा होने के बाद 22 नवंबर 2015 को रेल मंत्री सुरेश प्रभु द्वारा उद्घाटन कर ट्रेनों का संचालन शुरू किया गया था। इस रेल मार्ग पर अभी दो एक्सप्रेस ट्रेनों के साथ चार जोड़ी पैसेंजर ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है।
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इस रेल मार्ग पर स्थित झारखंडी रेलवे स्टेशन सबसे अधिक आय देने वाले स्टेशनों में से एक है। इस स्टेशन से सैकड़ों यात्री प्रतिदिन ट्रेन पकड़ते हैं। 20 हजार रुपये से अधिक प्रतिदिन आय देने वाले इस स्टेशन पर यात्री सुविधाओं के नाम पर मात्र एक प्रतीक्षालय भवन व टीनशेड ही उपलब्ध है। प्रतीक्षालय में बैठने के लिए कुर्सी तक की सुविधा नहीं है। टीनशेड के नीचे नाम मात्र की ही बेंच उपलब्ध हैं। ऐसे में यात्रियों को खड़े होकर ही ट्रेनों का इंतजार करना पड़ता है।
स्टेशन पर पेयजल के नाम पर दो इंडिया मार्का-2 हैंडपंप लगे हैं। इनमें से एक हैंडपंप प्राय: खराब रहता है। गर्मी के इस मौसम में शुद्ध व शीतल जल की सुविधा उपलब्ध न होने के कारण यात्रियों को 20 रुपये की मिनरल वाटर की बोतल खरीदनी पड़ती है।
स्टेशन पर रोशनी के लिए जनरेटर की सुविधा तो है लेकिन उसका कनेक्शन अभी तक स्टेशन परिसर में नहीं किया गया है। स्टेशन में जनरेटर का कनेक्शन न होने से बिजली जाते ही अंधेरा छा जाता है। स्टेशन पर अंधेरा होने के कारण यात्रियों को ट्रेनों का इंतजार करने में काफी असुविधा होती है।
झारखंडी रेलवे स्टेशन से प्रतिदिन सैकड़ों यात्री ट्रेन पकड़ते हैं। स्टेशन पर तीन खिड़की होने के बावजूद मात्र एक ही खिड़की से अप व डाउन दोनों तरफ के यात्रियों को टिकट दिए जाते हैं। इसके चलते टिकट खिड़की पर लंबी लाइनें लगती हैं। जिसके चलते यात्रियों को दिक्कत होती है।