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पेड़ के नीचे होती पढ़ाई तो कहीं चूल्हे में बनता एमडीएम

Mon, 02 Sep 2019 10:27 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 02 Sep 2019 10:27 PM IST
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MDM is made in the stove while studying under a tree somewhere
रुपईडीह (गोंडा)। जिले में प्रशासन ने 534 प्राइमरी व जूनियर हाईस्कूलों को जर्जर घोषित कर दिया गया है। पंचायतों से ऑपरेशन कायाकल्प से स्कूलों में सुधार की मुहिम भी चल रही है। इन सबके बीच अमर उजाला ने क्षेत्र के देवतहा पंचायत के दो प्राइमरी स्कूलों की स्थिति को परखा, देख कर हैरानी हुई कि स्कूलों का हाल ऐसा है तो बच्चों का मन स्कूलों में कैसे लगेगा। हाल यह है कि शौचालय तो बना है लेकिन चालू ही नहीं है। एमडीएम आज भी चूल्हे पर बनता है, रसोइया पसीने से तर बतर है और चूल्हा फूंक रही है। एक स्कूल के दो कमरों को छूने से ही डर लगता है, कब गिर जाए पता नहीं। इन स्कूलों में पढ़ने के लिए पंजीकृत 309 बच्चों में 100 से अधिक बच्चे स्कूल ही नहीं आते हैं। स्कूल के शिक्षक कहते हैं कि स्कूल न आने वाले बच्चों के परिवार से संपर्क किया जाता है, कुछ सुधार हुआ है। व्यवस्था थोड़ी ठीक हो जाए तो बच्चों का मन पढ़ाई में लगता है। अब विभाग व प्रशासन से गांव के लोगों की उम्मीद है कि स्कूल में कुछ सुधार होगा।
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प्राइमरी स्कूल देवतहा में एक साल से चूल्हे पर बनता है खाना
गांव के प्राइमरी स्कूल देवतहा का हाल यह है कि यहां एक साल से चूल्हे पर ही खाना बनता है। इससे खाना बनने में समय तो लगता ही है, कोई सामग्री कम हो जाए तो काफी मशक्कत करनी पड़ती है। यही नहीं रसोइयों की स्थिति बहुत खराब है। बताया जा रहा है कि स्कूल में एक साल पहले गैस सिलेंडर चोरी हो गया था। इसके बाद से सिलेंडर खरीद के लिए कोई कार्रवाई ही नहीं हुई। चूल्हे पर ही यहां भोजन बनाने की मजबूरी है, वह भी तब जब पूरे प्रदेश में हर परिवार को उज्ज्वला योजना से जोड़ा गया है। यहां रसोइयों को गैस सिलेंडर का इंतजार है।
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कमरे हैं जर्जर तो पंचायत भवन व मैदान में लग रहा स्कूल
कन्या प्राथमिक विद्यालय देवतहा का हाल तो और भी खराब है। यहां के दो कमरे जर्जर हैं और वह कब गिर जाएं कुछ अंदाजा नही है। अब यहां सिर्फ एक ही अतिरिक्त कक्षा कक्ष है जहां स्कूल लगती है। इसके अलावा अन्य के कमरे जर्जर ही हैं। इससे बच्चों को बाहर पेड़ के नीचे मैदान में पढ़ाया जा रहा है तो कुछ बच्चों को पंचायत भवन में बैठाया जाता है। स्कूल से बाहर बच्चों की पढ़ाई होने से स्कूल के बच्चों व शिक्षकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। बाउंड्री न होने से स्कूल में पशुओं की आवाजाही से गंदगी रहती है, सफाई कर्मी आते ही नही हैं। ऐसे में शिक्षकों को ही सफाई करनी पड़ती है।
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दोनों स्कूलों के शौचालय बने, पर उपयोग के लायक नहीं
दोनों स्कूलों में शौचालय तो बने हैं लेकिन उनका उपयोग नहीं हो रहा है। कन्या प्राइमरी स्कूल देवतहा में शौचालय पहले बना था, अब उसकी टंकी चोक है और दरवाजे तक नही है। ऐसे में बच्चे वहां जाने से कतराते हैं, गंदगी है। इसके अलावा हाल ही में प्राइमरी स्कूल देवतहा में 1.35 लाख से बना शौचालय ऐसे बना है कि उपयोग संभव नहीं है। यहां तो टंकी ही नही है। ऐसे में उपयोग कैसे किया जाए। पानी की व्यवस्था शौचालय में नहीं है।

स्कूलों में सुविधा बढ़ाने के लिए कार्रवाई चल रही है। जिलाधिकारी ने जिला पंचायत राज अधिकारी को निर्देश दिया है, जहां कमी है उसे दूर करने के लिए कार्य हो रहा है। देवतहा के मामले की रिपोर्ट मंगाई जाएगी।-मनिराम सिंह, बीएसए
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