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गेंदा और ग्लेडियोलस चमकाएगा किसानों की किस्मत

Tue, 24 Nov 2020 10:20 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 24 Nov 2020 10:20 PM IST
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Marigold and gladiolus will shine the fortunes of farmers
गोंडा के नवाबगंज में ग्लैडीयोलस की खेती करता किसान(फ़ाइल फोटो) - फोटो : GONDA
गोंडा। पारंपरिक खेती के साथ ही किसानों को फूलों की खेती से आय बढ़ाने का खाका उद्यान विभाग ने खींचा है। फूलों की खेती पर अनुदान के साथ ही उन्हें तकनीकी और वैज्ञानिक खेती की जानकारी भी विभाग देगा। दो तरह के फूलों की खेती पर किसानों को अनुदान मिलेगा। एक हेक्टेयर पर ग्लेडियोलस फूल की खेती पर 37 हजार रुपये और गेंदा की खेती पर 12 हजार रुपये का अनुदान मिल सकेगा। एक एकड़ में भी खेती की जा सकेगी। जिस पर भी अनुदान मिल सकेगा। अनुदान की राशि क्षेत्रफल के आधार पर ही घटती रहेगी। किसानों से इसके लिए विभाग ने पंजीयन कराने को कहा है। जिससे सत्यापन करके अनुदान दिया जा सके।
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माना जा रहा है कि इन रंग-बिरंगे फूलों की खेती से कुछ ही महीनों में किसानों को दूसरी फसल के मुकाबले कई गुना मुनाफा मिल सकेगा। अक्तूर व नवंबर का महीना ग्लेडियोलस की खेती के लिए मुफीद माना जा रहा है। ऐसे में इस समय किसान ग्लेडियोलस की खेती की शुरुआत कर सकते हैं। ग्लेडियोलस के फूलों की मांग देश-विदेश तक होती है, किसान इसे आसानी से अपने आसपास के मार्केट में बेच सकता है। जिले के नवाबगंज क्षेत्र में कई किसान इसकी खेती करते हैं। पारंपरिक खेती की तुलना में अच्छे मुनाफे ने किसानों का ध्यान इस खेती की ओर खींचा।
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कृषि विज्ञान केंद्र करनपुर के बागवानी विशेषज्ञ डॉ. उपेन्द्र सिंह बताते हैं ये समय ग्लेडियोलस की खेती के लिए सही समय होता है, इसकी खेती में सबसे ज्यादा ध्यान खेत की मिट्टी पर देना चाहिए, क्योंकि जैसी मिट्टी होगी उतना ही बढ़िया उत्पादन होगा। ग्लेडियोलस की खेती सभी प्रकार की मिट्टी में की जा सकती है, लेकिन बलुई दोमट मृदा जिसका पीएच मान 5.5 से 6.5 के बीच हो। साथ ही भूमि के जलनिकासी का उचित प्रबंध हो, सर्वोत्तम मानी जाती है। खुले स्थान जहां पर सूरज की रोशनी सुबह से शाम तक रहती हो, ऐसे स्थान पर ग्लेडियोलस की खेती सफलतापूर्वक की जा सकती है। यहां के फूलों की जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम, नीदरलैंड और संयुक्त अरब अमीरात में मांग भी हैं। ग्लेडियोलस की लगभग दस हजार किस्में हैं लेकिन कुछ मुख्य प्रजातियों की खेती जिले के मैदानी क्षेत्रों में होती है। जैसे कि स्नो क्वीन, सिल्विया, एपिस ब्लासमें , बिग्स ग्लोरी, टेबलर, जैक्सन लिले, गोल्ड बिस्मिल, रोज स्पाइटर, कोशकार, लिंके न डे, पैट्रीसिया, जार्ज मैसूर, पेंटर पियर्स, किंग कीपर्स, किलोमिंगो, क्वीन, अग्नि, रेखा, पूसा सुहागिन, नजराना, आरती, अप्सरा, सोभा, सपना और पूनम आदि है।
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अलग-अलग रंगों के होते हैं फूल
ग्लेडियोलस की खेती में कई रंग के फूल होते हैं। इसमें लाल रंग के फूल अमेरिकन ब्यूटी, ऑस्कर, नजराना, रेड ब्यूटी आदि प्रमुख हैं।
गुलाबी:- पिंक फ्रैंडशिप, समर पर्ल होते हैं। नारंगी में रोज सुप्रीम, सफेद में ह्वाइट फ्रैंडशिप, ह्वाइट प्रोस्पेरिटी, स्नो ह्वाइट, मीरां, पीला में टोपाल, सपना, टीएस-14, बैंगनी में हरमैजस्टी फूल हैं।
भूमि की ऐसे करें तैयारी
जिस खेत में ग्लेडियोलस की खेती करनी हो उसकी दो-तीन बार अच्छी तरह से जुताई करके मिट्टी को भुरभुरा बना लेना चाहिए। इसके लिए खेत की गहरी जुताई करनी चाहिए। क्योंकि इसकी जड़ें भूमि में अधिक गहराई तक नहीं जाती है। ग्लेडियोलस की खेती बल्बों द्वारा की जाती है। बुवाई करने का सही समय मध्य अक्टूबर से लेकर नवंबर तक रहता है। किस्मों को उनके फूल खिलने के समयानुसार अगेती, मध्य और पछेती के हिसाब से अलग-अलग क्यारियों में लगाना चाहिए। एक हेक्टेयर भूमि कन्दों की रोपाई के लिए लगभग दो लाख के कन्दों की आवश्यकता पड़ती है यह मात्रा कन्दों की रोपाई की दूरी पर घट बढ़ सके ती है। कन्दों का शोधन बैविस्टीन के 0.02 प्रतिशत के घोल में आधा घंटा डुबोकर छाया में सुखाके र बुवाई या रोपाई करनी चाहिए। कुल चार-पांच निराई-गुड़ाई की आवश्यकता पड़ती है। दो बार मिट्टी-पौधों पर चढ़ानी चाहिये उसी में नाइट्रोजन का प्रयोग टॉप ड्रेसिंग के रूप में करना चाहिए। तीन पत्ती की स्टेज पर पहली बार व छह पत्ती की स्टेज पर दूसरी बार मिट्टी चढ़ानी चाहिए। पहली सिंचाई घनकंदों के अंकुरण के बाद करनी चाहिए। इसके बाद सर्दियों में 10-12 दिनों के बाद और गर्मियों में पांच-छह दिन के अंतराल पर करनी चाहिए। सिंचाई रोपाई के 10 से 15 दिन बाद जब कंद अंकुरित होने लगे तब पहली सिंचाई करनी चाहिए। फसल में नमी की कमी नहीं होनी चाहिए तथा पानी सिंचाई का भरा भी नहीं रहना चाहिए। घनकंदों की बुवाई के पश्चात अगेती किस्मों में लगभग 60-65 दिनों में, मध्य किस्मों 80-85 दिनों तथा पछेती किस्मों में 100-110 पुष्प उत्पादन शुरू हो जाता है। पुष्प दंडिकाओं को काटने का समय बाजार की दूरी पर निर्भर करता है।
सजावटों के लिए काफी अहम है ग्लेडियोलस फूल
ग्लेडियोलस के फूल ज्यादातर सजावट के काम आता है। शादी विवाह के साथ ही जन्मदिन पार्टी, विभिन्न प्रकार के आयोजनों, कार्यक्रमों, सरकारी स्तर पर होने वाले आयोजनों में ज्यादातर मांग ग्लेडियोलस फूल की मांग होती है। इसके अलावा स्वागत करने और बधाई देने में भी इसी फूल की जरूरत होती है। बुके आदि का प्रयोग बडे पैमाने पर इस समय होता है। इसमें इसी फूल की जरूरत पड़ती है। ऐसे में इससे किसानों को बाजार मिलने में दिक्कत नहीं होती है और आसानी से उपज नकद बिक जाता है। इसके अलावा बाहर भी बिक्री होती है।
उद्यान विभाग किसानों की आय बढ़ाने के कई योजनाएं संचालित कर रहा है। फूल खेती पहले से भी लोग कर रहे हैं और भी किसान करना चाह रहे हैं। अनुदान देकर किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। -मृत्युंजय सिंह, जिला उद्यान अधिकारी

वर्जन
फूलों की खेती से किसानों की आय बढ़ेगी। योजना तैयार की गई है 20 हेक्टेयर की खेती के लिए ग्लेडियोलस और 20 हेक्टेयर पर गेंदा के फूलों की खेती पर अनुदान का लक्ष्य तय किया गया है। -अनिल शुक्ल, योजना प्रभारी उद्यान विभाग
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