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60 स्कूलों में लटके ताले,15 हजार बच्चों की पढ़ाई ठप
गोंडा
Updated Thu, 10 Aug 2017 10:17 PM IST
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करनैलगंज क्षेत्र के एल्गिन चरसड़ी बंध के समीप बना प्राथमिक विद्यालय गौरा सिंहपुर पूरी तरह से बाढ़ के पानी में डूब चुका है।
- फोटो : amar ujala
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करनैलगंज क्षेत्र के बाद परसपुर व नवाबगंज के इलाकों में बाढ़ की दस्तक ने आम लोगों की मुसीबत तो बढ़ाई ही है, सबसे अधिक मुसीबत स्कूल जाने वाले नौनिहालों को उठानी पड़ रही है। बाढ़ की चपेट में आने से जिले के करीब 60 परिषदीय विद्यालयों में ताला लटक गया है और करीब 15 हजार बच्चों की पढ़ाई ठप हो गई है।
करनैलगंज इलाके में घाघरा नदी ने पिछले एक माह से तांडव मचा रखा है। खतरे के निशान से ऊपर बह रही घाघरा नदी के पानी से अब तक इस क्षेत्र के 355 मजरे प्रभावित हो चुके हैं। बाढ़ की इस विभीषिका के चलते आम जनजीवन अस्त व्यस्त है और लोग गांवों से पलायन कर बंधे पर शरण ले चुके हैं।
इन सबके बीच सबसे खराब स्थिति बेसिक शिक्षा विभाग के परिषदीय स्कूलों की है। बाढ़ के चलते बच्चों की पढ़ाई ठप हो गई है और क्षेत्र के कई स्कूलों में ताला लटक गया है। क्षेत्र के नकहरा, काशीपुर, घरकुंइया, प्रतापपुर, बहुवन मदार मांझा, नन्दौर समेत कई अन्य गांवों के करीब 60 स्कूल बाढ़ के चपेट में आ गए हैं।
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बाढ़ की पानी स्कूलों में घुस गया है। बाढ़ की इस विभीषिका के कारण पिछले एक माह से स्कूल बंद चल रहे हैं। इन स्कूलों के बंद होने से करीब 15 हजार नौनिहालों की पढ़ाई ठप हो गई है। इसी स्थिति परसपुर की भी है।
करनैलगंज से निकलकर बाढ़ का पानी अब परसपुर पहुंचने लगा है। जिससे यहां के भी करीब 10 परिषदीय स्कूल बाढ़ की जद में आ चुके है। प्राथमिक विद्यालय सुकईपुरवा बाढ़ के पानी में डूब गया है। इस स्थिति से निपटने में बेसिक शिक्षा विभाग के अफसर भी अपने को अक्षम पा रहे हैं।
बाढ़ के कारण जो स्कूल प्रभावित हुए हैं उन्हें बंद कर दिया गया है और सुरक्षा की स्थिति को देखते हुए बच्चों को स्कूल आने से मना कर दिया गया है। बाढ़ का पानी कम होने पर ही स्कूलों का संचालन किया जा सकेगा। -संतोष कुमार देव पांडेय, बीएसए
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करनैलगंज इलाके में घाघरा नदी ने पिछले एक माह से तांडव मचा रखा है। खतरे के निशान से ऊपर बह रही घाघरा नदी के पानी से अब तक इस क्षेत्र के 355 मजरे प्रभावित हो चुके हैं। बाढ़ की इस विभीषिका के चलते आम जनजीवन अस्त व्यस्त है और लोग गांवों से पलायन कर बंधे पर शरण ले चुके हैं।
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इन सबके बीच सबसे खराब स्थिति बेसिक शिक्षा विभाग के परिषदीय स्कूलों की है। बाढ़ के चलते बच्चों की पढ़ाई ठप हो गई है और क्षेत्र के कई स्कूलों में ताला लटक गया है। क्षेत्र के नकहरा, काशीपुर, घरकुंइया, प्रतापपुर, बहुवन मदार मांझा, नन्दौर समेत कई अन्य गांवों के करीब 60 स्कूल बाढ़ के चपेट में आ गए हैं।
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बाढ़ की पानी स्कूलों में घुस गया है। बाढ़ की इस विभीषिका के कारण पिछले एक माह से स्कूल बंद चल रहे हैं। इन स्कूलों के बंद होने से करीब 15 हजार नौनिहालों की पढ़ाई ठप हो गई है। इसी स्थिति परसपुर की भी है।
करनैलगंज से निकलकर बाढ़ का पानी अब परसपुर पहुंचने लगा है। जिससे यहां के भी करीब 10 परिषदीय स्कूल बाढ़ की जद में आ चुके है। प्राथमिक विद्यालय सुकईपुरवा बाढ़ के पानी में डूब गया है। इस स्थिति से निपटने में बेसिक शिक्षा विभाग के अफसर भी अपने को अक्षम पा रहे हैं।
बाढ़ के कारण जो स्कूल प्रभावित हुए हैं उन्हें बंद कर दिया गया है और सुरक्षा की स्थिति को देखते हुए बच्चों को स्कूल आने से मना कर दिया गया है। बाढ़ का पानी कम होने पर ही स्कूलों का संचालन किया जा सकेगा। -संतोष कुमार देव पांडेय, बीएसए