फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gonda News ›   Lock in 20 schools due to lack of teachers

शिक्षकों की कमी से 20 स्कूलों में ताला

Sat, 05 Aug 2017 11:27 PM IST
amar ujala
amar ujala Updated Sat, 05 Aug 2017 11:27 PM IST
विज्ञापन

विज्ञापन
 सरकारी धनराशि की बर्बादी और योजनाओं के क्रियान्वयन की हकीकत देखनी हो तो माध्यमिक शिक्षा विभाग के राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान चले आइए। यहां आठवीं पास होने वाले छात्र छात्राओं को गांव में ही हाईस्कूल तक की शिक्षा दिलाने के लिए 10.38 करोड़ रुपये की लागत से बनवाए गए 20 उच्चीकृत स्कूल बदहाली का शिकार हैं।

शिक्षक न होने के कारण इन स्कूलों में पठन पाठन ठप है और स्कूलों मेें ताला लटक रहा है। 140 के सापेक्ष इन स्कूलों की जिम्मेदारी महज 4 शिक्षकों के जिम्मे पर है। ऐसे में अधिकतर स्कूलों का दायित्व बाब ूव चपरासी संभाल रहे हैं। वहीं विभाग के अफसर कागजों में इनका संचालन दिखाकर वाहवाही लूटने में लगे है।  
विज्ञापन


ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को कक्षा आठ की शिक्षा के बाद आगे की शिक्षा के लिए दूर न जाना पड़े इसके लिए राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के अंतर्गत वर्ष 2009 में स्कूलों को उच्चीकृत करने की योजना की शुरुआत हुई थी। इन स्कूलो में नौवी व दसवीं की शिक्षा दी जानी थी। 51.90 लाख रुपये की लागत से बनवाए गए इन स्कूलों पर 10.38 करोड़ रुपये की धनराशि खर्च की जा चुकी है।
विज्ञापन
विज्ञापन


इन स्कूलों के संचालन के लिए प्रत्येक स्कूल में कम से कम 7 शिक्षकों की तैनाती होनी थी लेकिन 8 साल बीत जाने के बाद भी इनमें शिक्षक नहीं तैनात किए जा सके। उधर माध्यमिक शिक्षा विभाग के अफसरों ने शासन की नजर में वाहवाही लूटने के लिए इनका संचालन तो शुरु करा दिया लेकिन शिक्षकों के अभाव में जल्द ही इन स्कूलों में ताला लटक गया। ऐसे स्कूलों का संचालन ठप होने से यहां नामांकित बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाई करनी पड़ रही है।   

इटियाथाोक ब्लाक के दिखलौल ग्राम पंचायत के बस्ती गांव में बच्चों को हाईस्कूल तक की शिक्षा गांव में देने के लिए वर्ष 2010 में राजकीय हाईस्कूल का निर्माण कराया गया था। इस स्कूल में कहने को तो दो शिक्षक सुभाष चंद्र मौर्या व गंगेश शुक्ला के अलावा एक लिपिक रणवीर सिंह की तैनाती की गई थी लेकिन कुछ ही दिन के बाद इन्हे अलग अलग स्कूलों में संबद्ध कर दिया गया।

वर्तमान समय में सुभाष चंद्र मौर्या के पास इस स्कूल के अलावा राजकीय विद्यालय कोल्हुआ का भी प्रभार है। वहीं गंगेश शुक्ला को मछली बाजार के राजकीय विद्यालय में संबद्ध किया गया है। सबसे बड़ी बात तो यह है यहां के लिपिक रणवीर सिंह को भी बस्ती के अलावा राजकीय विद्यालय गिलौली का भी काम देखना पड़ रहा है। ऐसे में न तो इस स्कूल का ताला खुलता है और न ही यहां के बच्चों की पढ़ाई हो पा रही है।शनिवार  को इस स्कूल में ताला लटक रहा था।  
 
मुजेहना के पेड़ारन गांव में राजकीय बालिका हाईस्कूल का संचालन किया जा रहा है। इस स्कूल की जिम्मेदारी माध्यमिक शिक्षा विभाग के वरिष्ठ शिक्षक सीबी सिंह के पास है लेकिन वह कभी इस स्कूल तक नहीं पहुंचे। शनिवार को इस स्कूल में ताला लटक रहा था।


विद्यालय की खिड़कियां व दरवाजे टूट चुके हैं। यहां के रहने वाले बृजलाल, शिवराम, निबरे व मुन्ना का कहा है कि अगर इस स्कूल मेें शिक्षकों की तैनाती हो जाए तो यहां के बेटियों को हाईस्कूल की शिक्षा के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा।  
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed