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झूठा शपथ पत्र दिखाकर एक ही भूमि पर दो बार लिया लोन, एफआईआर के आदेश
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गोंडा। एसबीआई की मनकापुर शाखा में केसीसी लोन के लिए आवेदन करने वाले किसान ने बैंक अफसरों को झूठा शपथ पत्र दे दिया कि उसने कहीं से लोन नहीं लिया है। मगर इससे पहले वह ग्रामीण बैंक से इसी भूमि पर लोन लिया था। जिसका कर्ज अभी पूरा नहीं हुआ है। मामले में अदालत ने थानाध्यक्ष छपिया को रिपोर्ट दर्ज कराने के आदेश दिए हैं।
भारतीय स्टेट बैंक के अधिवक्ता राजेंद्र सिंह खुराना के मुताबिक भारतीय स्टेट बैंक की शाखा मसकनवा के शाखा प्रबंधक सौरभ चंद्रा ने सिविल जज जूनियर डिवीजर एफटीसी नवीन की अदालत में प्रार्थना पत्र दिया।
जिसमें कहा कि रंजीत सिंह निवासी भिखारीपुर मनकापुर ने अपनी कृषि भूमि पर 14 जून 2014 को उनकी शाखा से 2 लाख 66 हजार का केसीसी ऋण लिया था। इससे पहले रंजीत सिंह ने इसी भूमि पर सर्व यूपी ग्रामीण बैंक की शाखा मसकनवा के पक्ष में बंधक कर एक लाख 98 हजार का केसीसी ऋण ले रखा था।
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शाखा प्रबंधक के मुताबिक रंजीत सिंह ने उनकी शाखा में झूठा शपथ पत्र दिया था, जिसमें कहा कि उसने इससे पहले किसी संस्था से ऋण नहीं लिया है। आरोप है कि रंजीत सिंह ने बैंक में कूटरचित खतौनी दाखिल करके ऋण लेकर धोखाधड़ी किया है।
शाखा प्रबंधक ने थानाध्यक्ष छपिया को मामले में रिपोर्ट दर्ज करने की तहरीर दी। मगर कोई कार्रवाई नहीं हुई। अदालत ने शाखा प्रबंधक के प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए थानाध्यक्ष छपिया को मामले में एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं।
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भारतीय स्टेट बैंक के अधिवक्ता राजेंद्र सिंह खुराना के मुताबिक भारतीय स्टेट बैंक की शाखा मसकनवा के शाखा प्रबंधक सौरभ चंद्रा ने सिविल जज जूनियर डिवीजर एफटीसी नवीन की अदालत में प्रार्थना पत्र दिया।
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जिसमें कहा कि रंजीत सिंह निवासी भिखारीपुर मनकापुर ने अपनी कृषि भूमि पर 14 जून 2014 को उनकी शाखा से 2 लाख 66 हजार का केसीसी ऋण लिया था। इससे पहले रंजीत सिंह ने इसी भूमि पर सर्व यूपी ग्रामीण बैंक की शाखा मसकनवा के पक्ष में बंधक कर एक लाख 98 हजार का केसीसी ऋण ले रखा था।
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शाखा प्रबंधक के मुताबिक रंजीत सिंह ने उनकी शाखा में झूठा शपथ पत्र दिया था, जिसमें कहा कि उसने इससे पहले किसी संस्था से ऋण नहीं लिया है। आरोप है कि रंजीत सिंह ने बैंक में कूटरचित खतौनी दाखिल करके ऋण लेकर धोखाधड़ी किया है।
शाखा प्रबंधक ने थानाध्यक्ष छपिया को मामले में रिपोर्ट दर्ज करने की तहरीर दी। मगर कोई कार्रवाई नहीं हुई। अदालत ने शाखा प्रबंधक के प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए थानाध्यक्ष छपिया को मामले में एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं।