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अवैध खनन में आईओडब्ल्यू के खिलाफ चार्जशीट दाखिल
अमर उजाला/गोंडा
Updated Sat, 15 Oct 2016 10:40 PM IST
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रेलवे की भूमि से हुए अवैध खनन के मामले में रेलवे सुरक्षा बल के अपराध आसूचना विभाग (सीआईबी) ने आईओडब्ल्यू (इंस्पेक्टर ऑफ वर्क्स) को आरोपी बनाते हुए उनके खिलाफ चार्जशीट न्यायालय में दाखिल की है।
रेलवे यार्ड में पड़ने वाली रेलवे की जमीन से छह महीने पहले करीब तीन लाख रुपये की 300 डंपर मिट्टी अवैध तरीके से खोद ली गई थी। ऑयल डिपो के ठेकेदार ने बगैर मिट्टी खनन की अनुमति लिए ही खुदाई करा डाली और उसका उपयोग ऑयल डिपो में कर लिया।
इसकी सूचना जब रेलवे के उच्चाधिकारियों से होते हुए पूर्वोत्तर रेलवे के महाप्रबंधक तक पहुंची तो उन्होंने मामले की जांच के आदेश दे दिए। जिसके लिए लखनऊ आरपीएफ के अपराध आसूचना विभाग के लोगों को गोंडा जांच के लिए भेजा गया।
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विभाग के इंस्पेक्टर केके सिंह व गोंडा में अपराध आसूचना विभाग में तैनात सीआईबी के प्रभारी देवेंद्र प्रताप ने मामले की जांच की। जिसके बाद मामले में ठेकेदार सहित छह लोगों को रेलवे संपत्ति अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया।
जांच में सीआईबी के इंस्पेक्टर ने पुष्टि की थी कि यह काम बिना रेलवे के किसी अधिकारी की मिलीभगत के नहीं हो सकता है। जो आखिरकार सीआईबी अधिकारियों की जांच में सही साबित हुआ।
बतौर सीआईबी प्रभारी देवेंद्र प्रताप उस समय रेलवे स्टेशन पर तैनात आईओडब्ल्यू आरपी चौधरी की भूमिका मामले में संदिग्ध पाई गई है। उनके मुताबिक इस मामले में आईओडब्ल्यू के खिलाफ रेलवे संपत्ति अधिनियम का मामला दर्ज करते हुए पूरी चार्जशीट न्यायालय में दाखिल कर दी गई है। बता दें कि आईओडब्ल्यू आरपी चौधरी का कुछ समय पहले ही यहां से कानपुर तबादला हो चुका है और वर्तमान में वह अनवरगंज रेलवे स्टेशन पर तैनात हैं।
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रेलवे यार्ड में पड़ने वाली रेलवे की जमीन से छह महीने पहले करीब तीन लाख रुपये की 300 डंपर मिट्टी अवैध तरीके से खोद ली गई थी। ऑयल डिपो के ठेकेदार ने बगैर मिट्टी खनन की अनुमति लिए ही खुदाई करा डाली और उसका उपयोग ऑयल डिपो में कर लिया।
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इसकी सूचना जब रेलवे के उच्चाधिकारियों से होते हुए पूर्वोत्तर रेलवे के महाप्रबंधक तक पहुंची तो उन्होंने मामले की जांच के आदेश दे दिए। जिसके लिए लखनऊ आरपीएफ के अपराध आसूचना विभाग के लोगों को गोंडा जांच के लिए भेजा गया।
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विभाग के इंस्पेक्टर केके सिंह व गोंडा में अपराध आसूचना विभाग में तैनात सीआईबी के प्रभारी देवेंद्र प्रताप ने मामले की जांच की। जिसके बाद मामले में ठेकेदार सहित छह लोगों को रेलवे संपत्ति अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया।
जांच में सीआईबी के इंस्पेक्टर ने पुष्टि की थी कि यह काम बिना रेलवे के किसी अधिकारी की मिलीभगत के नहीं हो सकता है। जो आखिरकार सीआईबी अधिकारियों की जांच में सही साबित हुआ।
बतौर सीआईबी प्रभारी देवेंद्र प्रताप उस समय रेलवे स्टेशन पर तैनात आईओडब्ल्यू आरपी चौधरी की भूमिका मामले में संदिग्ध पाई गई है। उनके मुताबिक इस मामले में आईओडब्ल्यू के खिलाफ रेलवे संपत्ति अधिनियम का मामला दर्ज करते हुए पूरी चार्जशीट न्यायालय में दाखिल कर दी गई है। बता दें कि आईओडब्ल्यू आरपी चौधरी का कुछ समय पहले ही यहां से कानपुर तबादला हो चुका है और वर्तमान में वह अनवरगंज रेलवे स्टेशन पर तैनात हैं।