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तालाब पर बने स्कूल को ध्वस्त करने की कार्रवाई शुरू

Tue, 19 Oct 2021 11:12 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 19 Oct 2021 11:12 PM IST
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19द्दस्रड्डश्च19- गोंडा के तालाब की भूमि पर बने स्कूल की जांच करते तहसीलदार सदर - फोटो : GONDA
गोंडा। तालाब की जमीन को विनिमय कराकर स्कूल निर्माण कराने के मामले में नया मोड़ आ गया है। जिलाधिकारी मार्कंडेय शाही ने अवैध निर्माण ध्वस्त किये जाने की कार्रवाई का निर्देश दिया है। इसके साथ ही तालाब की भूमि का विनिमय किये जाने का आदेश भी निरस्त होगा। एसडीएम सदर सूरज पटेल ने तहसील के अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई शुरू करने के आदेश दिये हैं। अब तक कार्रवाई में लापरवाही पर तहसीलदार समेत राजस्व कर्मियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है।
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शहर के गोंडा गिर्द में एम्स इंटरनेशनल स्कूल के निर्माण में भूमि के घपले का मामला उजागर होने के बाद खलबली मची है। स्कूल प्रबंधन की ओर से तालाब की भूमि को विनियम कराने वाले व्यक्ति से आबादी की कार्रवाई पूरी करने के बाद खरीदा गया। जांच में तथ्य सामने आया कि उस भूमि पर स्कूल का निर्माण कराया गया। फिर अवशेष तालाब की भूमि को भी बाउंड्री में करके कब्जा कर लिया गया। उस पर भी स्कूल का निर्माण करा लिया।
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एसडीएम सदर सूरज पटेल को शासन के आदेश पर जांच मिली और उन्होंने पत्रावली का परीक्षण किया तो चौंकाने वाले तथ्य उजागर हुए। किस तरह तालाब की जमीन को कब्जा करने की रणनीति तैयार हुई। फिर उक्त जमीन को कब्जे में लेकर स्कूल निर्माण करा लिया। अवैध तरीके से बनाए गए स्कूल के निर्माण को ध्वस्त करने की कार्रवाई के आदेश जारी हुए हैं। कार्रवाई के लिए तहसीलदार सदर ने निर्माण के स्थिति की जांच किया। बताया जा रहा है कि तहसील में स्कूल के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू हो गई है। साथ ही स्कूल प्रबंधक मतलूब हुसैन खां पर जुर्माना लगा है। इसकी वसूली भी होगी और विधिक कार्रवाई की तैयारी भी है।
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तथ्य छिपाने में तहसीलदार समेत कई फंसे
ज्वाइंट मजिस्ट्रेट एसडीएम सदर सूरज पटेल ने स्कूल की भूमि मामले में मौजूदा तहसीलदार समेत राजस्व कर्मियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। उन्होंने जिलाधिकारी को रिपोर्ट भेजी है। स्पष्ट किया है कि किस तरह तालाब की भूमि पर स्कूल का निर्माण कराया गया। साथ ही तहसीलदार राजीव मोहन सक्सेना, राजस्व निरीक्षक शिव प्रकाश यादव व लेखपाल संतोष कुमार श्रीवास्तव को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। आरोप है कि इन लोगों को स्कूल के भूमि मामले में निर्णय को छुपाने का प्रयास किया। यही नहीं फैसला होने के बाद भी मामला विचाराधीन की रिपोर्ट एसडीएम को भेज दी है। इन लोगों की मिलीभगत स्कूल प्रबंधन होने के संकेत मिल रहे हैं। दो दिवस में स्पष्टीकरण मांगा है, और साफ कहा है कि इसके बाद कार्रवाई कर दी जाएगी।

अधिकारी होते सजग तो बचा रहता तालाब
- तालाब की जमीन पर स्कूल निर्माण में तहसील के अधिकारियों की मिलीभगत स्पष्ट हो गई है। वर्ष 2008 में राजस्व निरीक्षक की ओर से अवैध निर्माण की जानकारी दी गई थी। लेकिन 13 सालों तक अधिकारी आंख मूंदे रहे और निर्माण होता रहा। अब बहुत बड़े स्तर का स्कूल बन गया है। जिलाधिकारी के आदेश के बाद तालाब की विनियम किये जाने की पत्रावली भी खोजी जा रही है। किस आधार पर तालाब की भूमि का विनियम हुआ और राजस्व नियमों की अनदेखी कहां हुई। इसकी जांच होगी। जिसमें तत्कालीन अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ना तय है।
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