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राजकीय विरासत के रूप में सहेजे जाएंगे सौ साल पुराने पेंड़

Tue, 09 Feb 2021 09:53 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 09 Feb 2021 09:53 PM IST
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Hundred years old trees will be saved as heritage
गोंडा कचेहरी में लगा पुराना बरगद का पुराना वृक्ष। - फोटो : GONDA
गोंडा। वृक्षों का समाज में अपना अलग ही महत्व है और सैकड़ों वर्ष पुराने वृक्षों की अलग ही पहचान है। कई वृक्ष तो धार्मिक महत्व के भी है। जिले के ऐसे ही नौ वृक्षों को वन विभाग ने चिन्हित किया है और उनके संरक्षण की पहल शुरू की है।
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पुराने वृक्षों का अस्तित्व बचाने के लिए वन विभाग ने मुहिम शुरू की है। सौ साल से पुराने वृक्षों की खास देखभाल होगी। उन्हें विरासत का दर्जा दिया जाएगा। वन विभाग ऐसे वृक्षों का संरक्षण करेगा। चबूतरा बनाने के साथ ही आसपास सुंदरीकरण होगा।
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जिले में सौ साल से पुराने नौ वृक्ष मिले हैं। कई वृक्ष ऐतिहासिक और धार्मिक आस्था से भी जुड़े हुए हैं। इनमें से कुछ अंग्रेजों के जमाने के हैं। देखरेख न होने से जिलेभर में पुराने वृक्षों का अस्तित्व संकट में हैं।
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कुछ ऐसे भी हैं जो मिटने की कगार पर हैं। शासन ऐसे वृक्षों को संरक्षित करने को लेकर गंभीर है। शासन ने पुराने वृक्षों को विरासत में शामिल करने का निर्देश दिया है। शहरी व ग्रामीण इलाकों में ऐसे वृक्षों को विरासत वृक्ष का दर्जा दिया जाएगा।
ग्राम स्तर पर प्रधान, ग्राम पंचायत, खंड विकास अधिकारी, जिला पंचायत राज अधिकारी, शहरी क्षेत्र में नगर पालिका को ऐसे वृक्षों की सूची तैयार करने को कहा गया है। ऐसे वृक्षों की देखभाल की जाएगी।
आसपास चबूतरा बनाकर सुंदरीकरण किया जाएगा। लखनऊ से आई टीम ने पहले चरण में भ्रमण कर पुराने वृक्षों की सूची तैयार की है। डीएफओ वरुण सिंह ने बताया कि पुराने वृक्षों को विरासत वृक्ष का दर्जा देकर उन्हें संजोया जाएगा।

सौ वर्ष से अधिक पुराने पेड़ों की खोजबीन कर के उन्हें वन विभाग संरक्षित करेगा। इस के लिए वनाधिकारी ने रेंजरों को निर्देश दिया है। वनाधिकारी आरके त्रिपाठी ने बताया कि 100 वर्ष से अधिक पुराने पेड़ पीपल, बरगद हैं। ये पेड़ इतिहास के महत्वपूर्ण घटनाओं के साक्षी है।
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