{"_id":"62bb3d8d9ea2bb66fc31cc7d","slug":"hospital-patient-gonda-news-lko637261272","type":"story","status":"publish","title_hn":"घंटों लगे लाइन, डॉक्टर दे पा रहे सिर्फ एक मिनट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
घंटों लगे लाइन, डॉक्टर दे पा रहे सिर्फ एक मिनट
विज्ञापन
फोटो-8 गोंडा में जिला अस्पताल के आर्थो सर्जन के ओपीडी के बाहर लगी मरीजों की भीड़। -संवाद
- फोटो : GONDA
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गोंडा। जिला अस्पताल में डॉक्टरों के कमी का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। ओपीडी में भीड़ के चलते डॉक्टर मरीजों के इलाज में औसतन एक मिनट का समय ही दे पा रहे हैं, जिससे घंटों लाइन लगने के बाद भी मरीजों के इलाज की महज खानापूर्ति ही हो पाती है। मंगलवार को आर्थो सर्जन ने पांच घंटे की ओपीडी में 288 मरीज देखकर इलाज कर दिया। ऐसे में औसतन एक मिनट में ही जांच रिपोर्ट देखकर प्रत्येक मरीज का इलाज कर दिया गया।
जिला अस्पताल में चिकित्सकों के 44 पद स्वीकृत हैं, जिनके सापेक्ष 28 की नियमित नियुक्ति तथा नौ चिकित्सक आउटसोर्स व पुनर्योजन के तहत सेवा दे रहे हैं। मौसम जनित रोगों के बढ़ते प्रकोप के बीच जिला अस्पताल में मरीजों की भीड़ बढ़ गई है। मंगलवार को 1,723 मरीजों ने पंजीकरण कराया। सबसे अधिक मरीज फिजीशियन व सर्जन की ओपीडी में रही। मंगलवार को आर्थो सर्जन डॉ. अरुण मिश्र ने 288 मरीजों का इलाज किया। करीब पांच घंटे के ओपीडी टाइम में प्रत्येक मरीज की जांच रिपोर्ट देखकर इलाज करने में सिर्फ एक मिनट ही दिया गया। वहीं, फिजीशियन डॉ. समीर गुप्ता ने 150 से अधिक मरीज देखे। डॉ. जितेंद्र मिश्र ने 104 मरीजों का इलाज किया। ऐसे में डॉक्टरों के कमी के चलते ओपीडी में मरीजों का बोझ बढ़ जा रहा है। जिससे डॉक्टर मरीजों के इलाज में समय नहीं दे पा रहे हैं।
जिला अस्पताल में मंगलवार को कौड़िया बाजार से आई मरीज सायरा बानो ने बताया कि सुबह से करीब तीन घंटे लाइन में लगकर ओपीडी में नंबर आया। मगर डॉक्टर ने एक मिनट में ही जांच रिपोर्ट देखकर दवा लिख दी। इसी तरह मरीज के साथ आए तीमारदार राजेश, सोनू और उमेश ने भी कम समय में डॉक्टर के देखने व दवा लिखने की बात कही है।
विज्ञापन
तीन साल से खाली हृदयरोग विशेषज्ञ का पद
जिला अस्पताल में कई विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है। हृदयरोग विभाग से करीब तीन साल पहले हृदयरोग विशेषज्ञ डॉ. जीके सिंह के सेवानिवृत्त होने के बाद विभाग में नियुक्ति नहीं हुई, जबकि हृदयरोग विशेषज्ञ के दो पद रिक्त हैं। वहीं, फिजीशियन के दो पद तथा जनरल सर्जन के दो पद बरसों से रिक्त पड़े हैं। जिससे फिजीशियन व सर्जन की ओपीडी में मरीजों का बोझ बढ़ गया है।
जिला अस्पताल में डॉक्टरों की कमी के चलते ओपीडी में मरीजों का बोझ बढ़ गया है। जिला अस्पताल में डॉक्टरों के 44 पद स्वीकृत हैं। इसके सापेक्ष सिर्फ 28 नियमित डॉक्टर नियुक्त हैं। वहीं, नौ चिकित्सकों को आउटसोर्सिंग के जरिए रखा गया है। शासन को पत्र लिखकर डॉक्टरों के नियुक्ति की मांग की गई है। डॉ. इंदुबाला, प्रमुख अधीक्षक, जिला अस्पताल
इनसेट
जिला अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सों की स्थिति
पदनाम स्वीकृत पद नियुक्ति (नियमित) नियुक्ति (आउटसोर्स)
प्रमुख अधीक्षक एक पद एक (कार्यवाहक) शून्य
चिकित्सा अधीक्षक दो पद एक शून्य
आर्थो सर्जन चार पद तीन शून्य
फिजीशियन चार पद एक एक
जनरल सर्जन चार पद एक एक
एनेस्थेटिस्ट चार पद दो एक
ईएमओ छह पद दो तीन
नेत्र सर्जन तीन पद दो शून्य
चर्मरोग विशेषज्ञ एक पद शून्य शून्य
डेंटल सर्जन दो पद शून्य एक (संबद्ध)
चेस्ट फिजीशियन एक पद शून्य एक (संबद्ध)
रेडियालॉजिस्ट दो पद एक पद शून्य
पैथॉलाजिस्ट तीन दो शून्य
विज्ञापन
जिला अस्पताल में चिकित्सकों के 44 पद स्वीकृत हैं, जिनके सापेक्ष 28 की नियमित नियुक्ति तथा नौ चिकित्सक आउटसोर्स व पुनर्योजन के तहत सेवा दे रहे हैं। मौसम जनित रोगों के बढ़ते प्रकोप के बीच जिला अस्पताल में मरीजों की भीड़ बढ़ गई है। मंगलवार को 1,723 मरीजों ने पंजीकरण कराया। सबसे अधिक मरीज फिजीशियन व सर्जन की ओपीडी में रही। मंगलवार को आर्थो सर्जन डॉ. अरुण मिश्र ने 288 मरीजों का इलाज किया। करीब पांच घंटे के ओपीडी टाइम में प्रत्येक मरीज की जांच रिपोर्ट देखकर इलाज करने में सिर्फ एक मिनट ही दिया गया। वहीं, फिजीशियन डॉ. समीर गुप्ता ने 150 से अधिक मरीज देखे। डॉ. जितेंद्र मिश्र ने 104 मरीजों का इलाज किया। ऐसे में डॉक्टरों के कमी के चलते ओपीडी में मरीजों का बोझ बढ़ जा रहा है। जिससे डॉक्टर मरीजों के इलाज में समय नहीं दे पा रहे हैं।
विज्ञापन
जिला अस्पताल में मंगलवार को कौड़िया बाजार से आई मरीज सायरा बानो ने बताया कि सुबह से करीब तीन घंटे लाइन में लगकर ओपीडी में नंबर आया। मगर डॉक्टर ने एक मिनट में ही जांच रिपोर्ट देखकर दवा लिख दी। इसी तरह मरीज के साथ आए तीमारदार राजेश, सोनू और उमेश ने भी कम समय में डॉक्टर के देखने व दवा लिखने की बात कही है।
विज्ञापन
तीन साल से खाली हृदयरोग विशेषज्ञ का पद
जिला अस्पताल में कई विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है। हृदयरोग विभाग से करीब तीन साल पहले हृदयरोग विशेषज्ञ डॉ. जीके सिंह के सेवानिवृत्त होने के बाद विभाग में नियुक्ति नहीं हुई, जबकि हृदयरोग विशेषज्ञ के दो पद रिक्त हैं। वहीं, फिजीशियन के दो पद तथा जनरल सर्जन के दो पद बरसों से रिक्त पड़े हैं। जिससे फिजीशियन व सर्जन की ओपीडी में मरीजों का बोझ बढ़ गया है।
जिला अस्पताल में डॉक्टरों की कमी के चलते ओपीडी में मरीजों का बोझ बढ़ गया है। जिला अस्पताल में डॉक्टरों के 44 पद स्वीकृत हैं। इसके सापेक्ष सिर्फ 28 नियमित डॉक्टर नियुक्त हैं। वहीं, नौ चिकित्सकों को आउटसोर्सिंग के जरिए रखा गया है। शासन को पत्र लिखकर डॉक्टरों के नियुक्ति की मांग की गई है। डॉ. इंदुबाला, प्रमुख अधीक्षक, जिला अस्पताल
इनसेट
जिला अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सों की स्थिति
पदनाम स्वीकृत पद नियुक्ति (नियमित) नियुक्ति (आउटसोर्स)
प्रमुख अधीक्षक एक पद एक (कार्यवाहक) शून्य
चिकित्सा अधीक्षक दो पद एक शून्य
आर्थो सर्जन चार पद तीन शून्य
फिजीशियन चार पद एक एक
जनरल सर्जन चार पद एक एक
एनेस्थेटिस्ट चार पद दो एक
ईएमओ छह पद दो तीन
नेत्र सर्जन तीन पद दो शून्य
चर्मरोग विशेषज्ञ एक पद शून्य शून्य
डेंटल सर्जन दो पद शून्य एक (संबद्ध)
चेस्ट फिजीशियन एक पद शून्य एक (संबद्ध)
रेडियालॉजिस्ट दो पद एक पद शून्य
पैथॉलाजिस्ट तीन दो शून्य