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अल्ट्रासाउंड के लिए खाली पेट भटकती रहीं गर्भवती महिलाएं, बाहर से ली दवाई
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18द्दस्रड्डश्च4-गोंडा के महिला अस्पताल में इलाज के लिए लाइन में खड़ी महिलाएं।
- फोटो : GONDA
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गोंडा। सरकारी अस्पतालों में मरीजों को नि:शुल्क जांच सुविधा व दवा मुहैया कराने का दावा खोखला साबित हो रहा है। जिला महिला अस्पताल में निशुल्क इलाज करवाने के लिए पहुंचने वाले मरीजों को भटकना पड़ रहा है। शनिवार को महिला अस्पताल में इलाज कराने आई गर्भवती व अन्य महिलाओं की जुटी भीड़ को ओपीडी में डॉक्टर तो मिले लेकिन अल्ट्रासाउंड कक्ष में ताला लटका मिला। अस्पताल में बनी कोविड हेल्प डेस्क पर कर्मचारी नदारद रहा तो रोगी सहायता केंद्र पर भी कर्मचारियों की कुर्सियां खाली दिखी। इसके चलते अल्ट्रासाउंड के लिए खाली पेट जांच कराने पहुंची गर्भवती महिलाओं को घंटों परेशान होना पड़ा।
इटियाथोक से अपनी गर्भवती बहू का इलाज कराने आई रामरती ने बताया कि सुबह से लाइन लगाकर डॉक्टर को दिखाया तो उन्होंने अल्ट्रासाउंड कराने को कहा है। लेकिन यहां अल्ट्रासाउंड नहीं हो रहा है। अस्पताल की एक महिला कर्मी ने कहा कि परेशान मत हो बाहर से जांच करवा देंगे। इलाज कराने आई संगीता ने जांच रजिस्ट्रेशन केंद्र पर बैठी कर्मचारी से अल्ट्रासाउंड न होने के बारे में जानकारी लेना चाही तो उसने सीधा जवाब न देकर अल्ट्रासाउंड कक्ष के लोगों से जानकारी करने की नसीहत दे डाली, जबकि अल्ट्रासाउंड कक्ष में ताला लटका था।
यहां ओपीडी में मरीजों को निशुल्क चिकित्सीय परामर्श तो मिल जाता है लेकिन निजी अस्पतालों की तरह मंहगी जांच व दवाएं बाहर से ही करानी पड़ती हैं। दवा काउंटर से कुछ एक दवाएं देकर बाकी के लिए मरीजों को बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है। शनिवार को दवा वितरण काउंटर में खड़ी अधिकांश महिलाओं को काउंटर से कुछ दवाएं देकर अन्य दवा बाहर से खरीदने की बात कही गयी।
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सप्ताह में तीन दिन ही होता अल्ट्रासाउंड
अल्ट्रा साउंड कक्ष मे ताला लगा होने से जानने पर पता चला कि महिला अस्पताल में मशीन और अन्य संसाधन तो हैं लेकिन कोई रेडियोलाजिस्ट नहीं है। इसलिए दूसरे सीएचसी पर नियुक्त रेडियोलाजिस्ट के सहारे सप्ताह में सिर्फ तीन दिन ही अल्ट्रासाउंड हो पाता है। मनकापुर में तैनात रेडियोलाजिस्ट डॉ एके राय सप्ताह में तीन दिन सोमवार, बुधवार व शुक्रवार को महिला अस्पताल आकर महिलाओं का अल्ट्रासाउंड करते हैं। जबकि हर रोज करीब पांच सौ से अधिक महिलाओं की ओपीडी होती है। इसमें दर्जनों गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड कराने की आवश्यकता होती है।
अस्पताल में रेडियोलाजिस्ट न होने के कारण अल्ट्रासाउंड कराने वालों को समस्या होती है। सीएचसी पर तैनात रेडियोलाजिस्ट के सहारे सोमवार,बुधवार व शुक्रवार को अल्ट्रासाउंड कराया जा रहा है। रेडियोलाजिस्ट के तैनाती की मांग की गई है। अस्पताल में दवाएं भी पर्याप्त मात्रा में है। बाहर से दवा खरीदने की कोई जरूरत नहीं पड़ती।
डॉ. सुषमा सिंह, सीएमएस महिला अस्पताल
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इटियाथोक से अपनी गर्भवती बहू का इलाज कराने आई रामरती ने बताया कि सुबह से लाइन लगाकर डॉक्टर को दिखाया तो उन्होंने अल्ट्रासाउंड कराने को कहा है। लेकिन यहां अल्ट्रासाउंड नहीं हो रहा है। अस्पताल की एक महिला कर्मी ने कहा कि परेशान मत हो बाहर से जांच करवा देंगे। इलाज कराने आई संगीता ने जांच रजिस्ट्रेशन केंद्र पर बैठी कर्मचारी से अल्ट्रासाउंड न होने के बारे में जानकारी लेना चाही तो उसने सीधा जवाब न देकर अल्ट्रासाउंड कक्ष के लोगों से जानकारी करने की नसीहत दे डाली, जबकि अल्ट्रासाउंड कक्ष में ताला लटका था।
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यहां ओपीडी में मरीजों को निशुल्क चिकित्सीय परामर्श तो मिल जाता है लेकिन निजी अस्पतालों की तरह मंहगी जांच व दवाएं बाहर से ही करानी पड़ती हैं। दवा काउंटर से कुछ एक दवाएं देकर बाकी के लिए मरीजों को बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है। शनिवार को दवा वितरण काउंटर में खड़ी अधिकांश महिलाओं को काउंटर से कुछ दवाएं देकर अन्य दवा बाहर से खरीदने की बात कही गयी।
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सप्ताह में तीन दिन ही होता अल्ट्रासाउंड
अल्ट्रा साउंड कक्ष मे ताला लगा होने से जानने पर पता चला कि महिला अस्पताल में मशीन और अन्य संसाधन तो हैं लेकिन कोई रेडियोलाजिस्ट नहीं है। इसलिए दूसरे सीएचसी पर नियुक्त रेडियोलाजिस्ट के सहारे सप्ताह में सिर्फ तीन दिन ही अल्ट्रासाउंड हो पाता है। मनकापुर में तैनात रेडियोलाजिस्ट डॉ एके राय सप्ताह में तीन दिन सोमवार, बुधवार व शुक्रवार को महिला अस्पताल आकर महिलाओं का अल्ट्रासाउंड करते हैं। जबकि हर रोज करीब पांच सौ से अधिक महिलाओं की ओपीडी होती है। इसमें दर्जनों गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड कराने की आवश्यकता होती है।
अस्पताल में रेडियोलाजिस्ट न होने के कारण अल्ट्रासाउंड कराने वालों को समस्या होती है। सीएचसी पर तैनात रेडियोलाजिस्ट के सहारे सोमवार,बुधवार व शुक्रवार को अल्ट्रासाउंड कराया जा रहा है। रेडियोलाजिस्ट के तैनाती की मांग की गई है। अस्पताल में दवाएं भी पर्याप्त मात्रा में है। बाहर से दवा खरीदने की कोई जरूरत नहीं पड़ती।
डॉ. सुषमा सिंह, सीएमएस महिला अस्पताल