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मिट्टी के दीयों से रोशन होंगे घर, लोगों को मिलेगा रोजगार

Fri, 06 Nov 2020 10:18 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 06 Nov 2020 10:18 PM IST
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Homes will be illuminated with clay lamps, people will get employment
गोंडा के प्रजापति पुरम में इलेक्ट्रिक चाक से दिया समेत मिट्टी के बर्तन बनाता कुम्हार। - फोटो : GONDA
करनैलगंज गोंडा। दीप पर्व पर इस बार मिट्टी के दिए की धूम रहेगी। खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग ने 50 कुम्हारों को मिट्टी के दिए बनाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक चाक वितरित किए हैं और वे मिट्टी के दिए बनाकर बाजार में उपलब्ध कराएंगे। माना जा रहा है कि मिट्टी के दिए के प्रयोग से जहां इको फ्रेंडली दिवाली को बढ़ावा मिलेगी, वहीं पर गरीबों को रोजगार भी मिलेगा। मिट्टी के दीयों की मांग भी इस बार बढ़ने की उम्मीद है, कोरोना संकट से लोगों का रुझान स्वदेशी संसाधनों की तरफ हुआ है।
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दीपावली त्योहारों के चलते वैसे तो बाजारों में रौनक बढ़ गई है। इसके साथ ही खादी ग्रामोद्योग विभाग की पहल से गरीब कुम्हारों को भी तरक्की की राह दिखी है। अभी तक मिट्टी के चाक से वह मिट्टी के बर्तन व दीये बनाते थे। अब उन्हें ज्यादा मेहनत नहीं करनी है, सरकार की ओर से इलेक्ट्रानिक चाक दिए गए हैं। 50 कुम्हारों को इलेक्ट्रानिक चाक दिए गए हैं जो अब उसी से मिट्टी के बर्तन और दीये बनाएंगे। इससे कम समय में अधिक दीये बना सकेंगे। कुम्हारी कला को आगे बढ़ाने के लिए हुई इस पहल से लोगों में खुशी है।
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10 करोड़ से अधिक के दीये की दीपावली पर होती है जरूरत
वैसे तो दीपावली पर 10 करोड़ से अधिक के दीपों की जरूरत होती है। इसमें अधिकतर प्रयोग मोमबत्ती का होता है। फिलहाल दोनों स्थिति में स्थानीय स्तर पर लघु उद्योग का कार्य करने वालों को फायदा मिलता है। लेकिन कुम्हारों के पास संसाधन न होने से व्यवसाय आगे नही बढ़ सका। माना जा रहा है कि सीमित क्षेत्रों में ही कुम्हारों की पहुंच हो पाती थी। मिट्टी के दिये चाक से बनाने में ज्यादा समय लगता था। अब इलेक्ट्रानिक चाक से व्यवसाय बढ़ने की उम्मीद है।
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100 करोड़ से अधिक का होता है व्यवसाय
दीपावली पर्व पर बाजार की नजर रहती है। इस दौरान 100 करोड़ से अधिक का व्यवसाय होता है। इसमें दीयों के साथ ही पटाखों व कपड़ों का बाजार भी गुलजार होता है। इस बार स्वदेशी सामानों की मांग बढ़ी है, कोरोना संकट से चीनी सामान बाजार में नही हैं। 90 फीसदी बाजार पर स्वदेशी सामानों का कब्जा रहेगा। उम्मीद हैं इससे स्थानीय स्तर के लोगों को रोजगार के अवसर मिलेगा।

माटी कला को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास किया जा रहा है। विभाग की ओर से 50 कुम्हारों को इलेक्ट्रॉनिक चाक दिया गया है। इससे लोगों को रोजगार बढ़ेगा।
- गजेन्द्र सिंह, सहायक अधिकारी, खादी ग्रामोद्योग विभाग
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