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वक्फ संपत्तियों की जांच के घेरे में 1821 गांव

Thu, 22 Sep 2022 11:06 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 22 Sep 2022 11:06 PM IST
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गोंडा। जिले की वक्फ संपत्तियों में शामिल बंजर, भीटा, ऊसर में दर्ज जमीन को अब वक्फ के घेरे से बाहर निकालकर सार्वजनिक स्वामित्व के तहत जन उपयोगी कार्य में इस्तेमाल लाया जाएगा। वक्फ संपत्तियों की जांच के घेरे में जिले के 1821 राजस्व गांव आएंगे। इस संबंध में जिलाधिकारी की तरफ से संबंधित राजस्व गांवों में अभिलेखों की जांच व मिलान का कार्य चारों एसडीएम को सौंपा गया है। जांच के दौरान सभी राजस्व गांवों के रिकार्ड खंगाल कर मौके पर स्थिति का सर्वे व परीक्षण होगा। एक माह में पूरा होने वाले सर्वे कार्य की रिपोर्ट तैयार कर शासन को सौंपी जाएगी।
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शासन की तरफ से जारी आदेश के बाद गुरुवार को जिलाधिकारी डॉ. उज्जवल कुमार ने चारों तहसीलों के एसडीएम को वक्फ के संपत्तियों का ब्यौरा जुटाने और उनकी स्थिति का आकलन सर्वे व परीक्षण से सुनिश्चित कर इसे राजस्व रिकार्ड में सुव्यवस्थित तरीके से दर्ज कराने का निर्देश दिया है। सर्वे के दौरान सभी राजस्व गांवों के अभिलेखों का मिलान कर मौके पर स्थलीय सर्वे से तस्दीक कर वक्फ में दर्ज जमीनों व संपत्तियां का सत्यापन होगा। जिले में वक्फ की संपत्तियों को लेकर अभी तक स्पष्ट स्थिति नहीं थी। सामान्य संपत्ति (बंजर भूमि, उसर, भीटा आदि) के दर्ज किए जाने की प्रक्रिया का पालन न करके सीधे राजस्व अभिलेखों में दर्ज कराई गई वक्फ संपत्तियों की जांच का कार्य होगा।
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सात अप्रैल 1989 को तत्कालीन सरकार ने एक आदेश जारी करके सामान्य संपत्ति बंजर, भीटा, ऊसर आदि भूमि का इस्तेमाल वक्फ में करने का आदेश जारी किया था। इसमें स्पष्ट किया गया था कि कब्रिस्तान, मस्जिद, ईदगाह आदि यदि सार्वजनिक जमीनों पर हैं तो उस जमीन को वक्फ संपत्ति के रूप में ही दर्ज किया जाएगा। इस आदेश के बाद बंजर, भीटा, ऊसर भूमि भी वक्फ संपत्ति के बतौर दस्तावेजों में दर्ज कर ली गई थी।
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प्रदेश सरकार ने अब इन संपत्तियों के स्वरूप अथवा प्रबंधन में किए गए परिवर्तन से जुड़े शासनादेश को राजस्व कानून के विपरीत घोषित करके 33 साल पुराने आदेश को निरस्त करने का निर्देश दिया है। अभी तक वक्फ में दर्ज न हो पाने के कारण भूमाफिया खाली पड़ी जमीनों का बैनामा कर उस पर कब्जा कर लेते थे। इस पर वक्फ बोर्ड की शिकायत का निस्तारण भी बड़ी चुनौती होता था। सर्वे व परीक्षण के बाद दुरुस्त होने वाले राजस्व अभिलेखों से इस तरह की परेशानी भी काफी हद तक दूर हो सकेगी।
वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण में हुई अनदेखी
शासन से जारी आदेश में कहा गया है कि वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण के नियमों में अनदेखी से संपत्तियों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। सर्वे व परीक्षण के बाद ऐसी संपत्तियों के राजस्व दस्तावेजों को दुरुस्त बनाया जा सकेगा। 1989 के शासनादेश को आधार बना कर बड़ी संख्या में खाली पड़ी जमीनों का प्रबंधन और स्वरूप बदले जाने की शिकायतें भी सामने आई थी। जिले में वक्फ बोर्ड के पास सर्वाधिक जमीनें हैं। सुन्नी वक्फ बोर्ड के पास तो गोंडा व बलरामपुर में वक्फ के नाम पर हजारों एकड़ खाली पड़ी जमीन हैं।

वक्फ संपत्तियों के सर्वे के बारे में शासन से मिले निर्देश पर डीएम की तरफ से सभी एसडीएम को स्थलीय परीक्षण का निर्देश दिया गया है। इस दौरान राजस्व अभिलेखों के आधार पर चिह्नित संपत्तियों का मौके पर ही सीमांकन भी होगा। यह सर्वे व परीक्षण अभियान एक माह में पूरा होगा। गौरव स्वर्णकार, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी
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