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Gonda News: केजीबीवी में बच्चियों को 10 माह बाद भी स्टेशनरी नसीब नहीं
Sun, 30 Nov 2025 11:20 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Sun, 30 Nov 2025 11:20 PM IST
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गोंडा स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय। स्रोत: सोशल मीडिया
गोंडा। अधिकारियों की लापरवाही व आपसी खींचतान के चलते कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय (केजीबीवी) की बालिकाओं को 10 महीने बाद भी पढ़ाई के लिए जरूरी स्टेशनरी और ऊनी कपड़े नसीब नहीं हो सके। ऐसे में जहां आवासीय विद्यालय में बालिकाओं के लिए पढ़ाई-लिखाई का संकट है। वहीं, ठंड में ठिठुरने पर मजबूर हो रही हैं।
जिले में झंझरी, वजीरगंज, करनैलगंज समेत कुल 17 कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय संचालित हैं। यहां आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों को दाखिला देकर पढ़ाई-लिखाई की बेहतर सुविधा देने की व्यवस्था है। इन स्कूलों में हॉस्टल के साथ ही रसोईया, चौकीदार व वार्डन समेत शिक्षकों की तैनाती है। बीएसए समेत अधिकारियों के माध्यम से स्कूल में रहकर पढ़ने वाली बच्चियों की सुरक्षा के इंतजाम किए गए हैं। स्कूल में ही बालिकाओं के खानपान व शिक्षण सामग्री जैसे कॉपी-किताब, पेन पेंसिल और दैनिक उपभोग की सामग्री जैसे साबुन, शैंपू के साथ ही स्वेटर, ट्रैकसूट आदि उपलब्ध कराने के लिए लाखों रुपये आवंटित किए जा चुके हैं। कक्षा छह से आठ तक के विद्यालय को 40-40 हजार और कक्षा 12 तक संचालित विद्यालयों के लिए 1.20 लाख रुपये बजट का प्रावधान है। एक अप्रैल से शुरू होने वाले सत्र से पहले 28 फरवरी तक ही बच्चियों की जरूरतों को पूरा करने के सभी प्रक्रिया पूरी की जानी थी। मगर फरवरी से नवंबर तक करीब 10 माह बीत गए, लेकिन बच्चियों को न तो ऊनी कपड़े नसीब हुए और न ही स्टेशनरी आदि का इंतजाम किया गया।
चौथी बार भी नहीं हो पाया टेंडर
अधिकारियों का कहना है कि शासन स्तर से निर्देश मिलने के बाद अब तक चार बार टेंडर की प्रक्रिया अपनाई जा चुकी है। सामानों की आपूर्ति के लिए जेम पोर्टल पर बिड की जा चुकी है। मगर बार-बार अधिकारियों की ओर से कुछ न कुछ खामियां बताकर निरस्त किया जा रहा है। वहीं, चौथी बार भी बिड निरस्त हो गई। बीएसए अमित कुमार सिंह का कहना है कि एसआईआर की प्रक्रिया चल रही है। केजीबीवी की व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी ली जा रही है। जल्द ही उच्चाधिकारियों से बातचीत कर समस्याएं दूर की जाएंगी।
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तलब की जाएगी रिपोर्ट
टेंडर प्रक्रिया पूरी न होना गंभीर विषय है। नए बीएसए से बातचीत कर हल निकाला जाएगा। स्कूल में कोई असुविधा न हो, इसके लिए रिपोर्ट तलब कर कार्रवाई की जाएगी।
-- रामसागरपति त्रिपाठी, एडी बेसिक, देवीपाटन मंडल
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जिले में झंझरी, वजीरगंज, करनैलगंज समेत कुल 17 कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय संचालित हैं। यहां आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों को दाखिला देकर पढ़ाई-लिखाई की बेहतर सुविधा देने की व्यवस्था है। इन स्कूलों में हॉस्टल के साथ ही रसोईया, चौकीदार व वार्डन समेत शिक्षकों की तैनाती है। बीएसए समेत अधिकारियों के माध्यम से स्कूल में रहकर पढ़ने वाली बच्चियों की सुरक्षा के इंतजाम किए गए हैं। स्कूल में ही बालिकाओं के खानपान व शिक्षण सामग्री जैसे कॉपी-किताब, पेन पेंसिल और दैनिक उपभोग की सामग्री जैसे साबुन, शैंपू के साथ ही स्वेटर, ट्रैकसूट आदि उपलब्ध कराने के लिए लाखों रुपये आवंटित किए जा चुके हैं। कक्षा छह से आठ तक के विद्यालय को 40-40 हजार और कक्षा 12 तक संचालित विद्यालयों के लिए 1.20 लाख रुपये बजट का प्रावधान है। एक अप्रैल से शुरू होने वाले सत्र से पहले 28 फरवरी तक ही बच्चियों की जरूरतों को पूरा करने के सभी प्रक्रिया पूरी की जानी थी। मगर फरवरी से नवंबर तक करीब 10 माह बीत गए, लेकिन बच्चियों को न तो ऊनी कपड़े नसीब हुए और न ही स्टेशनरी आदि का इंतजाम किया गया।
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चौथी बार भी नहीं हो पाया टेंडर
अधिकारियों का कहना है कि शासन स्तर से निर्देश मिलने के बाद अब तक चार बार टेंडर की प्रक्रिया अपनाई जा चुकी है। सामानों की आपूर्ति के लिए जेम पोर्टल पर बिड की जा चुकी है। मगर बार-बार अधिकारियों की ओर से कुछ न कुछ खामियां बताकर निरस्त किया जा रहा है। वहीं, चौथी बार भी बिड निरस्त हो गई। बीएसए अमित कुमार सिंह का कहना है कि एसआईआर की प्रक्रिया चल रही है। केजीबीवी की व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी ली जा रही है। जल्द ही उच्चाधिकारियों से बातचीत कर समस्याएं दूर की जाएंगी।
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तलब की जाएगी रिपोर्ट
टेंडर प्रक्रिया पूरी न होना गंभीर विषय है। नए बीएसए से बातचीत कर हल निकाला जाएगा। स्कूल में कोई असुविधा न हो, इसके लिए रिपोर्ट तलब कर कार्रवाई की जाएगी।