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गैस डीजल पेट्रोल की कीमतों ने मचाया हाहाकार
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गोंडा के इटियाथोक में गैस सिलेंडर छोड़कर चूल्हे पर खाना पकाती महिला।
- फोटो : GONDA
गोंडा। डीजल पेट्रोल व रसोई गैस की बेतहाशा बढ़ती कीमतों ने उपभोक्ताओं की कमर तोड़ दी है। 100 रुपये के करीब पहुंच रही पेट्रोल की कीमतों ने लोगों को रुलाना शुरू कर दिया है। डीजल की बढ़ी कीमत ने आम लोगों के साथ किसानों में भी हलचल मचा दिया है।
बारिश न होने के कारण रबी फसलों की सिंचाई किसानों के लिए को ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ रहा है। डीजल की बढ़ी कीमतों ने खुदरा महंगाई को आसमान पर पहुंचा दिया है। गैस घरेलू गैस सिलेंडर की लगातार बढ़ रहे दाम से उपभोक्ताओं का मोह भंग हो रहा है। स्थिति यहां तक पहुंच गई है कि दो लाख 65 हजार उज्जवला गैस के उपभोक्ताओं में डेढ़ लाख के गैस चूल्हे ठंडे हो चुके हैं।
बीते दस माह में डीजल व पेट्रोल की कीमतों में करीब 20 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हो गई है। जिले में 90 फीसदी सिंचाई डीजल पंपिंग सेटों से की जाती है। करीब पांच लाख ऐसे किसान हैं जो महंगा डीजल खरीदकर फसलों की सिंचाई कर रहे हैं। सब्जी से लेकर अन्य सभी वस्तुओं की आपूर्ति ट्रकों के माध्यम से की जाती है। ट्रांस्पोर्टेशन चार्ज भी बढ़ा दिया गया है।
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टैक्सी के किराए में भी उछाल आ गया है। इसका असर आम लोगों पर पड़ रहा है। मई 2020 में डीजल की कीमत 63 रुपये प्रति लीटर थी वह अब 82 रुपये के करीब पहुंच गई है।
जिले में किसानों की संख्या करीब छह लाख के करीब है। इन किसानों की खेती सिंचाई पर निर्भर है। 90 फीसदी किसानों को फसल की सिंचाई के लिए डीजल पंपिंग सेट का सहारा है। पूरे जिले में धान, गेहूं, मक्का, अरहर, चना, उड़द, गन्ना सहित अन्य फसलें लगाई जाती हैं।
गोंडा जिले की भूमि दोमट, बलुई व मटेरा है। जिले में सिंचन क्षमता में 90 प्रतिशत बोरिंग व डीजल पंपसेट है। इसके अलावा पांच प्रतिशत नहर व पांच प्रतिशत सोलर व बिजली के पंप से सिंचाई की जाती है। किसानों को खरीफ, रबी व जायद की फसलों को बचाने के लिए गहरी सिंचाई की जाती है।
खास कर रबी व जायद में सिंचाई अधिक होती है। किसानों को रबी की फसल जिसमें गेहूं आदि की सिंचाई कम से कम तीन बार तथा अधिकतम चार बार करनी होती है। एक आंकड़े पर गौर करें तो एक हेक्टेयर फसल की सिंचाई के लिए किसानों को एक बार में करीब 20 लीटर डीजल का प्रयोग करना पड़ता है। यानि तीन बार सिंचाई में किसानों को करीब 60 लीटर डीजल लगाना होता है। इसके पहले खेत की सिंचाई कर पलेवा करने में और अधिक डीजल लगाना होता है।
लकड़ी के चूल्हे पर खाना पकाते समय महिलाओं की आंखों को कोई परेशानी न हो और समय से खाना भी मिल सके इसके लिए सरकार ने जिले के 2.65 लाख गरीबों को उज्ज्वला योजना के तहत मुफ्त में गैस कनेक्शन, सिलेंडर व चूल्हा उपलब्ध कराया था। लेकिन गैस की बढ़ती कीमतों ने सब पर पानी फेर दिया है।
वैसे तो जिले में 6.52 लाख घरेलू गैस के उपभोक्ता हैं। इसमें 2.65 लाख उज्जवला योजना के लाभार्थी हैं। उज्जवला योजना के 50 प्रतिशत से अधिक उपभोक्ताओं ने सिलेंडर की रीफिलिंग का कार्य बंद कर दिया है।
इसका कारण गैस सिलेंडर की कीमतों में वृद्धि तथा सब्सिडी बहुत कम होना। महिलाओं का कहना है कि गैस सिलिंडर मिलने के बाद जब रीफिलिंग कराया जाता था उस समय करीब 346 रुपये सब्सिडी मिल जाती थी। ऐसे में आधे दाम पर गैस मिलती थी लेकिन अब मात्र 41.36 रुपये की सब्सिडी आती है।
मौजूदा समय घरेलू गैस सिलिंडर की कीमत 826.50 रुपये है। फरवरी में ही तीन बार गैस के दाम बढ़े हैं। एक फरवरी को 751.50 रुपये में सिलिंडर था। चार फरवरी को 776.50 रुपये तथा 15 फरवरी को 826.50 रुपये हो गया।
गेहूं, गन्ना व धान सहित अन्य फसलों की खेती करने वाले किसान सुनील कुमार, राजेश प्रकाश, राम नरेश ने बताया कि इस महंगाई के लिए किससे कहें, कोई सुनने वाला नहीं है। मजबूरी में डीजल खरीदना ही है वह चाहे पांच सौ रुपये लीटर हो जाए। उपभोक्ता शांति प्रसाद शुक्ल ने कहा कि कीमतों पर नियंत्रण बहुत जरूरी है। यदि यही हाल रहा तो सामान्य व्यक्ति का जीना मुहाल हो जाएगा।
अधिवक्ता देवता प्रसाद तिवारी ने बताया कि कीमतों में उतार चढ़ाव होता रहता है लेकिन अब सरकार को नियंत्रण करने के लिए पहल करनी ही होगी। रिंकू शुक्ला ने कहा कि डीजल पेट्रोल की कीमत में बेतहाशा वृद्धि से सारी वस्तुएं महंगी हो गई हैं। महंगाई चरम पर है।
जब एक लीटर कच्चा तेल 31 रुपये का मिल रहा है तो उसे जनता को 100 रुपये में क्यों बेचा रहा है। उज्जवला योजना की उपभोक्ता शहनाज, विमला देवी व मिथिलेश द्विवेेदी ने बताया कि गैस सिलिंडर बहुत महंगा है। भरवाने के लिए इतना पैसा नहीं है। बीते कई माह से सिलिंडर खाली है। इतनी कमाई नहीं है कि गैस चूल्हे से खाना पकाएं।
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बारिश न होने के कारण रबी फसलों की सिंचाई किसानों के लिए को ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ रहा है। डीजल की बढ़ी कीमतों ने खुदरा महंगाई को आसमान पर पहुंचा दिया है। गैस घरेलू गैस सिलेंडर की लगातार बढ़ रहे दाम से उपभोक्ताओं का मोह भंग हो रहा है। स्थिति यहां तक पहुंच गई है कि दो लाख 65 हजार उज्जवला गैस के उपभोक्ताओं में डेढ़ लाख के गैस चूल्हे ठंडे हो चुके हैं।
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बीते दस माह में डीजल व पेट्रोल की कीमतों में करीब 20 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हो गई है। जिले में 90 फीसदी सिंचाई डीजल पंपिंग सेटों से की जाती है। करीब पांच लाख ऐसे किसान हैं जो महंगा डीजल खरीदकर फसलों की सिंचाई कर रहे हैं। सब्जी से लेकर अन्य सभी वस्तुओं की आपूर्ति ट्रकों के माध्यम से की जाती है। ट्रांस्पोर्टेशन चार्ज भी बढ़ा दिया गया है।
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टैक्सी के किराए में भी उछाल आ गया है। इसका असर आम लोगों पर पड़ रहा है। मई 2020 में डीजल की कीमत 63 रुपये प्रति लीटर थी वह अब 82 रुपये के करीब पहुंच गई है।
जिले में किसानों की संख्या करीब छह लाख के करीब है। इन किसानों की खेती सिंचाई पर निर्भर है। 90 फीसदी किसानों को फसल की सिंचाई के लिए डीजल पंपिंग सेट का सहारा है। पूरे जिले में धान, गेहूं, मक्का, अरहर, चना, उड़द, गन्ना सहित अन्य फसलें लगाई जाती हैं।
गोंडा जिले की भूमि दोमट, बलुई व मटेरा है। जिले में सिंचन क्षमता में 90 प्रतिशत बोरिंग व डीजल पंपसेट है। इसके अलावा पांच प्रतिशत नहर व पांच प्रतिशत सोलर व बिजली के पंप से सिंचाई की जाती है। किसानों को खरीफ, रबी व जायद की फसलों को बचाने के लिए गहरी सिंचाई की जाती है।
खास कर रबी व जायद में सिंचाई अधिक होती है। किसानों को रबी की फसल जिसमें गेहूं आदि की सिंचाई कम से कम तीन बार तथा अधिकतम चार बार करनी होती है। एक आंकड़े पर गौर करें तो एक हेक्टेयर फसल की सिंचाई के लिए किसानों को एक बार में करीब 20 लीटर डीजल का प्रयोग करना पड़ता है। यानि तीन बार सिंचाई में किसानों को करीब 60 लीटर डीजल लगाना होता है। इसके पहले खेत की सिंचाई कर पलेवा करने में और अधिक डीजल लगाना होता है।
लकड़ी के चूल्हे पर खाना पकाते समय महिलाओं की आंखों को कोई परेशानी न हो और समय से खाना भी मिल सके इसके लिए सरकार ने जिले के 2.65 लाख गरीबों को उज्ज्वला योजना के तहत मुफ्त में गैस कनेक्शन, सिलेंडर व चूल्हा उपलब्ध कराया था। लेकिन गैस की बढ़ती कीमतों ने सब पर पानी फेर दिया है।
वैसे तो जिले में 6.52 लाख घरेलू गैस के उपभोक्ता हैं। इसमें 2.65 लाख उज्जवला योजना के लाभार्थी हैं। उज्जवला योजना के 50 प्रतिशत से अधिक उपभोक्ताओं ने सिलेंडर की रीफिलिंग का कार्य बंद कर दिया है।
इसका कारण गैस सिलेंडर की कीमतों में वृद्धि तथा सब्सिडी बहुत कम होना। महिलाओं का कहना है कि गैस सिलिंडर मिलने के बाद जब रीफिलिंग कराया जाता था उस समय करीब 346 रुपये सब्सिडी मिल जाती थी। ऐसे में आधे दाम पर गैस मिलती थी लेकिन अब मात्र 41.36 रुपये की सब्सिडी आती है।
मौजूदा समय घरेलू गैस सिलिंडर की कीमत 826.50 रुपये है। फरवरी में ही तीन बार गैस के दाम बढ़े हैं। एक फरवरी को 751.50 रुपये में सिलिंडर था। चार फरवरी को 776.50 रुपये तथा 15 फरवरी को 826.50 रुपये हो गया।
गेहूं, गन्ना व धान सहित अन्य फसलों की खेती करने वाले किसान सुनील कुमार, राजेश प्रकाश, राम नरेश ने बताया कि इस महंगाई के लिए किससे कहें, कोई सुनने वाला नहीं है। मजबूरी में डीजल खरीदना ही है वह चाहे पांच सौ रुपये लीटर हो जाए। उपभोक्ता शांति प्रसाद शुक्ल ने कहा कि कीमतों पर नियंत्रण बहुत जरूरी है। यदि यही हाल रहा तो सामान्य व्यक्ति का जीना मुहाल हो जाएगा।
अधिवक्ता देवता प्रसाद तिवारी ने बताया कि कीमतों में उतार चढ़ाव होता रहता है लेकिन अब सरकार को नियंत्रण करने के लिए पहल करनी ही होगी। रिंकू शुक्ला ने कहा कि डीजल पेट्रोल की कीमत में बेतहाशा वृद्धि से सारी वस्तुएं महंगी हो गई हैं। महंगाई चरम पर है।
जब एक लीटर कच्चा तेल 31 रुपये का मिल रहा है तो उसे जनता को 100 रुपये में क्यों बेचा रहा है। उज्जवला योजना की उपभोक्ता शहनाज, विमला देवी व मिथिलेश द्विवेेदी ने बताया कि गैस सिलिंडर बहुत महंगा है। भरवाने के लिए इतना पैसा नहीं है। बीते कई माह से सिलिंडर खाली है। इतनी कमाई नहीं है कि गैस चूल्हे से खाना पकाएं।