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पांच लाख आबादी बाढ़ की चपेट में
अमर उजाला/बलरामपुर
Updated Fri, 29 Jul 2016 11:42 PM IST
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सड़क पर भरा पानी
- फोटो : अमर उजाला
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जिले में राप्ती नदी का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। शुक्रवार को 80 गांव और बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। इससे बाढ़ प्रभावित गांवों की संख्या बढ़कर 250 पहुंच गई है। बाढ़ पीड़ित घरों की छतों तथा सड़क के किनारे रहने को विवश हैं। बाढ़ का पानी भर जाने से कई मार्गों पर आवागमन पूरी तरह से ठप हो गया है।
बाढ़ के चलते करीब पांच लाख आबादी प्रभावित हैं। लोग गांव तथा घर छोड़कर खुद ही सुरक्षित स्थानों पर जा रहे हैं। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में टीमें भेजकर राहत व बचाव का काम शुरू तो किया है, लेकिन सभी पीड़ितों को राहत नहीं मिल पा रही है। नदी के जलस्तर में तेजी से वृद्धि हो रही है।
शुक्रवार को नदी का जलस्तर खतरे के निशान 104.620 मीटर से 53 सेमी ऊपर 105.150 मीटर पहुंच गया है। नगर मुख्यालय के चारों तरफ भी बाढ़ का पानी भरने लगा है। नगर के लोग भी बाढ़ के खौफ से डरे हुए हैं। वहीं, प्रशासन अभी तक बाढ़ से मात्र 146 गांवों को ही प्रभावित मान रहा है।
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बीते चार दिनों से राप्ती नदी लगातार कहर बरपा रही है। सदर, तुलसीपुर तथा उतरौला तहसील के करीब 250 गांव बाढ़ की चपेट में हैं। पतझी, चेतरापुरवा, बेलहा, चुचुहिया, बाघाजोत, पाला, पाली, चंदापुर, पचौथा, भुसैलवा, रजवापुर, सिंघवापुर, मुड़िला, नौबस्ता व कठेर समेत करीब 150 गांवों के लोग या तो छतों पर शरण लिए है या फिर परिवार सहित सड़क के किनारे डेरा डाले हैं।
तुलसीपुर तहसील का संपर्क नेशनल हाईवे बौद्घ परिपथ बेलहा डिप पर पानी भरने के कारण मुख्यालय से कट गया। हरिहरगंज-ललिया, महराजगंज-ललिया, गौरा चौराहा-तुलसीपुर व बेलहा-गौरा मार्ग पर बाढ़ के चलते आवागमन बुरी तरह से प्रभावित हैं।
बाढ़ प्रभावित करीब 80 गांवों में लोगों के घरों में पानी भरने से चूल्हे बुझ गए हैं। इन लोगों के समक्ष भोजन का संकट उत्पन्न हो गया है। चेतरापुरवा निवासी मोल्हू तथा बड़कऊ के परिवार के करीब 14 लोग बाढ़ के पानी में फंसे हैं। इन लोगों के घर से निकलने का कोई साधन नहीं मिल रहा है। हजारों एकड़ फसल पानी में डूब जाने से मवेशियों के समक्ष भी भोजन का संकट खड़ा हो गया है।
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बाढ़ के चलते करीब पांच लाख आबादी प्रभावित हैं। लोग गांव तथा घर छोड़कर खुद ही सुरक्षित स्थानों पर जा रहे हैं। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में टीमें भेजकर राहत व बचाव का काम शुरू तो किया है, लेकिन सभी पीड़ितों को राहत नहीं मिल पा रही है। नदी के जलस्तर में तेजी से वृद्धि हो रही है।
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शुक्रवार को नदी का जलस्तर खतरे के निशान 104.620 मीटर से 53 सेमी ऊपर 105.150 मीटर पहुंच गया है। नगर मुख्यालय के चारों तरफ भी बाढ़ का पानी भरने लगा है। नगर के लोग भी बाढ़ के खौफ से डरे हुए हैं। वहीं, प्रशासन अभी तक बाढ़ से मात्र 146 गांवों को ही प्रभावित मान रहा है।
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बीते चार दिनों से राप्ती नदी लगातार कहर बरपा रही है। सदर, तुलसीपुर तथा उतरौला तहसील के करीब 250 गांव बाढ़ की चपेट में हैं। पतझी, चेतरापुरवा, बेलहा, चुचुहिया, बाघाजोत, पाला, पाली, चंदापुर, पचौथा, भुसैलवा, रजवापुर, सिंघवापुर, मुड़िला, नौबस्ता व कठेर समेत करीब 150 गांवों के लोग या तो छतों पर शरण लिए है या फिर परिवार सहित सड़क के किनारे डेरा डाले हैं।
तुलसीपुर तहसील का संपर्क नेशनल हाईवे बौद्घ परिपथ बेलहा डिप पर पानी भरने के कारण मुख्यालय से कट गया। हरिहरगंज-ललिया, महराजगंज-ललिया, गौरा चौराहा-तुलसीपुर व बेलहा-गौरा मार्ग पर बाढ़ के चलते आवागमन बुरी तरह से प्रभावित हैं।
बाढ़ प्रभावित करीब 80 गांवों में लोगों के घरों में पानी भरने से चूल्हे बुझ गए हैं। इन लोगों के समक्ष भोजन का संकट उत्पन्न हो गया है। चेतरापुरवा निवासी मोल्हू तथा बड़कऊ के परिवार के करीब 14 लोग बाढ़ के पानी में फंसे हैं। इन लोगों के घर से निकलने का कोई साधन नहीं मिल रहा है। हजारों एकड़ फसल पानी में डूब जाने से मवेशियों के समक्ष भी भोजन का संकट खड़ा हो गया है।