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Gonda News: महज 25 समितियों पर ही बंटी खाद
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साधन सहकारी समिति जानकीनगर इटियाथोक में खाद के लिए लगी भीड़। स्रोत: सोशल मीडिया
मसकनवा/इटियाथोक/धानेपुर (गोंडा)। कृषि विभाग जिले में 92 समितियों पर खाद वितरण का दावा कर रहा है, लेकिन बृहस्पतिवार को मात्र 25 समितियों पर ही खाद बांटी गई। इसके पीछे कर्मचारियों आदि की कमी बताई जा रही है।
बहुउद्देशीय प्राथमिक ग्रामीण साधन सहकारी समिति जानकीनगर में बृहस्पतिवार सुबह छह बजे सचिव ने खाद वितरण शुरू कर दिया। थोड़ी देर में ही यहां किसानों की कतार लग गई। भीड़ देख सचिव ने दो घंटे बाद वितरण का काम बंद कर दिया। ग्राम संझवल के प्रमोद तिवारी व भगवान दीन ने बताया कि कई दिनों से वह यूरिया के लिए परेशान हैं। जनकौरा के जंगली, महादेवा कलां के जब्बार ने बताया कि लाइन लगाने के बाद भी खाद नहीं मिली।
साधन सहकारी समिति वीरापुर में बृहस्पतिवार को 700, कर्मा में 150, सिसई रानीपुर में 150 बोरी यूरिया खाद का वितरण किया गया। एडीओ सहकारिता राम सजीवन पांडेय ने बताया कि समितियों पर खाद उपलब्ध कराकर किसानों में वितरण कराने का पूरा प्रयास किया जा रहा है।
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मुजेहना विकास खंड के बी पैक्स त्रिलोकपुर (समिति) पर खाद डंप होने के बावजूद भी बृहस्पतिवार को वितरण नहीं किया गया। किसान अतवारी लाल, जोखू, चेलाराम, राम विश्वास, अवध पथ सिंह ने बताया कि सुबह छह बजे से लाइन में लगे थे, दोपहर 12 बजे पता चला कि खाद नहीं बंटेगी। करीब एक बजे एक व्यक्ति ने आकर पोस्टर लगाया कि पुलिस बल न मिलने के कारण यूरिया का वितरण नहीं होगा। सचिव अशोक गुप्ता ने बताया कि 300 बोरी यूरिया मौजूद है। पुलिस बल न मिलने के कारण वितरण नहीं हुआ है। धानेपुर समिति के सचिव रामभवन व माधवगंज समिति के सचिव दिवाकर तिवारी ने बताया कि खाद नहीं है।
खाद के इंतजार में सुबह से दोपहर हो गई...
गौरा चौकी (गोंडा)। बभनजोत के अंतर्गत बी पैक्स प्राथमिक साधन सहकारी समिति कस्बा खास गौरा बुजुर्ग में बृहस्पतिवार को यूरिया का वितरण किया गया। किसान सूरज ने बताया कि यूरिया के लिए आए हैं, लेकिन अभी तक खाद नहीं मिल पाई है। हबीबुल्लाह ने बताया कि सुबह से लाइन में लगे हैं। एक बज रहे हैं, लेकिन अभी नंबर नहीं लगा है। किसान राम सवेरे, हिसामुद्दीन में बताया कि वह सुबह से लाइन में लगे हैं। पहले लाइन सड़क पर लगी थी, अब पीछे बाग में लगा दी गई है। समिति के सचिव विश्राम मिश्रा ने बताया कि किसानों को यूरिया का वितरण किया जा रहा है।
अधिक यूरिया लेने वाले 20 किसानों की जांच शुरू, बढ़ेगी मुश्किल
गोंडा। खाद के संकट को लेकर मचे हंगामे के बीच कृषि विभाग के अफसरों ने जिले में सबसे अधिक यूरिया लेने वाले 20 किसानों को खोजा है। इसमें 19 किसानों ने सहकारी समितियों व एक ने निजी दुकान से खाद ली है। टीमों को लगाकर यह पता कराया जा रहा है कि इन किसानों के पास कितने बीघे की खेती है। उसके सापेक्ष कितनी खाद की आवश्यकता थी। इससे अधिक मात्रा में यूरिया लेने की क्या वजह रही। इन तथ्यों की जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।
जिला कृषि अधिकारी सीपी सिंह ने बताया कि जिले में खाद की कोई कमी नहीं है। गत वर्ष के सापेक्ष इस बार 13 हजार मीट्रिक टन अधिक यूरिया का वितरण किया गया है। इसके बाद भी किल्लत की शिकायतों पर जांच कराई गई। इसमें पाया गया कि धान की फसल में प्रति हेक्टेयर पांच बैग यूरिया की आवश्यकता होती है, लेकिन यहां पर किसानों ने दस से 12 बैग यूरिया का प्रयोग किया है। गन्ने में सात बैग के सापेक्ष 15 से 18 बैग यूरिया का प्रयोग किया गया।
किसानों ने अफसरों को बताया कि बारिश के बाद यूरिया डालने से फसल हरी रहती है। ऐसे में जितनी बार बारिश हुई, उतनी बार यूरिया का प्रयोग किया गया। वहीं, कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अधिक यूरिया के प्रयोग से धूप निकलने के बाद फसलों को नुकसान होता है। जिला गन्ना अधिकारी सुनील कुमार सिंह ने बताया कि गन्ने की खड़ी फसल में जून के बाद यूरिया का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए।
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बहुउद्देशीय प्राथमिक ग्रामीण साधन सहकारी समिति जानकीनगर में बृहस्पतिवार सुबह छह बजे सचिव ने खाद वितरण शुरू कर दिया। थोड़ी देर में ही यहां किसानों की कतार लग गई। भीड़ देख सचिव ने दो घंटे बाद वितरण का काम बंद कर दिया। ग्राम संझवल के प्रमोद तिवारी व भगवान दीन ने बताया कि कई दिनों से वह यूरिया के लिए परेशान हैं। जनकौरा के जंगली, महादेवा कलां के जब्बार ने बताया कि लाइन लगाने के बाद भी खाद नहीं मिली।
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साधन सहकारी समिति वीरापुर में बृहस्पतिवार को 700, कर्मा में 150, सिसई रानीपुर में 150 बोरी यूरिया खाद का वितरण किया गया। एडीओ सहकारिता राम सजीवन पांडेय ने बताया कि समितियों पर खाद उपलब्ध कराकर किसानों में वितरण कराने का पूरा प्रयास किया जा रहा है।
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मुजेहना विकास खंड के बी पैक्स त्रिलोकपुर (समिति) पर खाद डंप होने के बावजूद भी बृहस्पतिवार को वितरण नहीं किया गया। किसान अतवारी लाल, जोखू, चेलाराम, राम विश्वास, अवध पथ सिंह ने बताया कि सुबह छह बजे से लाइन में लगे थे, दोपहर 12 बजे पता चला कि खाद नहीं बंटेगी। करीब एक बजे एक व्यक्ति ने आकर पोस्टर लगाया कि पुलिस बल न मिलने के कारण यूरिया का वितरण नहीं होगा। सचिव अशोक गुप्ता ने बताया कि 300 बोरी यूरिया मौजूद है। पुलिस बल न मिलने के कारण वितरण नहीं हुआ है। धानेपुर समिति के सचिव रामभवन व माधवगंज समिति के सचिव दिवाकर तिवारी ने बताया कि खाद नहीं है।
खाद के इंतजार में सुबह से दोपहर हो गई...
गौरा चौकी (गोंडा)। बभनजोत के अंतर्गत बी पैक्स प्राथमिक साधन सहकारी समिति कस्बा खास गौरा बुजुर्ग में बृहस्पतिवार को यूरिया का वितरण किया गया। किसान सूरज ने बताया कि यूरिया के लिए आए हैं, लेकिन अभी तक खाद नहीं मिल पाई है। हबीबुल्लाह ने बताया कि सुबह से लाइन में लगे हैं। एक बज रहे हैं, लेकिन अभी नंबर नहीं लगा है। किसान राम सवेरे, हिसामुद्दीन में बताया कि वह सुबह से लाइन में लगे हैं। पहले लाइन सड़क पर लगी थी, अब पीछे बाग में लगा दी गई है। समिति के सचिव विश्राम मिश्रा ने बताया कि किसानों को यूरिया का वितरण किया जा रहा है।
अधिक यूरिया लेने वाले 20 किसानों की जांच शुरू, बढ़ेगी मुश्किल
गोंडा। खाद के संकट को लेकर मचे हंगामे के बीच कृषि विभाग के अफसरों ने जिले में सबसे अधिक यूरिया लेने वाले 20 किसानों को खोजा है। इसमें 19 किसानों ने सहकारी समितियों व एक ने निजी दुकान से खाद ली है। टीमों को लगाकर यह पता कराया जा रहा है कि इन किसानों के पास कितने बीघे की खेती है। उसके सापेक्ष कितनी खाद की आवश्यकता थी। इससे अधिक मात्रा में यूरिया लेने की क्या वजह रही। इन तथ्यों की जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।
जिला कृषि अधिकारी सीपी सिंह ने बताया कि जिले में खाद की कोई कमी नहीं है। गत वर्ष के सापेक्ष इस बार 13 हजार मीट्रिक टन अधिक यूरिया का वितरण किया गया है। इसके बाद भी किल्लत की शिकायतों पर जांच कराई गई। इसमें पाया गया कि धान की फसल में प्रति हेक्टेयर पांच बैग यूरिया की आवश्यकता होती है, लेकिन यहां पर किसानों ने दस से 12 बैग यूरिया का प्रयोग किया है। गन्ने में सात बैग के सापेक्ष 15 से 18 बैग यूरिया का प्रयोग किया गया।
किसानों ने अफसरों को बताया कि बारिश के बाद यूरिया डालने से फसल हरी रहती है। ऐसे में जितनी बार बारिश हुई, उतनी बार यूरिया का प्रयोग किया गया। वहीं, कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अधिक यूरिया के प्रयोग से धूप निकलने के बाद फसलों को नुकसान होता है। जिला गन्ना अधिकारी सुनील कुमार सिंह ने बताया कि गन्ने की खड़ी फसल में जून के बाद यूरिया का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए।