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कटान तेज, नदी में समा रहे खेत व बाग
अमर उजाला/बलरामपुर
Updated Thu, 21 Jul 2016 10:40 PM IST
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कटान करती नदी
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राप्ती नदी का जलस्तर गुरुवार को खतरे के निशान के करीब पहुंचकर घटने लगा है। जलस्तर घटने से जहां एक तरफ प्रशासन को बाढ़ की आशंका से राहत मिली है, वहीं दूसरी तरफ नदी ने तटवर्ती गांवों में कटान तेज कर दी है। लोगों के खेत व बाग नदी में समाहित हो रहे हैं। कटान की दहशत के चलते कई गांवों के लोग अपना आशियाना छोड़कर पलायन कर रहे हैं। प्रशासनिक राहत व बचाव कार्य का आलम यह है कि महज प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर अधिकारी पीड़ितों को आश्वासन की घुट्टी पिला रहे हैं।
बीते दिनों लगातार हुई बारिश के चलते बुधवार को राप्ती नदी का जलस्तर लाल निशान के करीब पहुंच गया था। गुरुवार को बारिश नहीं हुई तथा राप्ती का जलस्तर भी घटने लगा है। जलस्तर घटने से प्रशासन ने तो राहत की सांस ली है, लेकिन तटवर्ती गांव के लोग नदी की कटान से दहशत में है। सदर तहसील के चौका कला, चौका खुर्द, टेंगनहिया मानकोट, सेमरहना, जबदहा, जबदही व कटरा शंकर नगर आदि गांवों के पास नदी की कटान तेज हो गई है।
उतरौला तहसील क्षेत्र में मनियारिया, खम्हरिया, लखमा, चुचुइया, मंझारी, चंदापुर, बभनजोत, बाघाजोत, परसौना आदि गांवों के पास भी नदी की कटान तेज हो गई है। रामसूरत, शिव कुमार, नागेंद्र, शिवचरन, मेहताब, इलियास तथा अजय सिंह आदि ने बताया कि कटान रोकने के लिए प्रभावी कदम न उठाये जाने के कारण प्रभावित गांवों में भारी नुकसान हो रहा है। लोगों के खेत तथा बाग नदी में समाहित हो रहे हैं। परसौना गांव का अस्तित्व ही कटान के चलते संकट में पड़ गया है।
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उधर, पहाड़ी नालों के उफान के चलते महराजगंज तराई-ललिया मार्ग पर आवागमन अभी भी प्रभावित है। गौरिया, हेंगहा, खरझार तथा धोबैनिया नाले के पानी से हजारों एकड़ फसल डूब गई है। गुुरुवार को एसडीएम तुलसीपुर एसके त्रिपाठी ने पिपरा, नौबस्ता, पिपरिहा जमुनी, नरचहवा, बरगदहा सोहना, कुटी रमतलहा, ललभरिया व मल्दा आदि बाढ़ प्रभावित गांवों का दौराकर स्थिति की जानकारी ली तथा बचाव के आवश्यक कदम उठाने की बात कही। एसडीएम ने अपनी रिपोर्ट अग्रिम कार्रवाई के लिए डीएम को भेज दी है।
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बीते दिनों लगातार हुई बारिश के चलते बुधवार को राप्ती नदी का जलस्तर लाल निशान के करीब पहुंच गया था। गुरुवार को बारिश नहीं हुई तथा राप्ती का जलस्तर भी घटने लगा है। जलस्तर घटने से प्रशासन ने तो राहत की सांस ली है, लेकिन तटवर्ती गांव के लोग नदी की कटान से दहशत में है। सदर तहसील के चौका कला, चौका खुर्द, टेंगनहिया मानकोट, सेमरहना, जबदहा, जबदही व कटरा शंकर नगर आदि गांवों के पास नदी की कटान तेज हो गई है।
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उतरौला तहसील क्षेत्र में मनियारिया, खम्हरिया, लखमा, चुचुइया, मंझारी, चंदापुर, बभनजोत, बाघाजोत, परसौना आदि गांवों के पास भी नदी की कटान तेज हो गई है। रामसूरत, शिव कुमार, नागेंद्र, शिवचरन, मेहताब, इलियास तथा अजय सिंह आदि ने बताया कि कटान रोकने के लिए प्रभावी कदम न उठाये जाने के कारण प्रभावित गांवों में भारी नुकसान हो रहा है। लोगों के खेत तथा बाग नदी में समाहित हो रहे हैं। परसौना गांव का अस्तित्व ही कटान के चलते संकट में पड़ गया है।
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उधर, पहाड़ी नालों के उफान के चलते महराजगंज तराई-ललिया मार्ग पर आवागमन अभी भी प्रभावित है। गौरिया, हेंगहा, खरझार तथा धोबैनिया नाले के पानी से हजारों एकड़ फसल डूब गई है। गुुरुवार को एसडीएम तुलसीपुर एसके त्रिपाठी ने पिपरा, नौबस्ता, पिपरिहा जमुनी, नरचहवा, बरगदहा सोहना, कुटी रमतलहा, ललभरिया व मल्दा आदि बाढ़ प्रभावित गांवों का दौराकर स्थिति की जानकारी ली तथा बचाव के आवश्यक कदम उठाने की बात कही। एसडीएम ने अपनी रिपोर्ट अग्रिम कार्रवाई के लिए डीएम को भेज दी है।