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सीबीएसई 250 रुपये और यूपी बोर्ड 47 रुपये में करा रहा ड्यूटी
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गोंडा। महंगाई से हर किसी का हाल- बेहाल है। यूपी बोर्ड शिक्षकों को मामूली पारिश्रमिक पर ही कार्य ले रहा है। सीबीएसई बोर्ड वाहन भत्ता व जलपान पर 250 रुपये खर्च करता है। माध्यमिक शिक्षा विभाग 47 रुपये में ही कार्य करा रहा है। इसी में केंद्र तक आना हैं और दोपहर में नाश्ता भी करना है। यह हाल तब है जब यूपी बोर्ड ने फीस बढ़ा ली है। लेकिन शिक्षकों के ड्यूटी भत्ता में बढ़ोत्तरी नहीं की है। शिक्षकों के पारिश्रमिक में भी साल 2019 के बाद नहीं बढ़ाया गया है। मनरेगा श्रमिकों से भी कम पारिश्रमिक तय है। यही नहीं साल 2019- 20 में मूल्यांकन के पारिश्रमिक का 15 लाख रुपये आज भी शिक्षकों का बकाया है। जिसके शिक्षक लगातार मांग कर रहे हैं।
यूपी बोर्ड की फीस बढ़ी, लेकिन पारिश्रमिक नहीं
पेट्रोल के दाम बढ़े, महंगाई बढ़ी लेकिन शिक्षकों का पारिश्रमिक नहीं बढ़ा। शिक्षकों का दावा है कि यूपी बोर्ड में कक्ष निरीक्षक की ड्यूटी करने से लेकर कॉपियां जांचने तक में पारिश्रमिक कम है। यूपी बोर्ड परीक्षा की ड्यूटी करने वाले शिक्षकों का पारिश्रमिक बहुत कम है। एक पाली की ड्यूटी का 48 रुपये दिया जाता है। शासन ने 2019 में पारिश्रमिक बढ़ाया था। वर्ष 2019 से पहले 2015 में और इससे पहले 2013 में पारिश्रमिक बढ़ाया गया। शिक्षक नेताओं का कहना है कि वर्ष 2013 में 20 वर्षों बाद दरें बढ़ाई गईं। लिहाजा अब भी दरें बहुत कम हैं। वर्ष 2019 में कॉपियां जांचने के लिए हाईस्कूल में प्रति कॉपी आठ से बढ़ाकर 11 रुपये और इंटरमीडिएट में 11 से बढ़ाकर 13 रुपये किया। सीबीएसई 25 रुपये प्रति कॉपी देता है। वर्ष 2019 में यूपी बोर्ड ने पहली बार मूल्यांकन केंद्रों पर 20 रुपये की दर से जलपान व्यय तय किया। शिक्षक नेता अजीत सिंह कहते हैं कि एक चाय के दाम 10 रुपये हो चुके हैं तब ये दरें बहुत कम है। कम पैसे में कोई दोपहर में नाश्ता कैसे कर सकेगा। इसी तरह वाहन भत्ता 27 रुपये है, इसमें रिक्शा तक नहीं मिलता। जबकि सीबीएसई 250 रुपये देता है। इस तरह शिक्षकों को ड्यूटी भी करनी पड़ेगी और नाश्ते के लिए भी तरसना होगा। ज्यादा से ज्यादा एक चाय और बिस्कुट ही खाकर पूरे दिन कॉपियां जांचेंगे।
ड्यूटी का पारिश्रमिक देने में भी आनाकानी
जिले में साल 2019 में शिक्षकों ने कॉपियों का मूल्यांकन किया था। उसमें शहीदे आजम भगत सिंह इंटर कॉलेज में ड्यूटी किए शिक्षकों का 10 लाख रुपये और श्रीगांधी इंटर कॉलेज रेलवे कॉलोनी में ड्यूटी किए शिक्षकों का पांच लाख रूपये बकाया है। उन्हें दो सालों में भुगतान नहीं किया गया है। अब फिर मूल्यांकन की तैयारियां हो रहीं हैं, कॉपियां भी आ गईं हैं और परीक्षकों की ड्यूटी भी लग रही है। शिक्षकों की मांग है कि मूल्याकन शुरू होने से पूर्व बकाये का भुगतान हो जाए।
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ऑनलाइन भुगतान किए जाने का फैसला
अब बोर्ड परीक्षा में कक्ष निरीक्षकों समेत मूल्यांकन के लिए भी सॉफ्टवेयर के माध्यम से ड्यूटी लगाई है। इस बार परीक्षा के बाद इनके खाते में सीधे पारिश्रमिक भेजे जाने की तैयारी हो रही। पहली बार आनलाइन भुगतान हो रहा है। इससे शिक्षकों का बकाया नही रहेगा।
शिक्षकों के पारिश्रमिक में कोई बढ़ोत्तरी नहीं हुई है। भुगतान की प्रक्रिया चल रही है। शासन से तय बजट के आधार पर ही कार्रवाई की जा रही है। राकेश कुमार, डीआईओएस
मूल्यांकन के पारिश्रमिक में बढ़ोत्तरी की जाए और सीबीएसई की तरह भुगतान हो। इसके अलावा बकाये का भुगतान किया जाए, इसके लिए विधायक व अधिकारियों से मांग किया गया है। अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुआ है। अजीत सिंह, अध्यक्ष माध्यमिक शिक्षक संघ
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यूपी बोर्ड की फीस बढ़ी, लेकिन पारिश्रमिक नहीं
पेट्रोल के दाम बढ़े, महंगाई बढ़ी लेकिन शिक्षकों का पारिश्रमिक नहीं बढ़ा। शिक्षकों का दावा है कि यूपी बोर्ड में कक्ष निरीक्षक की ड्यूटी करने से लेकर कॉपियां जांचने तक में पारिश्रमिक कम है। यूपी बोर्ड परीक्षा की ड्यूटी करने वाले शिक्षकों का पारिश्रमिक बहुत कम है। एक पाली की ड्यूटी का 48 रुपये दिया जाता है। शासन ने 2019 में पारिश्रमिक बढ़ाया था। वर्ष 2019 से पहले 2015 में और इससे पहले 2013 में पारिश्रमिक बढ़ाया गया। शिक्षक नेताओं का कहना है कि वर्ष 2013 में 20 वर्षों बाद दरें बढ़ाई गईं। लिहाजा अब भी दरें बहुत कम हैं। वर्ष 2019 में कॉपियां जांचने के लिए हाईस्कूल में प्रति कॉपी आठ से बढ़ाकर 11 रुपये और इंटरमीडिएट में 11 से बढ़ाकर 13 रुपये किया। सीबीएसई 25 रुपये प्रति कॉपी देता है। वर्ष 2019 में यूपी बोर्ड ने पहली बार मूल्यांकन केंद्रों पर 20 रुपये की दर से जलपान व्यय तय किया। शिक्षक नेता अजीत सिंह कहते हैं कि एक चाय के दाम 10 रुपये हो चुके हैं तब ये दरें बहुत कम है। कम पैसे में कोई दोपहर में नाश्ता कैसे कर सकेगा। इसी तरह वाहन भत्ता 27 रुपये है, इसमें रिक्शा तक नहीं मिलता। जबकि सीबीएसई 250 रुपये देता है। इस तरह शिक्षकों को ड्यूटी भी करनी पड़ेगी और नाश्ते के लिए भी तरसना होगा। ज्यादा से ज्यादा एक चाय और बिस्कुट ही खाकर पूरे दिन कॉपियां जांचेंगे।
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ड्यूटी का पारिश्रमिक देने में भी आनाकानी
जिले में साल 2019 में शिक्षकों ने कॉपियों का मूल्यांकन किया था। उसमें शहीदे आजम भगत सिंह इंटर कॉलेज में ड्यूटी किए शिक्षकों का 10 लाख रुपये और श्रीगांधी इंटर कॉलेज रेलवे कॉलोनी में ड्यूटी किए शिक्षकों का पांच लाख रूपये बकाया है। उन्हें दो सालों में भुगतान नहीं किया गया है। अब फिर मूल्यांकन की तैयारियां हो रहीं हैं, कॉपियां भी आ गईं हैं और परीक्षकों की ड्यूटी भी लग रही है। शिक्षकों की मांग है कि मूल्याकन शुरू होने से पूर्व बकाये का भुगतान हो जाए।
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ऑनलाइन भुगतान किए जाने का फैसला
अब बोर्ड परीक्षा में कक्ष निरीक्षकों समेत मूल्यांकन के लिए भी सॉफ्टवेयर के माध्यम से ड्यूटी लगाई है। इस बार परीक्षा के बाद इनके खाते में सीधे पारिश्रमिक भेजे जाने की तैयारी हो रही। पहली बार आनलाइन भुगतान हो रहा है। इससे शिक्षकों का बकाया नही रहेगा।
शिक्षकों के पारिश्रमिक में कोई बढ़ोत्तरी नहीं हुई है। भुगतान की प्रक्रिया चल रही है। शासन से तय बजट के आधार पर ही कार्रवाई की जा रही है। राकेश कुमार, डीआईओएस
मूल्यांकन के पारिश्रमिक में बढ़ोत्तरी की जाए और सीबीएसई की तरह भुगतान हो। इसके अलावा बकाये का भुगतान किया जाए, इसके लिए विधायक व अधिकारियों से मांग किया गया है। अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुआ है। अजीत सिंह, अध्यक्ष माध्यमिक शिक्षक संघ