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Gonda News: बच्चे भी सिलिंडर की लाइन में
Mon, 06 Apr 2026 11:16 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Mon, 06 Apr 2026 11:16 PM IST
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सिविल लाइंस में कड़ी धूप में गैस सिलिंडर के लिए लगी कतार। -संवाद
गोंडा। रसोई गैस की किल्लत अब सिर्फ असुविधा नहीं, बल्कि मजबूरी बन चुकी है। ऐसी मजबूरी जो मासूम बचपन तक को अपनी चपेट में ले रही है।
सोमवार को सिविल लाइंस पुलिस चौकी के सामने का नजारा किसी संकट से कम नहीं था। पूर्वाह्न 11:50 बजे की चिलचिलाती धूप में सैकड़ों लोग सिलिंडर के इंतजार में कतारबद्ध खड़े थे। इनमें बूढ़े, महिलाएं ही नहीं, बल्कि बच्चे भी शामिल थे, जिनके हाथों में किताबों की जगह गैस सिलिंडर था।
आवास विकास कॉलोनी निवासी कक्षा दो का छात्र ओजस शर्मा सुबह छह बजे से कतार में खड़ा था। पसीने से तरबतर, थकी आंखों में इंतजार साफ दिख रहा था। पानी की बोतल से गला तर करते हुए ओजस ने बताया कि गैस लेने के लिए आज स्कूल छोड़ना पड़ा, पिता दिहाड़ी मजदूर हैं और उनका काम छोड़ना मुश्किल है। घर की जिम्मेदारी आज उसके नन्हे कंधों पर थी।
कुछ ही दूरी पर चौक बाजार निवासी कक्षा तीन का छात्र अनस भी अपनी बारी का इंतजार कर रहा था। भूख-प्यास से बेहाल यह बच्चे उस सिस्टम की तस्वीर बयां कर रहे थे, जहां सुविधा के नाम पर सिर्फ कागजी इंतजाम हैं। जबकि एजेंसियां कागजों में होम डिलीवरी दिखाकर प्रति सिलिंडर 30 रुपये तक वसूल रही हैं, लेकिन हकीकत में उपभोक्ताओं को खुद कतार में लगना पड़ रहा है।
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उपभोक्ताओं का फूटा गुस्सा
मलियाना निवासी अब्दुल रहमान ने बताया कि सुबह से कुछ खाया नहीं, सिर्फ पानी के सहारे खड़े हैं। फोरविसगंज के मो. शरीफ ने कहा कि सुबह सात बजे से इंतजार कर रहे हैं, लेकिन अब तक लोड नहीं आया। इकबाल सिद्दीकी ने आरोप लगाया कि एजेंसी न तो होम डिलीवरी देती है और न ही उसका पैसा कम करती है। वहीं हारीपुर निवासी राहुल शुक्ल ने कहा कि जब स्टॉक है, तो यह अव्यवस्था क्यों...?।
होम डिलीवरी का पैसा कम करने का निर्देश
सभी गैस एजेंसियों को निर्देश दिया गया है कि वह होम डिलीवरी दें। यदि बुकिंग अधिक होने की स्थिति में होम डिलीवरी में देरी होती है और उपभोक्ता खुद सिलिंडर लेने गोदाम पर आते हैं तो उनका होम डिलीवरी का पैसा कम कर दिया जाए।
कुंवर दिनेश प्रताप सिंह, डीएसओ
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सोमवार को सिविल लाइंस पुलिस चौकी के सामने का नजारा किसी संकट से कम नहीं था। पूर्वाह्न 11:50 बजे की चिलचिलाती धूप में सैकड़ों लोग सिलिंडर के इंतजार में कतारबद्ध खड़े थे। इनमें बूढ़े, महिलाएं ही नहीं, बल्कि बच्चे भी शामिल थे, जिनके हाथों में किताबों की जगह गैस सिलिंडर था।
आवास विकास कॉलोनी निवासी कक्षा दो का छात्र ओजस शर्मा सुबह छह बजे से कतार में खड़ा था। पसीने से तरबतर, थकी आंखों में इंतजार साफ दिख रहा था। पानी की बोतल से गला तर करते हुए ओजस ने बताया कि गैस लेने के लिए आज स्कूल छोड़ना पड़ा, पिता दिहाड़ी मजदूर हैं और उनका काम छोड़ना मुश्किल है। घर की जिम्मेदारी आज उसके नन्हे कंधों पर थी।
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कुछ ही दूरी पर चौक बाजार निवासी कक्षा तीन का छात्र अनस भी अपनी बारी का इंतजार कर रहा था। भूख-प्यास से बेहाल यह बच्चे उस सिस्टम की तस्वीर बयां कर रहे थे, जहां सुविधा के नाम पर सिर्फ कागजी इंतजाम हैं। जबकि एजेंसियां कागजों में होम डिलीवरी दिखाकर प्रति सिलिंडर 30 रुपये तक वसूल रही हैं, लेकिन हकीकत में उपभोक्ताओं को खुद कतार में लगना पड़ रहा है।
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उपभोक्ताओं का फूटा गुस्सा
मलियाना निवासी अब्दुल रहमान ने बताया कि सुबह से कुछ खाया नहीं, सिर्फ पानी के सहारे खड़े हैं। फोरविसगंज के मो. शरीफ ने कहा कि सुबह सात बजे से इंतजार कर रहे हैं, लेकिन अब तक लोड नहीं आया। इकबाल सिद्दीकी ने आरोप लगाया कि एजेंसी न तो होम डिलीवरी देती है और न ही उसका पैसा कम करती है। वहीं हारीपुर निवासी राहुल शुक्ल ने कहा कि जब स्टॉक है, तो यह अव्यवस्था क्यों...?।
होम डिलीवरी का पैसा कम करने का निर्देश
सभी गैस एजेंसियों को निर्देश दिया गया है कि वह होम डिलीवरी दें। यदि बुकिंग अधिक होने की स्थिति में होम डिलीवरी में देरी होती है और उपभोक्ता खुद सिलिंडर लेने गोदाम पर आते हैं तो उनका होम डिलीवरी का पैसा कम कर दिया जाए।
कुंवर दिनेश प्रताप सिंह, डीएसओ