फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gonda News ›   eight has been killed in the attack of the bull

सांड के हमले में दो बच्चों समेत आठ लोग गवां चुके जान

Tue, 16 Jul 2019 10:51 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 16 Jul 2019 10:51 PM IST
विज्ञापन
eight has been killed in the attack of the bull
गोंडा। जिले में छुट्टा जानवरों व सांड का आतंक है। सांड़ के हमले में अब तक दो बच्चों समेत आठ लोगों की जान जा चुकी है। जबकि दो लोग गंभीर रूप से घायल हुए और करीब दो दर्जन से अधिक लोग चोटिल हो चुके हैं।
विज्ञापन

सदर तहसील क्षेत्र के ग्राम पिपरा पदुम में सोमवार को स्कूल से लौट रहीं दो बालिकाओं रागिनी (11) व सपना (13) की सांड़ के दौड़ाने पर भागते समय पानी भरे गहरे गड्ढे में गिरने से मौत हो गई थी। दोनों की मौत का दर्द गांव के लोग भूल नहीं पा रहे हैं। दोनों बच्चों की मौत से उसके घर वाले अभी उस सदमे को उबर नहीं पा रहे हैं।
विज्ञापन

कुछ दिन पहले 25 जनवरी को ग्राम पंचायत सोनौली मोहम्मदपुर निवासी सियाराम यादव 50 पर हमला कर दिया था जिसमें उनकी मौत हो गई थी। 29 जनवरी को मोतीगंज थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत बेलावां निवासी जगन्नाथ पाण्डेय की सांड के हमले में मौत हो चुकी है। वह अपने खेत की रखवाली कर रहे थे इसी बीच में सांड खेत में घुस आया। हांकने पर सांड ने हमला कर दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन

16 मई को नवाबगंज थाना क्षेत्र के किसान संतराम 55 की खेत में रखवाली करते समय सांड ने हमला कर मार डाला था। 23 मई को इटियाथोक के पारासराय निवासी गुल्ले को सांड ने पटककर मार डाला था। इसी तरह से नये गांव के सीताराम सिंह 60 को सांड के हमले में मौत हो चुकी है।
20 जून को नवाबगंज ब्लॉक के अगमपुर निवासी राम मिलन 75 की सोते समय सांड के हमले में मौत हो चुकी है। जून माह में ही नकहरा टेपरा निवासी कन्हैया लाल यादव की घर के पास सांड के हमले में मौत हो चुकी है।
15 जुलाई को कोतवाली देहात के भमैचा सुखभरिया निवासी आशुदेवी सांड के हमले में घायल हो चुकी हैं। जबकि पांच जुलाई को बभनजोत ब्लॉक के आजाद गांव के संतराम विश्वकर्मा पर सांड ने हमला किया जिसमें उनकी मौत हो गई थी।

परसपुर के मोहना गांव में राजपाल सिंह पर सांड ने हमला कर दिया था। ऐसे कई लोग हैं जिन्हें सांड ने पटककर घायल कर दिया है, जबकि चोटिल हो चुके हैं। जिले में चार गो आश्रय केंद्र संचालित हुए हैं, लेकिन अभी तक इसमें आसपास के कुछ मवेशियों को भेजा जा सका है। अभी शहर व कस्बे से लेकर ग्रामीण क्षेत्र में छुटा जानवरों, सांडों की तादात हजारों में हैं जो झुंड के झुंड में घूम रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed