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बेसिक शिक्षा में 97 लाख की हेराफेरी, कार्रवाई की तैयारी
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गोंडा। जिले में संचालित 17 कस्तूरबा विद्यालयों में लाखों का घालमेल सामने आया है। इसके तहत 97 लाख की बजट राशि बिना छात्राओं के स्कूल आए ही खर्च कर दी गयी।
जिम्मेदारों ने छात्राओं की उपस्थिति प्रेरणा पोर्टल पर दर्शाए बिना ही पिछले शैक्षिक सत्र में जिले के 17 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (केजीबीवी) में भोजन, मेडिकल केयर कंटीन्जेंसी तथा स्टेशनरी व शिक्षण सामग्री की मद में 96.98 लाख का भुगतान कर दिया।
इसका खुलासा होने के बाद मामले की जांच शुरू हो गयी है। सीडीओ शशांक त्रिपाठी ने बीएसए से इस प्रकरण की पूरी रिपोर्ट तलब की है। महानिदेशक स्कूली शिक्षा ने भी पांच जून तक मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक (एडी बेसिक) से भुगतान संबंधी जानकारी तलब की है।
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जिले में एडी बेसिक शिक्षा के पास ही बीएसए का भी अतिरिक्त प्रभार है, ऐसे में सीडीओ भी पूरे मामले पर नजर रखे हुए हैं। इसके तहत जिले में भुगतान से संबंधित अभिलेखों की पड़ताल भी शुरू हो गई है।
पूरे प्रकरण में जिला समन्वयक बालिका शिक्षा की भी जिम्मेदारी तय होगी। बजट भुगतान को लेकर सर्व शिक्षा अभियान के सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी 17 कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूलों के वार्डेन व सहायक लेखाकार की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। फिलहाल विभागीय स्तर पर इससे बचने की जोड़तोड़ शुरू हो गयी है।
कोरोना आपदा के कारण पिछले सत्र में कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूलों को को बीते 10 जनवरी से खोलने के निर्देश दिए गए थे। केजीबीवी आवासीय विद्यालय हैं। इसमें आर्थिक रूप से कमजोर तबके की 100 छात्राएं रहकर कक्षा छह से आठ तक की पढ़ाई करती हैं।
केजीबीवी में छात्रओं के भोजन, मेडिकल केयर/कंटीन्जेंसी तथा स्टेशनरी व शिक्षण सामग्री के मदों में खर्च के लिए दो महीने की धनराशि दी की गई थी। स्कूल तो खुले थे लेकिन छात्राओं की उपस्थिति बहुत कम रही थी।
इसके बाद भी केजीबीवी के लिए जारी की खर्च की शत-प्रतिशत धनराशि का इस्तेमाल कर लिया। छात्रओं की उपस्थिति का कोई ब्यौरा प्रेरणा पोर्टल पर अपलोड नहीं किया गया। इसके लिए प्रेरणा पोर्टल पर बालिकाओं की प्रतिदिन की उपस्थिति का सत्यापन भी करना जरूरी नही समझा गया।
कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूलों में भ्रष्टाचार इतना ही नही है। कोरोना संकट के दौरान ही बड़े पैमाने पर सामग्री की खरीद हुई थी। स्कूल से जुड़े सूत्रों की मानें तो जिले से ही खरीद कर सामग्री सीधे स्कूलों में पहुंचा दी गई थी।
वार्डेन की ओर से आपत्ति दर्ज कराने की कोशिश की गई, लेकिन सुनवाई नही हुई। उल्टे उन्हें धमकी ही दी गई। जिससे सामग्री भी हर स्कूल में पहुंचा दिया गया और भुगतान भी कर दिया गया। अभी इस मामले के सामने आने के बाद और भी कई राज सामने आ सकते हैं।
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जिम्मेदारों ने छात्राओं की उपस्थिति प्रेरणा पोर्टल पर दर्शाए बिना ही पिछले शैक्षिक सत्र में जिले के 17 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (केजीबीवी) में भोजन, मेडिकल केयर कंटीन्जेंसी तथा स्टेशनरी व शिक्षण सामग्री की मद में 96.98 लाख का भुगतान कर दिया।
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इसका खुलासा होने के बाद मामले की जांच शुरू हो गयी है। सीडीओ शशांक त्रिपाठी ने बीएसए से इस प्रकरण की पूरी रिपोर्ट तलब की है। महानिदेशक स्कूली शिक्षा ने भी पांच जून तक मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक (एडी बेसिक) से भुगतान संबंधी जानकारी तलब की है।
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जिले में एडी बेसिक शिक्षा के पास ही बीएसए का भी अतिरिक्त प्रभार है, ऐसे में सीडीओ भी पूरे मामले पर नजर रखे हुए हैं। इसके तहत जिले में भुगतान से संबंधित अभिलेखों की पड़ताल भी शुरू हो गई है।
पूरे प्रकरण में जिला समन्वयक बालिका शिक्षा की भी जिम्मेदारी तय होगी। बजट भुगतान को लेकर सर्व शिक्षा अभियान के सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी 17 कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूलों के वार्डेन व सहायक लेखाकार की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। फिलहाल विभागीय स्तर पर इससे बचने की जोड़तोड़ शुरू हो गयी है।
कोरोना आपदा के कारण पिछले सत्र में कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूलों को को बीते 10 जनवरी से खोलने के निर्देश दिए गए थे। केजीबीवी आवासीय विद्यालय हैं। इसमें आर्थिक रूप से कमजोर तबके की 100 छात्राएं रहकर कक्षा छह से आठ तक की पढ़ाई करती हैं।
केजीबीवी में छात्रओं के भोजन, मेडिकल केयर/कंटीन्जेंसी तथा स्टेशनरी व शिक्षण सामग्री के मदों में खर्च के लिए दो महीने की धनराशि दी की गई थी। स्कूल तो खुले थे लेकिन छात्राओं की उपस्थिति बहुत कम रही थी।
इसके बाद भी केजीबीवी के लिए जारी की खर्च की शत-प्रतिशत धनराशि का इस्तेमाल कर लिया। छात्रओं की उपस्थिति का कोई ब्यौरा प्रेरणा पोर्टल पर अपलोड नहीं किया गया। इसके लिए प्रेरणा पोर्टल पर बालिकाओं की प्रतिदिन की उपस्थिति का सत्यापन भी करना जरूरी नही समझा गया।
कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूलों में भ्रष्टाचार इतना ही नही है। कोरोना संकट के दौरान ही बड़े पैमाने पर सामग्री की खरीद हुई थी। स्कूल से जुड़े सूत्रों की मानें तो जिले से ही खरीद कर सामग्री सीधे स्कूलों में पहुंचा दी गई थी।
वार्डेन की ओर से आपत्ति दर्ज कराने की कोशिश की गई, लेकिन सुनवाई नही हुई। उल्टे उन्हें धमकी ही दी गई। जिससे सामग्री भी हर स्कूल में पहुंचा दिया गया और भुगतान भी कर दिया गया। अभी इस मामले के सामने आने के बाद और भी कई राज सामने आ सकते हैं।