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17 बीईओ व 1,110 शिक्षकों की मुश्किलें बढ़ीं
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गोंडा। बेसिक शिक्षा विभाग ने बीते वित्तीय वर्ष में शैक्षिक माहौल बनाने के लिए कई गतिविधियां कराईं। इसके लिए ब्लॉक संसाधन केंद्र यानी बीआरसी और विद्यालयों को बजट दिया गया था। बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 56.81 लाख रुपये का बजट जारी हुआ था। इस बजट को खर्च तो कर लिया गया, लेकिन विभाग को हिसाब नहीं दिया गया। कार्यक्रमों के आयोजन की जानकारी के साथ ही बजट के खर्च का ब्योरा नहीं दिया जा रहा है। इससे बजट में गोलमाल की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में आयोजित कराए गये कार्यक्रमों से जुड़े 17 खंड शिक्षा अधिकारियों के साथ ही 1,110 शिक्षकों की मुश्किलें बढ़ गईं हैं।
विद्यालयों में शैक्षिक माहौल बेहतर बनाने के साथ ही करीब 90 हजार छात्र-छात्राओं को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दिया जाना था। इसकेे लिए 902 जूनियर हाईस्कूलों में आयोजन होने थे। फिलहाल 480 स्कूलों को तीन-तीन हजार रुपये दिए गये। इसके अलावा ‘मुझमें है दम’ कार्यक्रम के तहत भी दो-दो हजार रुपये प्रति स्कूल दिए गये। मगर इसके खर्च का ब्योरा भी नहीं मिला है।
इसी तरह 17 ब्लॉक संसाधन केंद्रों पर नारी शिक्षा चौपाल के लिए 30-30 हजार रुपये की दर से बजट दिया गया। साथ ही नारी शिक्षा कार्यक्रम के संचालन के लिए 1,110 शिक्षकों का प्रशिक्षण भी हुआ। जिसके लिए दो लाख 20 हजार रुपये बजट दिया गया। इन खर्चों का हिसाब बीआरसी से आना है। ये भी नहीं आ रहा है। इसके अलावा 902 उच्च प्राथमिक व कंपोजिट विद्यालयों में नारी शिक्षा कार्यक्रम के लिए 500-500 रुपये की दर से बजट दिया गया था। इसका भी हिसाब नहीं मिल रहा है। अब बजट के खर्च का पूरा ब्योरा 19 मई से पहले मांगा गया है। इसके बाद विभाग कार्रवाई की तैयारी में है।
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ब्लॉक स्तर पर नारी शिक्षा चौपाल के बजट का हिसाब नहीं देने का खुलासा ‘अमर उजाला’ ने 11 मई को किया था। जिसके बाद विभाग ने बीआरसी व विद्यालयों में नारी शिक्षा को बढ़ावा देने की योजनाओं की पड़ताल की। जिसमें पांच तरह की गतिविधियां सामने आईं। जिसमें अब तक खर्च का हिसाब न मिलने की बात सामने आई है। इसके बाद बीएसए ने विभाग के अधिकारियों को चेतावनी देने के साथ ही खर्च का हिसाब मांगा है।
बीएसए डॉ. अखिलेश प्रताप सिंह का कहना है कि बीआरसी और विद्यालयों में संचालित योजनाओं के लिए दिए गये बजट के उपभोग का हिसाब नहीं देना गंभीर मामला है। इसके लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है। इसके बाद कार्रवाई की जाएगी।
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विद्यालयों में शैक्षिक माहौल बेहतर बनाने के साथ ही करीब 90 हजार छात्र-छात्राओं को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दिया जाना था। इसकेे लिए 902 जूनियर हाईस्कूलों में आयोजन होने थे। फिलहाल 480 स्कूलों को तीन-तीन हजार रुपये दिए गये। इसके अलावा ‘मुझमें है दम’ कार्यक्रम के तहत भी दो-दो हजार रुपये प्रति स्कूल दिए गये। मगर इसके खर्च का ब्योरा भी नहीं मिला है।
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इसी तरह 17 ब्लॉक संसाधन केंद्रों पर नारी शिक्षा चौपाल के लिए 30-30 हजार रुपये की दर से बजट दिया गया। साथ ही नारी शिक्षा कार्यक्रम के संचालन के लिए 1,110 शिक्षकों का प्रशिक्षण भी हुआ। जिसके लिए दो लाख 20 हजार रुपये बजट दिया गया। इन खर्चों का हिसाब बीआरसी से आना है। ये भी नहीं आ रहा है। इसके अलावा 902 उच्च प्राथमिक व कंपोजिट विद्यालयों में नारी शिक्षा कार्यक्रम के लिए 500-500 रुपये की दर से बजट दिया गया था। इसका भी हिसाब नहीं मिल रहा है। अब बजट के खर्च का पूरा ब्योरा 19 मई से पहले मांगा गया है। इसके बाद विभाग कार्रवाई की तैयारी में है।
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ब्लॉक स्तर पर नारी शिक्षा चौपाल के बजट का हिसाब नहीं देने का खुलासा ‘अमर उजाला’ ने 11 मई को किया था। जिसके बाद विभाग ने बीआरसी व विद्यालयों में नारी शिक्षा को बढ़ावा देने की योजनाओं की पड़ताल की। जिसमें पांच तरह की गतिविधियां सामने आईं। जिसमें अब तक खर्च का हिसाब न मिलने की बात सामने आई है। इसके बाद बीएसए ने विभाग के अधिकारियों को चेतावनी देने के साथ ही खर्च का हिसाब मांगा है।
बीएसए डॉ. अखिलेश प्रताप सिंह का कहना है कि बीआरसी और विद्यालयों में संचालित योजनाओं के लिए दिए गये बजट के उपभोग का हिसाब नहीं देना गंभीर मामला है। इसके लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है। इसके बाद कार्रवाई की जाएगी।