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छपिया महोत्सव में जुटी श्रद्धालुओं की भीड़
अमर उजाला/गोंडा
Updated Sun, 06 Nov 2016 11:53 PM IST
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छपिया महोत्सव में जुटे भक्त
- फोटो : अमर उजाला
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भगवान घनश्याम का धरती पर अवतरण व विचरण महज एक घटना नहीं, बल्कि अलौकिक यात्रा थी। उनके जीवन को गागर के सागर में समेटने की कोशिश तो की जा सकती है, लेकिन उनकी कथा का पार नहीं पाया जा सकता। नित्यस्वरूपानंद जी ने रविवार को छपिया महोत्सव में आयोजित नौ दिवसीय कथा के दूसरे दिन भगवान घनश्याम की बाललीला का वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को कथा का रसपान कराया। पंडाल में जुटे हजारों श्रद्धालु कथा सुनकर भावविभोर हो गए।
रविवार को छपिया गांव में आस्था का कुंभ हिलोरें मार रहा था। भगवान घनश्याम की जन्मस्थली पर देश के कोने-कोने से पहुंचे स्वामी नारायण संप्रदाय के भक्तों ने छपिया महोत्सव के दूसरे दिन सुबह पवित्र नारायण सरोवर में आस्था की डुबकी लगा अपने मंगल की कामना की।
इसके बाद भक्तों ने भगवान घनश्याम के दर्शन किए। मंदिर में भगवान की दिव्य झांकी सजाई गई है। श्रद्धालुओं ने जन्मस्थली पर पूजा-अर्चना कर भगवान घनश्याम की आरती उतारी। भव्य आरती कार्यक्रम को देखकर भक्त भावविभोर हो उठे।
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हरि कथा के दूसरे दिन की पहली बेला में कथा वाचक नित्यस्वरूपानंद ने भगवान घनश्याम की बाल लीलाओं का बखान किया। उन्होंने कहा कि भगवान घनश्याम बाल्यकाल से ही गुण, ज्ञान, भक्ति और कल्याण के मार्ग पर अग्रसर थे और लोगों को ज्ञान, वैराग्य व मुक्ति का मार्ग दिखाने लगे थे।
कहा कि भगवान का यह उपदेश आसुरी शक्तियों को सहन नहीं हुआ औैर आसुरी शक्तियों ने उन्हें अपने रास्ते से हटाने का प्रयास किया, लेकिन उनके तेज के आगे व सभी निस्तेज होकर पराभव को प्राप्त हुए। बाल्यकाल के दिव्य चरित्रों को सुनकर भगवान घनश्याम के भक्त भावविभोर हो उठे। इस मौके पर छपिया के ब्लॉक प्रमुख बिंद्रा प्रसाद शुक्ला, सुरेश शुक्ला, बाबूराम यादव, शैलेंद्र पांडेय, माधव तिवारी, शैलेंद्र तिवारी व कार्यक्रम की देखरेख का जिम्मा संभाल रहे सरयू भगत आदि मौजूद रहे।
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रविवार को छपिया गांव में आस्था का कुंभ हिलोरें मार रहा था। भगवान घनश्याम की जन्मस्थली पर देश के कोने-कोने से पहुंचे स्वामी नारायण संप्रदाय के भक्तों ने छपिया महोत्सव के दूसरे दिन सुबह पवित्र नारायण सरोवर में आस्था की डुबकी लगा अपने मंगल की कामना की।
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इसके बाद भक्तों ने भगवान घनश्याम के दर्शन किए। मंदिर में भगवान की दिव्य झांकी सजाई गई है। श्रद्धालुओं ने जन्मस्थली पर पूजा-अर्चना कर भगवान घनश्याम की आरती उतारी। भव्य आरती कार्यक्रम को देखकर भक्त भावविभोर हो उठे।
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हरि कथा के दूसरे दिन की पहली बेला में कथा वाचक नित्यस्वरूपानंद ने भगवान घनश्याम की बाल लीलाओं का बखान किया। उन्होंने कहा कि भगवान घनश्याम बाल्यकाल से ही गुण, ज्ञान, भक्ति और कल्याण के मार्ग पर अग्रसर थे और लोगों को ज्ञान, वैराग्य व मुक्ति का मार्ग दिखाने लगे थे।
कहा कि भगवान का यह उपदेश आसुरी शक्तियों को सहन नहीं हुआ औैर आसुरी शक्तियों ने उन्हें अपने रास्ते से हटाने का प्रयास किया, लेकिन उनके तेज के आगे व सभी निस्तेज होकर पराभव को प्राप्त हुए। बाल्यकाल के दिव्य चरित्रों को सुनकर भगवान घनश्याम के भक्त भावविभोर हो उठे। इस मौके पर छपिया के ब्लॉक प्रमुख बिंद्रा प्रसाद शुक्ला, सुरेश शुक्ला, बाबूराम यादव, शैलेंद्र पांडेय, माधव तिवारी, शैलेंद्र तिवारी व कार्यक्रम की देखरेख का जिम्मा संभाल रहे सरयू भगत आदि मौजूद रहे।