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डाला छठ पर आस्था से सराबोर रहे सरोवर
गोंडा
Updated Thu, 26 Oct 2017 11:51 PM IST
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गोंडा के खैरा भवानी पोखरे के किनारे पानी में खड़ी होकर गुरुवार को डाला छठ पूजन पर डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देती महिलाएं।
- फोटो : अमर उजाला
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डाला छठ पर गुरुवार को आस्था व श्रद्धा का संगम दिखा। सरोवरों में सुहागिन महिलाओं ने निर्जला व्रत रखकर अपने परिवार के सुख समृद्धि की कामना की। अस्ताचल सूर्य को अर्घ्य देकर महिलाओं ने पूजन किया और पवित्र सरोवरों में दीपदान कर पुत्र व पति के दीर्घायु होने का वरदान मांगा। सिर पर डाला रखकर नंगे पैर पैदल अपने घर पहुंची। इस दौरान सरोवरों व पोखरों पर पर हजारों की संख्या में भीड़ जुटी रही।
बिहार व झारखंड समेत पूर्वांचल के जिलों में डाला छठ का पर्व सबसे बड़े पर्व के रूप में मनाया जाता है। चार दिनों तक चलने वाले यह पर्व पहले दिन सुहागिन महिलाएं नहाय खाय के इसकी शुरुआत करती हैं। गुरुवार को तीसरे दिन सुहागिन महिलाओं ने निर्जला व्रत रखा।
शाम को महिलाएं मंगल गीत गाते हुए अपने नजदीक के पवित्र पोखरों व सरोवरों पर पहुंची और अस्त होते सूर्य का पूजन किया। इसके बाद सुहागिनों ने अस्ताचल सूर्य को अर्घ्य देकर अपने पति व पुत्रों के दीर्घायु होने का वरदान मांगा। अपने परिवार की सुख समृद्धि के लिए महिलाओं ने सरोवरों में दीपदान भी किया।
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गुरुवार को तीसरे दिन शहर के खौरा भवानी मंदिर परिसर में स्थित पवित्र सरोवर पर बड़ी संख्या में सुहागिनों ने भगवान सूर्य व माता छठी का पूजन किया। इसी तरह से पीएसी लाइन स्थित पोखरे पर भी काफी गहमागहमी रही। यहां भी सुहागिन महिलाओं ने छठी माता का पूजन कर पति व बेटों के लंबी आयु की कामना की।
पूजन व दीपदान के बाद महिलाएं नंगे पैर ही अपने घरों तक गईं और वहां घर के आंगन में स्थापित माता छठी का पूजन किया। इस दौरान पोखरों पर बज रहे ढोल नगाड़ों की ध्वनि ने माहौल को पूरी तरह से भक्तिमय कर दिया। सुहागिन महिलाओं के अलावा बच्चे, बूढ़े व घर के अन्य सदस्यों ने भी पूजन में बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया।
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बिहार व झारखंड समेत पूर्वांचल के जिलों में डाला छठ का पर्व सबसे बड़े पर्व के रूप में मनाया जाता है। चार दिनों तक चलने वाले यह पर्व पहले दिन सुहागिन महिलाएं नहाय खाय के इसकी शुरुआत करती हैं। गुरुवार को तीसरे दिन सुहागिन महिलाओं ने निर्जला व्रत रखा।
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शाम को महिलाएं मंगल गीत गाते हुए अपने नजदीक के पवित्र पोखरों व सरोवरों पर पहुंची और अस्त होते सूर्य का पूजन किया। इसके बाद सुहागिनों ने अस्ताचल सूर्य को अर्घ्य देकर अपने पति व पुत्रों के दीर्घायु होने का वरदान मांगा। अपने परिवार की सुख समृद्धि के लिए महिलाओं ने सरोवरों में दीपदान भी किया।
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गुरुवार को तीसरे दिन शहर के खौरा भवानी मंदिर परिसर में स्थित पवित्र सरोवर पर बड़ी संख्या में सुहागिनों ने भगवान सूर्य व माता छठी का पूजन किया। इसी तरह से पीएसी लाइन स्थित पोखरे पर भी काफी गहमागहमी रही। यहां भी सुहागिन महिलाओं ने छठी माता का पूजन कर पति व बेटों के लंबी आयु की कामना की।
पूजन व दीपदान के बाद महिलाएं नंगे पैर ही अपने घरों तक गईं और वहां घर के आंगन में स्थापित माता छठी का पूजन किया। इस दौरान पोखरों पर बज रहे ढोल नगाड़ों की ध्वनि ने माहौल को पूरी तरह से भक्तिमय कर दिया। सुहागिन महिलाओं के अलावा बच्चे, बूढ़े व घर के अन्य सदस्यों ने भी पूजन में बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया।