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बाढ़ से फसलें बर्बाद
अमर उजाला/बलरामपुर
Updated Tue, 26 Jul 2016 10:40 PM IST
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अाशियाना उजाड़ते ग्रामीण
- फोटो : अमर उजाला
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भारी बारिश के चलते जिले में राप्ती नदी व पहाड़ी नालों में बाढ़ का उफान कम होने का नाम नहीं ले रहा है। मंगलवार को खतरे के निशान 104.620 मीटर के सापेक्ष राप्ती नदी का जलस्तर 104.710 मीटर रिकॉर्ड किया गया। राप्ती नदी खतरे के निशान से 90 मिलीमीटर ऊपर बह रही है। जिले के करीब 50 गांवों में बाढ़ के पानी का कहर जारी है। बाढ़ के कहर से सैकड़ों परिवार तबाह हो गए हैं। जिले के सैकड़ों किसानों की फसलें पानी में डूब गई हैं। उधर, लोगों का आरोप है कि बाढ़ पीड़ितों को मिलने वाली सरकारी मदद महज कागजों तक ही सीमित है।
सदर तहसील के चौका कला, लालपुर फगुइया, कल्यानपुर, झौहना, करमहना, मधवाजोत, गोंसाईपुरवा, जोगिया कला, ढोंढरी, अहिरनपुरवा व जबदही-जबदहा सहित करीब तीन दर्जन गांव राप्ती नदी की बाढ़ की चपेट में हैं।
राप्ती नदी की कटान से भयभीत चौका कला गांव के लोग खुद अपना आशियाना उजाड़ रहे हैं। क्षेत्रवासी अयोध्या प्रसाद, कल्लू, शिवप्रसाद, पल्टू राम, मुरली, राजबहादुर, शंकर व रामजस आदि का कहना है कि पिछले कई दिनों से राप्ती नदी की कटान में क्षेत्र के सैकड़ों किसानों के कई बीघा खेत फसल सहित कट चुके हैं।
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इन लोगों का आरोप है कि प्रशासन से अभी तक कोई मदद नहीं मिली है। उतरौला संवाद सूत्र के अनुसार राप्ती नदी के लगातार बढ़ रहे जलस्तर से तहसील क्षेत्र के तीन दर्जन से अधिक गांवों में बाढ़ आ गई है। अल्लीपुरवा, नंदमहरा, लखमा, पथौचा, अमारे भरिया, कर्मा, बारम, टिकुइया, तेंदुआ, रसूलपुर, कटरा, पिपरा, सकरा, तिलहर, बिरदा, लालनगर, महुआधनी, परसौना, मिस्जिदया, चिचुड़ी, बांकभवानी व टेढ़वा सहित तीन दर्जन गांव राप्ती नदी की बाढ़ की चपेट में है।
बभनपुरवा गांव राप्ती नदी की कटान के जद में है। मटियारियाडीह गांव के तटबंध पर ध्वस्त होने का खतरा मंडरा रहा है। बाढ़ प्रभावित लोगों का आरोप है कि प्रशासन की तरफ से अभी तक कोई मदद नहीं पहुंचाई गई है। हरिहरगंज बाजार में सड़क पर पानी भरा हुआ है, जिससे बाजार के लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के करीब 30 से अधिक स्कूलों में ताला लटक रहा है। मार्गों पर जलभराव के चलते अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेज रहे हैं। उतरौला तहसील के उपरहुला, बरायल, अल्लीपुर, व पिपरा आदि स्कूलों में पानी भर जाने के चलते ताला लटक रहा है। शिक्षकों का कहना है कि पानी भरा होने के चलते ग्राम प्रधान से मदद लेकर दूसरे जगहों पर स्कूलों का संचालन किया जा रहा है। बीएसए अरुण कुमार ने बाढ़ प्रभावित वाले स्कूलों को दूसरे जगहों पर संचालित करने का निर्देश दिया है।
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सदर तहसील के चौका कला, लालपुर फगुइया, कल्यानपुर, झौहना, करमहना, मधवाजोत, गोंसाईपुरवा, जोगिया कला, ढोंढरी, अहिरनपुरवा व जबदही-जबदहा सहित करीब तीन दर्जन गांव राप्ती नदी की बाढ़ की चपेट में हैं।
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राप्ती नदी की कटान से भयभीत चौका कला गांव के लोग खुद अपना आशियाना उजाड़ रहे हैं। क्षेत्रवासी अयोध्या प्रसाद, कल्लू, शिवप्रसाद, पल्टू राम, मुरली, राजबहादुर, शंकर व रामजस आदि का कहना है कि पिछले कई दिनों से राप्ती नदी की कटान में क्षेत्र के सैकड़ों किसानों के कई बीघा खेत फसल सहित कट चुके हैं।
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इन लोगों का आरोप है कि प्रशासन से अभी तक कोई मदद नहीं मिली है। उतरौला संवाद सूत्र के अनुसार राप्ती नदी के लगातार बढ़ रहे जलस्तर से तहसील क्षेत्र के तीन दर्जन से अधिक गांवों में बाढ़ आ गई है। अल्लीपुरवा, नंदमहरा, लखमा, पथौचा, अमारे भरिया, कर्मा, बारम, टिकुइया, तेंदुआ, रसूलपुर, कटरा, पिपरा, सकरा, तिलहर, बिरदा, लालनगर, महुआधनी, परसौना, मिस्जिदया, चिचुड़ी, बांकभवानी व टेढ़वा सहित तीन दर्जन गांव राप्ती नदी की बाढ़ की चपेट में है।
बभनपुरवा गांव राप्ती नदी की कटान के जद में है। मटियारियाडीह गांव के तटबंध पर ध्वस्त होने का खतरा मंडरा रहा है। बाढ़ प्रभावित लोगों का आरोप है कि प्रशासन की तरफ से अभी तक कोई मदद नहीं पहुंचाई गई है। हरिहरगंज बाजार में सड़क पर पानी भरा हुआ है, जिससे बाजार के लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के करीब 30 से अधिक स्कूलों में ताला लटक रहा है। मार्गों पर जलभराव के चलते अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेज रहे हैं। उतरौला तहसील के उपरहुला, बरायल, अल्लीपुर, व पिपरा आदि स्कूलों में पानी भर जाने के चलते ताला लटक रहा है। शिक्षकों का कहना है कि पानी भरा होने के चलते ग्राम प्रधान से मदद लेकर दूसरे जगहों पर स्कूलों का संचालन किया जा रहा है। बीएसए अरुण कुमार ने बाढ़ प्रभावित वाले स्कूलों को दूसरे जगहों पर संचालित करने का निर्देश दिया है।