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बाढ़ के पानी में डूबने से मासूम की मौत

Tue, 18 Jul 2017 10:56 PM IST
amar ujala
amar ujala Updated Tue, 18 Jul 2017 10:56 PM IST
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 Innocent death due to drowning in flood waters
बाढ़ - फोटो : amar ujala
घाघरा नदी से परसपुर इलाके के ताल-तल्लैयों में आई बाढ़ ने एक पांच साल के मासूम की जान ले ली। बच्चा सोमवार को अपने घर से खेत की तरफ जाते समय लापता हो गया था। जिसकी परिवारीजनों ने हर तरफ खोज-बीन की लेकिन कही कोई पता नहीं चला।
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मंगलवार को उसका शव गांव के बाहर एक तालाब में पड़े होने की सूचना मिलने के बाद पूरे गांव में मामती सन्नाटा छा गया। वहीं प्रशासन बच्चे की मौत बाढ़ के पानी में डूबने से होने नहीं मान रहा। पिता की ओर से थानाध्यक्ष परसपुर को मामले की तहरीर दी गई है।  
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 परसपुर के नंदौर गांव में रहने वाले विनोद कुमार का 5 साल का बेटा आशू सोमवार को अपने घर से खेत की तरफ जाने के लिए निकला था। जिसके बाद वह अचानक लापता हो गया। परिवार वालों ने उसे पूरे गांव में खोजा, लेकिन कहीं उसका कोई पता नहीं चला। आसपास रिश्तेदारी में भी बच्चे की खोजबीन के प्रयास किए गए।
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लेकिन कोई जानकारी नहीं हो पाई। मंगलवार को गांव से कुछ दूर एक तालाब में बच्चे का शव उतराता देख ग्रामीणों ने हो-हल्ला मचाया। जिसके बाद वहां लोगों की भीड़ जमा हो गई। बांस के एक बड़े डंडे से जब तालाब में उतराते शव को सीधा किया गया तो वह शव किसी और का नहीं बल्कि आशू का था।

जिसके बाद पूरे नंदौर गांव में सन्नाटा छा गया। पिता विनोद कुमार की ओर से इस मामले में एक तहरीर परसपुर थाने में दी गई है। वहीं थानाध्यक्ष परसपुर मुकेश कुमार का कहना है कि बच्चे का शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।             
   
बाढ़ क्षेत्र नवाबगंज में इससे पहले दो जानें उपनाई सरयू नदी में डूबने से जा चुकी हैं। यहां के मंहगूपुर गांव से जानवरों के लिए चारा लेने गई एक 12 साल की किशोरी हफ्ते भर पहले सरयू नदी में पैर फिसलने से डूब गई थी। जिससे उसकी जान चली गई थी।


जबकि ठीक ऐसे ही इस्माइलपुर गांव में रहने वाला एक मासूम, जो भैंस चराते-चराते सरयू नदी के किनारे पहुंच गया था, उसकी भी नदी के पानी में डूबने से जान चली गई थी। जिसका शव 32 घंटे बाद बस्ती बार्डर से छावनी पुलिस ने बरामद किया था। लेकिन दोनों ही मामलों में नदी के पानी मे डूबकर मरने के बावजूद प्रशासन ने दोनों मौतों को बाढ़ के पानी में डूबना नहीं माना। 
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