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एसडीएम को अगवा करने वाले चार लोगों को उम्रकैद
अमर उजाला/बलरामपुर
Updated Wed, 24 Aug 2016 11:23 PM IST
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jail shimla
तत्कालीन एसडीएम उतरौला को जान से मारने की नीयत से अगवा करने के पांच अभियुक्तों में से एडीजे प्रथम ने चार लोगों को आजीवन कारावास तथा एक को 10 वर्ष की सजा सुनाई है। इस मामले में तत्कालीन कटरा विधायक व पूर्व सांसद भी आरोपी थे, लेकिन उनकी मृत्यु हो जाने के कारण उनका नाम मुकदमे से उन्मुक्त कर दिया गया था। न्यायाधीश ने आरोपियों को 25-25 हजार रुपये अर्थदंड भी अदा करने का आदेश दिया है।
कोतवाली उतरौला के अंतर्गत सरकारी कॉलोनी निवासी दिलीप कुमार ने थाने पर प्रार्थना पत्र दिया था कि वह परगना अधिकारी उतरौला के यहां चपरासी है। 18 नवंबर 1989 को कटरा विधायक मुन्नन खां अपने 20-25 साथियों के साथ आए और एसडीएम उतरौला आरपी सिंह को जान से मारने की नीयत से जीप नंबर यूए 5005 से अगवा कर लिया। उनकी जीप आसाम रोड की तरफ गई है।
पुलिस ने जीप का पीछा किया और नाकेबंदी करके रेहरा थाने के पास एसडीएम को छुड़वा लिया। इस दौरान भी आरोपियों ने पुलिस के साथ हाथापाई की। पुलिस ने जान से मारने की नीयत से अगवा करने का मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू की।
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विवेचना के बाद पुलिस ने तत्कालीन कटरा विधायक व बलरामपुर के पूर्व सांसद मुन्नन खां, मोहम्मद वशीर, यार मोहम्मद, मोहम्मद वशीर अहमद, काशिम खां व वलीउरहमान के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। सरकारी अधिवक्ता गोमती प्रसाद त्रिपाठी ने 11 गवाहों को न्यायालय में प्रस्तुत किया।
सत्र परीक्षण के दौरान मुन्नन खां की मृत्यु हो गई और उनका नाम मुकदमे से हटा दिया गया। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने व पत्रावली का अवलोकन करने के बाद एडीजे प्रथम उमेश चंद्र शर्मा ने पांचों अभियुक्तों को दोषी करार दिया।
सजा पर सुनवाई करते हुए बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने न्यूनतम सजा देने की अपील की। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने वलीउरहमान को गंभीर रूप से बीमार बताते हुए डॉक्टरी रिपोर्ट प्रस्तुत की। वलीउरहमान बैसाखी के सहारे न्यायालय में आए थे।
सरकारी अधिवक्ता गोमती प्रसाद त्रिपाठी ने इसे घोर अपराध बताते हुए एक वरिष्ठ प्रशासनिक अपराधी को जान से मारने के नीयत से अगवा करने वालों को कठोरतम सजा दिए जाने की अपील की। एडीजे प्रथम उमेश चंद्र शर्मा ने मोहम्मद वशीर, यार मोहम्मद, मोहम्मद वशीर अहमद व कासिम अली को अजीवन कारावास तथा 25-25 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। न्यायाधीश ने वलीउरहमान को 10 वर्ष की कैद व 10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
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कोतवाली उतरौला के अंतर्गत सरकारी कॉलोनी निवासी दिलीप कुमार ने थाने पर प्रार्थना पत्र दिया था कि वह परगना अधिकारी उतरौला के यहां चपरासी है। 18 नवंबर 1989 को कटरा विधायक मुन्नन खां अपने 20-25 साथियों के साथ आए और एसडीएम उतरौला आरपी सिंह को जान से मारने की नीयत से जीप नंबर यूए 5005 से अगवा कर लिया। उनकी जीप आसाम रोड की तरफ गई है।
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पुलिस ने जीप का पीछा किया और नाकेबंदी करके रेहरा थाने के पास एसडीएम को छुड़वा लिया। इस दौरान भी आरोपियों ने पुलिस के साथ हाथापाई की। पुलिस ने जान से मारने की नीयत से अगवा करने का मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू की।
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विवेचना के बाद पुलिस ने तत्कालीन कटरा विधायक व बलरामपुर के पूर्व सांसद मुन्नन खां, मोहम्मद वशीर, यार मोहम्मद, मोहम्मद वशीर अहमद, काशिम खां व वलीउरहमान के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। सरकारी अधिवक्ता गोमती प्रसाद त्रिपाठी ने 11 गवाहों को न्यायालय में प्रस्तुत किया।
सत्र परीक्षण के दौरान मुन्नन खां की मृत्यु हो गई और उनका नाम मुकदमे से हटा दिया गया। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने व पत्रावली का अवलोकन करने के बाद एडीजे प्रथम उमेश चंद्र शर्मा ने पांचों अभियुक्तों को दोषी करार दिया।
सजा पर सुनवाई करते हुए बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने न्यूनतम सजा देने की अपील की। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने वलीउरहमान को गंभीर रूप से बीमार बताते हुए डॉक्टरी रिपोर्ट प्रस्तुत की। वलीउरहमान बैसाखी के सहारे न्यायालय में आए थे।
सरकारी अधिवक्ता गोमती प्रसाद त्रिपाठी ने इसे घोर अपराध बताते हुए एक वरिष्ठ प्रशासनिक अपराधी को जान से मारने के नीयत से अगवा करने वालों को कठोरतम सजा दिए जाने की अपील की। एडीजे प्रथम उमेश चंद्र शर्मा ने मोहम्मद वशीर, यार मोहम्मद, मोहम्मद वशीर अहमद व कासिम अली को अजीवन कारावास तथा 25-25 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। न्यायाधीश ने वलीउरहमान को 10 वर्ष की कैद व 10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।