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पांच साल तक महज जुमलेबाजी तक सीमित रही बांधों की मरम्मत

amar ujala Updated Mon, 22 May 2017 11:13 PM IST
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बलिया
बलिया - फोटो : अमर उजाला

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 वर्ष 2012-13 में भारी बाढ़ के चलते राप्ती नदी ने बलरामपुर-भड़रिया बांध को चंदापुर गांव के पास तोड़ दिया था। पानी का बहाव इतना तेज था कि करीब 100 मीटर तटबांध क्षतिग्रस्त हो गया। तब से लेकर आज तक इस बांध की मरम्मत महज जुमलेबाजी तक ही सीमित रही।
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हर साल सैकड़ों गांव के लोग क्षतिग्रस्त बांध के चलते नदी की बाढ़ में तबाह हो रहे हैं। इस साल भी बारिश का मौसम नजदीक आने से पहले ही इन गांव के लोग दहशत में हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर बांध की मरम्मत नहीं हुई तो फिर तबाही का सामना करना पड़ेगा।      

 
विदित हो कि उतरौला तहसील क्षेत्र में राप्ती नदी की बाढ़ से बचाने के लिए बलरामपुर भड़रिया बांध का निर्माण करीब 10 साल पहले किया गया था। सिंचाई विभाग तथा ठेकेदारों की मनमानी के चलते बांध को कई जगह अधूरा छोड़ दिया गया। वर्ष 2012-13 में राप्ती की बाढ़ की दबाव में चंदापुर के पास यह बांध 100 मीटर तक बह गया। बाढ़ में चंदापुर, पचौथा, लखमा, महुवा भाटम, नंदमहरा, पिपरी, वर्माडीहवा, अमारेभरिया, पोखरा, भिटौरी, वाजिदपुर, अल्लीपुर, बभनपुरवा, पनवापुर, रमवापुर, रसूलपुर, राजपूर माफी, अमारेभरिया, पिपरा, पोखरा, कटरा, कोहनिया, तेतारपुर, सिकेरा, घुमनजोत, मझाली वाझिल तथा हरदिहवा आदि गांव बाढ़ से तबाह हो गए थे।

तब से लेकर आज तक इस बांध की मरम्मत नहीं हो सकी है। हर साल बाढ़ आने पर इन गांवों के करीब 50 हजार लोग बाढ़ की तबाही झेल रहे हैं। पानी से खरीफ की फसले तबाह हो जाती हैं। जनप्रतिनिधि तथा अधिकारी बीते पांच सालों से हरसाल बाढ़ से पूर्व ही तटबंध की मरम्मत कराने का दावा तो करते हैं लेकिन आज तक बांध की मरम्मत नहीं हो सकी है।

क्षेत्रवासी प्रेम, शोभा सिंह, सीताराम, सावित्री देवी व आदर्श सिंह ने बताया कि बांध की मरम्मत न होने से इस साल भी बाढ़ से भारी तबाही हो सकती है। इन लोगों ने शासन-प्रशासन से समय रहते क्षतिग्रस्त बांध की मरम्मत कराने की मांग की है। इस संबंध में डीएम राकेश कुमार मिश्र ने बताया कि सिंचाई विभाग के अधिकारियों को बारिश से पूर्व क्षतिग्रस्त व जर्जर तटबंधों की मरम्मत का निर्देश दिया गया है। काम में लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

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