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एडवाइजरी 18-45-31
Updated Wed, 06 Sep 2017 02:15 AM IST
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तेल के खेल को लेकर विवादित रही एंबुलेंस सेवा
- एप तैयार होने के बाद तमाम खामियां दूर होने की उम्मीद
गोंडा। नियम-कानून बनते हैं, लेकिन उनकी काट पहले ही तैयार हो जाती है। कुछ ऐसा ही हाल जिले में संचालित 102 व 108 एंबुलेंस सेवाओं का भी है। तेल के खेल को लेकर यह सेवा कई बार सुर्खियों में रही है। बावजूद इसके एंबुलेंसों से हैंडल किए जाने वाले केसों के वेरीफिकेशन को लेकर आज तक स्वास्थ्य महकमा कोई स्पष्ट रणनीति नहीं तैयार कर पाया है। जिससे इसमें गड़बड़ी की आशंकाएं ज्यादा रहती है, क्योंकि जिले में एंबुलेंस की निगरानी अभी भी उनकी जीपीएस लोकेशन से ही रही है। हालांकि जल्द ही एंबुलेंस सेवा के नाम पर होने वाली गड़बड़ियों को खत्म करने के लिए स्वास्थ्य विभाग एक एप तैयार करने में लगा है। जिससे इसके चालकों पर न सिर्फ नजर रखी जा सकेगी। बल्कि काफी हद तक इसमें होने वाली गड़बड़ियों पर भी नकेल लगेगी।
जिले में कितनी एंबुलेंस
102 सेवा की 40
108 सेवा की 27
एएलएस (एडवांस लाइफ सपोर्ट)- 2
इनसेट
किस एंबुलेंस का क्या है काम
102 सेवा की एंबुलेंस खासकर गर्भवती महिलाओं को उनकी डिलीवरी के वक्त अस्पताल तक लाने-ले जाने व उनके नवजात बच्चों को एक साल तक इलाज के लिए अस्पताल तक लाने-ले जाने के लिए है। यही नहीं सीजेरियन से अगर किसी महिला को बच्चा होता है तो उसे 42 दिनों तक अस्पताल तक लाने-ले जाने की सारी जिम्मेदारी 102 एंबुलेंस सेवा की होती है। वहीं, नसबंदी कराने वाली महिलाओं को भी इसी एंबुलेंस से लाकर उन्हें घर तक छोड़ने की व्यवस्था है। जबकि 108 एंबुलेंस सेवा हर प्रकार की इमरजेंसी के लिए है। मसलन, कोई जल जाए, कोई दुर्घटना हो या किसी गंभीर बीमार व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाना हो, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी 108 एंबुलेंस की होती है। यही नहीं पीएचसी से सीएचसी और सीएचसी से अगर कोई मरीज हायर सेंटर लखनऊ के लिए रेफर होता है तो उसे भी इसी एंबुलेंस के जरिए लखनऊ भेजा जाता है। लेकिन इसमें इस एंबुलेंस सेवा की जिम्मेदारी सिर्फ एक साइड तक मरीज को हायर सेंटर ले जाने की होती है।
इनसेट
सच से आज तक नहीं उठा पर्दा
जिले में एंबुलेंस सेवा के नाम पर होने वाले लाखों रुपये के भुगतान पर अबतक दर्जनों बार सवाल उठ चुके हैं। कभी आरोप तेल में खेल को लेकर लगा तो कभी फर्जी मरीजों को लाने-ले जाने का। जिसे लेकर स्वास्थ्य निदेशालय से कई बार एंबुलेंस सेवा का काम देख रही जीवीके इमरी कंपनी के लोगों की ओर से दी जाने वाली उस लिस्ट के वेरीफिकेशन के निर्देश दिए गए। जिसमें सम्बंधित मरीज को अस्पताल तक लाने-ले जाने की बात कही गई थी। लेकिन स्वास्थ्य अधिकारियों की ज्यादातर जांचों में पता यही चला कि जो नंबर कंपनी की ओर से सेवा मुहैया कराए जाने वाली मरीजों का दिया गया। उसमें सैकड़ों की संख्या में नम्बर स्विच ऑफ निकले तो कोई नम्बर मौजूद ही नहीं पाया गया। जिससे स्वास्थ्य विभाग की पड़ताल में आज तक इसका कोई सच बाहर नहीं आ सका। वहीं, दबी जुबां में लोग एंबुलेंस सेवाओं के फेरों में खपने वाले ईंधन की कालाबाजारी के आरोप जरूर लगाते रहे।
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इनसेट
क्या कहते हैं जिम्मेदार
जिले में 102 की 40 तो 108 की 27 एंबुलेंसों के अलावा दो एएएस एंबुलेंस लगातार मरीजों को सेवा मुहैया करवा रही हैं। जिनकी मानीटरिंग जीपीएस लोकेशन के आधार पर करते हैं। वहीं जीवीके इमरी की ओर से भी इनकी मानीटरिंग लगातार शासन में की जाती है। एंबुलेंस सेवा के नाम पर किसी प्रकार का कोई फर्जीवाड़ा आज तक जिले में नहीं हुआ है। स्वास्थ्य अधिकारी चाहे तो इसकी किसी भी स्तर पर जांच करा सकते हैं। प्रत्येक एबुंलेंस पर 2 ईएमटी के अलावा दो पायलट और एक रिलीवरी तैनात है। रोजाना एक एंबुलेंस औसतन 7-8 केस हैंडल करती है।
-उमाशंकर, व्यवस्थापक, जीवीके इमरी गोंडा
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- एप तैयार होने के बाद तमाम खामियां दूर होने की उम्मीद
गोंडा। नियम-कानून बनते हैं, लेकिन उनकी काट पहले ही तैयार हो जाती है। कुछ ऐसा ही हाल जिले में संचालित 102 व 108 एंबुलेंस सेवाओं का भी है। तेल के खेल को लेकर यह सेवा कई बार सुर्खियों में रही है। बावजूद इसके एंबुलेंसों से हैंडल किए जाने वाले केसों के वेरीफिकेशन को लेकर आज तक स्वास्थ्य महकमा कोई स्पष्ट रणनीति नहीं तैयार कर पाया है। जिससे इसमें गड़बड़ी की आशंकाएं ज्यादा रहती है, क्योंकि जिले में एंबुलेंस की निगरानी अभी भी उनकी जीपीएस लोकेशन से ही रही है। हालांकि जल्द ही एंबुलेंस सेवा के नाम पर होने वाली गड़बड़ियों को खत्म करने के लिए स्वास्थ्य विभाग एक एप तैयार करने में लगा है। जिससे इसके चालकों पर न सिर्फ नजर रखी जा सकेगी। बल्कि काफी हद तक इसमें होने वाली गड़बड़ियों पर भी नकेल लगेगी।
जिले में कितनी एंबुलेंस
102 सेवा की 40
108 सेवा की 27
एएलएस (एडवांस लाइफ सपोर्ट)- 2
इनसेट
किस एंबुलेंस का क्या है काम
102 सेवा की एंबुलेंस खासकर गर्भवती महिलाओं को उनकी डिलीवरी के वक्त अस्पताल तक लाने-ले जाने व उनके नवजात बच्चों को एक साल तक इलाज के लिए अस्पताल तक लाने-ले जाने के लिए है। यही नहीं सीजेरियन से अगर किसी महिला को बच्चा होता है तो उसे 42 दिनों तक अस्पताल तक लाने-ले जाने की सारी जिम्मेदारी 102 एंबुलेंस सेवा की होती है। वहीं, नसबंदी कराने वाली महिलाओं को भी इसी एंबुलेंस से लाकर उन्हें घर तक छोड़ने की व्यवस्था है। जबकि 108 एंबुलेंस सेवा हर प्रकार की इमरजेंसी के लिए है। मसलन, कोई जल जाए, कोई दुर्घटना हो या किसी गंभीर बीमार व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाना हो, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी 108 एंबुलेंस की होती है। यही नहीं पीएचसी से सीएचसी और सीएचसी से अगर कोई मरीज हायर सेंटर लखनऊ के लिए रेफर होता है तो उसे भी इसी एंबुलेंस के जरिए लखनऊ भेजा जाता है। लेकिन इसमें इस एंबुलेंस सेवा की जिम्मेदारी सिर्फ एक साइड तक मरीज को हायर सेंटर ले जाने की होती है।
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सच से आज तक नहीं उठा पर्दा
जिले में एंबुलेंस सेवा के नाम पर होने वाले लाखों रुपये के भुगतान पर अबतक दर्जनों बार सवाल उठ चुके हैं। कभी आरोप तेल में खेल को लेकर लगा तो कभी फर्जी मरीजों को लाने-ले जाने का। जिसे लेकर स्वास्थ्य निदेशालय से कई बार एंबुलेंस सेवा का काम देख रही जीवीके इमरी कंपनी के लोगों की ओर से दी जाने वाली उस लिस्ट के वेरीफिकेशन के निर्देश दिए गए। जिसमें सम्बंधित मरीज को अस्पताल तक लाने-ले जाने की बात कही गई थी। लेकिन स्वास्थ्य अधिकारियों की ज्यादातर जांचों में पता यही चला कि जो नंबर कंपनी की ओर से सेवा मुहैया कराए जाने वाली मरीजों का दिया गया। उसमें सैकड़ों की संख्या में नम्बर स्विच ऑफ निकले तो कोई नम्बर मौजूद ही नहीं पाया गया। जिससे स्वास्थ्य विभाग की पड़ताल में आज तक इसका कोई सच बाहर नहीं आ सका। वहीं, दबी जुबां में लोग एंबुलेंस सेवाओं के फेरों में खपने वाले ईंधन की कालाबाजारी के आरोप जरूर लगाते रहे।
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क्या कहते हैं जिम्मेदार
जिले में 102 की 40 तो 108 की 27 एंबुलेंसों के अलावा दो एएएस एंबुलेंस लगातार मरीजों को सेवा मुहैया करवा रही हैं। जिनकी मानीटरिंग जीपीएस लोकेशन के आधार पर करते हैं। वहीं जीवीके इमरी की ओर से भी इनकी मानीटरिंग लगातार शासन में की जाती है। एंबुलेंस सेवा के नाम पर किसी प्रकार का कोई फर्जीवाड़ा आज तक जिले में नहीं हुआ है। स्वास्थ्य अधिकारी चाहे तो इसकी किसी भी स्तर पर जांच करा सकते हैं। प्रत्येक एबुंलेंस पर 2 ईएमटी के अलावा दो पायलट और एक रिलीवरी तैनात है। रोजाना एक एंबुलेंस औसतन 7-8 केस हैंडल करती है।
-उमाशंकर, व्यवस्थापक, जीवीके इमरी गोंडा