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अब उपभोक्ता शापिंग बिल से पकड़वाएंगे टैक्स चोरी

Wed, 04 Oct 2017 10:47 PM IST
Updated Wed, 04 Oct 2017 10:47 PM IST
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अब उपभोक्ता शापिंग बिल से पकड़वाएंगे टैक्स चोरी

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अब उपभोक्ता शॉपिंग बिल से पकड़वाएंगे टैक्स चोरी

गोंडा। टैक्स चोरी करने वालों पर अब उपभोक्ताओं के बिलों की जांच से कड़ा शिकंजा कसेगा। अब उपभोक्ता खरीद करने वाली वस्तुओं के बिल से टैक्स चोरी पकड़वाएंगे।

उपभोक्ताओं के बिलों की जांच के लिए वाणिज्य कर मुख्यालय ने प्रदेश भर के उपभोक्ताओं के बिल संग्रहित करने के लिए नि:शुल्क व्हाट्सएप नम्बर व ई-मेल लांच किया है। उपभोक्ता इस पर खरीदारी के दौरान कारोबारी से प्राप्त बिल को इस बात की जांच के लिए भेज सकता है कि उसने जो खरीदारी पर टैक्स दिया है वह सरकार को मिल रहा है कि नही।
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विभाग बिल पर के आधार पर फर्म के टैक्स अदा करने न करने की जांच कर कार्रवाई करेगा। माल एंव सेवा कर एक जुलाई से लागू है। सरकार ने अपनी आय को बढ़ाने के लिए टैक्स पर फोकस कर रखा है।
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इसके लिए सरकार अपनी मशीनरी के अलावा अब उपभोक्ताओं की मदद लेने जा रही है। उपभोक्ताओं की ओर से दिया टैक्स सरकार को मिल रहा है कि नही इसके लिए इसके लिए शासन ने उपभोक्ताओं के बिल संग्रह करने की व्यवस्था की है।

वाणिज्य कर मुख्यालय पर बिल संग्रह केंद्र की स्थापना की जा रही है। इस व्यवस्था से सरकार का मानना है कि इससे जनसामान्य को जीएसटी प्रणाली से जुडने का जहां मौका मिलेगा वहीं टैक्स संग्रह में जनमानस की सहभागिता भी बढ़ेगी।

यही नही बिलों के संग्रहण की नयी व्यवस्था व बिलों के सत्यापन की कार्रवाई चलन में होने पर टैक्स की चोरी रोकने में मदद मिलेगी। अब सरकार इस व्यवस्था को लागू करने के साथ साथ उपभोक्ताओं को जागरूक करेगी। कर चोरी रोकने के लिए वाणिज्यकर विभाग इस व्यवस्था को प्रभावी करने जा रहा है।

वाणिज्यकर मुख्यालय पर उपभोक्ता यहां भेज सकेंगे बिल
* वाणिज्य कर मुख्यालय का व्हाट्स एप नम्बर - 723501111
* वाणिज्य कर मुख्यालय का ई-मेल नम्बर - यूपी सीबीसीसी एजदारेट जीमेल.काम

गोंडा। वाणिज्य कर मुख्यालय पर व्हाट्सएप व ई-मेल से प्राप्त होने वाले उपभोक्ताओं के भेजे गये बिलों को एक युनिक नम्बर आवंटित किया जाएगा। मुख्यालय से इन बिलों को उनके पते के आधार पर जोनल एडीशनल कार्यालय को भेजा जाएगा।

जोनल अधिकारी बिलों पर जीएसटीएन/टिन नम्बर अंकित न होने पर उन्हें सम्बन्धित ज्वाइंट कमिश्नर विशेष अनुसंधान शाखा को एक समय के अन्दर जांच के लिए प्रेषित किया जाएगा। सम्बन्धित कर निर्धारण अधिकारी ऐसे बिलों को व्यापारी के रिर्टन दाखिल के पत्रावली से मिलान कर के देखेगा कि उक्त बिल को उसमें शामिल किया है कि नही। खामी मिलने पर अधिकारी उक्त फर्म/व्यापारी पर टैक्स चोरी करने पर जुर्माने से दण्डित करेगा।

गोंडा। टैक्स चोरी करने वाली फर्मे/व्यापारी अक्सर उपभोक्ताओं को खरीदारी करने पर बिल नही देते हैं। कर की चोरी में बचने के लिए व्यापारी उपभोक्ताओं को बिल देने से बचते हैं।

कई व्यापारी तो कभी सादे कागज पर तो कुछ रंगीन प्रिंट ऐसे बिल पर खरीद का विवरण लिखकर जारी कर देते हैं जिसपर उनका जीएसटीएन/टिन नही होता है। लेकिन अब जीएसटी की नई व्यवस्था से उपभोक्ताओं व व्यापारियों में बिल लेने को लेकर झिगझिग व नोकझोंक बढ़ेगी।


शासन ने उपभोक्ताओं के बिलों की जांच से टैक्स चोरी रोकने की व्यवस्था शुरू कर दी है। कोई भी उपभोक्ता खरीदी गई वस्तुओं के बिल को शासन की ओर से निर्धारित व्हाट्सएप नम्बर व ई-मेल पर भेज सकता है। इससे कर चोरी रोकने में मदद मिलेगी और कर चोरी करने वाले लोगों पर कार्रवाई करने में आसानी होगी। इसमें उपभोक्ता हितों का पूरा ध्यान रखा जाएगा। उसे किसी जांच में भी नही बुलाया जाना है।
- संतोष कुमार सिंह, असिस्टेंट कमिश्नर वाणिज्य कर
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